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अहमदाबाद में 23 अगस्त 2026 को मना भारत का तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस, निजी कंपनियों के लिए क्षेत्र खुलने के छह साल बाद 440 से ज़्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप दर्ज
विज्ञान और अंतरिक्ष

अहमदाबाद में 23 अगस्त 2026 को मना भारत का तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस, निजी कंपनियों के लिए क्षेत्र खुलने के छह साल बाद 440 से ज़्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप दर्ज

फ़ोटो: ISRO / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप किया गया)

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23 अगस्त 2026 के समारोह पर ISRO की रिपोर्ट भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप 440 से ज़्यादा बताती है। 12 और 13 अगस्त के संसदीय उत्तर स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल पर लगभग 440 गिनते हैं, जिनमें 18 के पास IN-SPACe के प्राधिकरण हैं।

· · 8 मिनट का पठन

भारत ने अपना तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में ISRO के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) में मनाया, और आयोजन पर ISRO की रिपोर्ट 2020 के क्षेत्रीय सुधारों के बाद से देश में “440 से ज़्यादा” अंतरिक्ष स्टार्टअप दर्ज करती है। अंतरिक्ष विभाग के संसद में दिए दो लिखित उत्तर, 12 और 13 अगस्त के, यही आँकड़ा देते हैं: स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप।

यह दिन 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास चंद्रयान-3 लैंडर की सॉफ़्ट लैंडिंग की याद में मनाया जाता है। द वीक की 26 अगस्त 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस लैंडिंग के तीन दिन बाद बेंगलुरु में चंद्रयान-3 की टीम को संबोधित करते हुए यह तारीख़ घोषित की थी। उस लैंडिंग की कहानी चंद्रयान-3: दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग में है। यह लेख उस दूसरी चीज़ को देखता है जिसे 2026 के संस्करण ने मंच पर रखा, यानी निजी क्षेत्र।

अहमदाबाद में क्या हुआ

ISRO की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद इसलिए चुना गया कि SAC वहीं है और शहर में स्टार्टअप का एक तेज़ी से बढ़ता समूह है। विषय था “विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा”। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि थे, और गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित अन्य विभागों के मंत्री अर्जुनभाई देवाभाई मोढवाडिया सम्मानित अतिथि थे। अंतरिक्ष विभाग के सचिव और ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने अध्यक्षता की।

ISRO की रिपोर्ट के शब्दों में, शेखावत ने अंतरिक्ष सुधार को “अंतरिक्ष के अवसर का लोकतंत्रीकरण” बताया और कहा कि इसका मतलब निजीकरण नहीं है। IN-SPACe के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने कहा कि ISRO के बिना भारत में कोई अंतरिक्ष उद्योग नहीं होगा, और ISRO की रिपोर्ट जोड़ती है कि उसकी टीमों ने निजी प्रक्षेपणों का साथ ऐसे दिया जैसे वे ISRO के अपने हों। मोढवाडिया ने स्टार्टअप और उद्योग को गुजरात स्पेस पार्क में विनिर्माण लगाने का न्योता दिया। रिपोर्ट यह भी कहती है कि ISRO अब छह टन वर्ग के अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है।

स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम का सम्मान नारायणन ने किया। कंपनी का Vikram-1 रॉकेट पाँच हफ़्ते पहले अपनी पहली उड़ान में ही कक्षा तक पहुँच गया था। अंतरिक्ष दिवस के आयोजनों के दौरान देश भर में हुई प्रतियोगिताओं और क्विज़ के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।

प्रधानमंत्री की शुभकामनाएँ 23 अगस्त को साझा किए गए वीडियो संदेश के रूप में आईं। News On AIR के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए चुंबक है और निजी अंतरिक्ष प्रतिभा अपनी अलग पहचान बना रही है। IANS उन क्षेत्रों की सूची देता है जिनमें उनके अनुसार युवा इंजीनियर काम कर रहे हैं: प्रणोदन प्रणालियाँ, संमिश्र सामग्री, रॉकेट चरण और उपग्रह मंच।

440 का आँकड़ा कहाँ से आता है

12 अगस्त का लोकसभा उत्तर और 13 अगस्त का राज्यसभा उत्तर, दोनों परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिए। दोनों कहते हैं कि DPIIT के स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल के अनुसार भारत में लगभग 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पंजीकृत हैं।

उन्हीं उत्तरों में एक दूसरा आँकड़ा है जिसे पहले आँकड़े के साथ गड्डमड्ड करना आसान है। IN-SPACe, अंतरिक्ष विभाग की वह संस्था जो निजी अंतरिक्ष गतिविधि को प्राधिकृत और प्रोत्साहित करती है, ने 52 ग़ैर-सरकारी इकाइयों को 113 प्राधिकरण दिए हैं, और उन 52 में से 18 स्टार्टअप हैं। ये 18 एक अनुलग्नक में नामित हैं:

  • एग्निकुल कॉसमॉस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस और स्पेस किड्ज़ इंडिया, तीनों चेन्नई के
  • अक्षत एयरोस्पेस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, कॉसमोसर्व स्पेस इंडिया, दिगंतारा, गैलक्सआई और पिक्सेलस्पेस इंडिया, सभी बेंगलुरु के
  • अज़िस्ता BST, ध्रुव स्पेस और स्काईरूट एयरोस्पेस, तीनों हैदराबाद के
  • HEX20Labs (तिरुवनंतपुरम), इनऑर्बिट स्पेस टेलीकम्युनिकेशंस (नई दिल्ली), मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज़ (नवी मुंबई), एनस्पेस टेक इंडिया (तेनाली), पियरसाइट स्पेस (अहमदाबाद) और टेकमी2स्पेस टेक्नोलॉजीज़ (के.वी. रंगा रेड्डी)

उत्तर कहता है कि IN-SPACe के पास मान्यता प्राप्त अंतरिक्ष स्टार्टअप का राज्यवार डेटा नहीं है।

दूसरी गिनतियाँ 440 के आसपास हैं। 18 जुलाई 2026 का प्रेस सूचना ब्यूरो का बैकग्राउंडर कहता है कि संख्या 2014 में एक स्टार्टअप से बढ़कर 2026 में 400 से ऊपर हो गई। IN-SPACe के पी. के. जैन ने, जो एक अंतरिक्ष नीति सम्मेलन में बोल रहे थे और जिन्हें आउटलुक बिज़नेस ने जुलाई में रिपोर्ट किया, कहा कि छह साल पहले की इकाई अंकों वाली संख्या अब 450 से ज़्यादा हो चुकी है। ये अलग तारीख़ों और अलग रजिस्टरों की गिनतियाँ हैं, इसलिए यह लेख ISRO और संसद के लगभग 440 के आँकड़े का इस्तेमाल करता है।

जून 2020 का फ़ैसला

शीर्षक का छह साल का फ़ासला 24 जून 2020 से चलता है, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐसे सुधारों को मंज़ूरी दी जिनका उद्देश्य, प्रेस सूचना ब्यूरो के शब्दों में, “अंतरिक्ष गतिविधियों की पूरी शृंखला में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना” था। उस रिलीज़ ने निजी कंपनियों को भारतीय अंतरिक्ष ढाँचे के इस्तेमाल में बराबरी का मैदान देने के लिए IN-SPACe बनाया, अंतरिक्ष विभाग की वाणिज्यिक कंपनी न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) से कहा कि वह अंतरिक्ष गतिविधि को आपूर्ति-संचालित मॉडल से माँग-संचालित मॉडल की ओर ले जाए, और कहा कि ISRO अनुसंधान, नई तकनीक, अन्वेषण और मानव अंतरिक्ष उड़ान पर ध्यान देगा।

18 जुलाई के बैकग्राउंडर के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने फिर पूरी अंतरिक्ष मूल्य शृंखला को ग़ैर-सरकारी इकाइयों के लिए खोल दिया। अनुमति की प्रक्रिया, और उसके तहत उड़े तीन निजी रॉकेट, भारत की 2023 की अंतरिक्ष नीति और निजी रॉकेटों को प्रक्षेपण की अनुमति कैसे मिलती है में हैं।

बैकग्राउंडर जोड़ता है कि जून 2026 तक IN-SPACe ने 4,500 से ज़्यादा संगठन पंजीकृत किए थे और 106 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। वह उस तारीख़ पर 133 प्राधिकरण देता है, जबकि अगस्त के संसदीय उत्तर 113 कहते हैं। अगस्त का आँकड़ा बाद का है और ऊपर वही इस्तेमाल हुआ है।

सरकार ने स्टार्टअप के पीछे क्या रखा है

उत्तर साधनों की सूची देते हैं। IN-SPACe सीड फ़ंड योजना 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान देती है। 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फ़ंड वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पाँच साल में, हर साल 100 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये के हिसाब से लगाया जाना है। 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फ़ंड स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए परियोजना लागत का 60 प्रतिशत तक कवर करता है, जिसकी सीमा हर परियोजना पर 25 करोड़ रुपये है। सैटेलाइट बस ऐज़ अ सर्विस पहल का मक़सद स्वदेशी उपग्रह मंच बनाना है।

तकनीक के मोर्चे पर, 12 अगस्त के उत्तर के अनुसार NSIL ने 118 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो ISRO या अंतरिक्ष विभाग में विकसित 83 तकनीकों को कवर करते हैं। सूची में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की तकनीक और IMS-1 उपग्रह बस शामिल हैं। IN-SPACe PSLV और LVM3 प्रक्षेपण यान तकनीक को निजी उद्योग को सौंपने की एक योजनाबद्ध प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।

अंतरिक्ष विभाग 31 मार्च 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप में संचयी निवेश लगभग 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताता है, जिसमें शुरुआती सीड राउंड से बड़े ग्रोथ-चरण के राउंड की ओर बदलाव दिखता है। बैकग्राउंडर कहता है कि IN-SPACe ने कैलेंडर वर्ष 2025 में स्टार्टअप में 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश सुगम बनाया।

13 अगस्त का उत्तर साल-दर-साल उस पहुँच की भी तालिका देता है जो IN-SPACe ने जुटाई, प्रक्षेपण स्लॉट से लेकर परीक्षण तक। 2022 में इसका मतलब Vikram-S के लिए उप-कक्षीय प्रक्षेपण की पहुँच था। 2026 में इसका मतलब श्रीहरिकोटा के पहले प्रक्षेपण स्थल का Vikram-1 के लिए इस्तेमाल था, साथ में दूसरे स्टार्टअप के लिए डॉकिंग तंत्र की प्रयोगशाला जाँच और शॉक परीक्षण।

अलग-अलग योजनाओं में पैसा अलग रफ़्तार से चल रहा है। 31 जुलाई 2026 तक, उत्तर संचयी कुल स्वीकृत और वितरित 20,032.34 लाख रुपये (लगभग 200 करोड़ रुपये) दिखाता है, जबकि योजनाओं का संयुक्त दायरा 2,14,000 लाख रुपये (2,140 करोड़ रुपये) है। इसका ज़्यादातर हिस्सा, 18,893.04 लाख रुपये, वेंचर फ़ंड का है, जिसे 31 अक्टूबर 2025 को SEBI की मंज़ूरी मिली थी। उस तारीख़ तक टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फ़ंड ने तीन इकाइयाँ चुनी थीं और कोई वितरण नहीं दिखाया था। तीन वित्त वर्षों को कवर करने वाला 12 अगस्त का उत्तर संचयी कुल थोड़ा कम, 19,976.34 लाख रुपये, रखता है।

स्काईरूट, मंच पर खड़ी कंपनी

Vikram-1 ने 18 जुलाई 2026 को दोपहर 12:05:30 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के पहले प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी। ISRO स्काईरूट को भारतीय ज़मीन से कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण करने वाली पहली निजी कंपनी कहता है, और वह भी पहले ही प्रयास में। वाया सैटेलाइट 60 डिग्री झुकाव पर 450 किमी की कक्षा बताता है, जिसमें स्काईरूट का SCOPE उपग्रह और ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व तथा DCubed के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड थे। IEEE स्पेक्ट्रम भारत को चीन और अमेरिका के बाद तीसरा देश बताता है जिसकी घरेलू कंपनी कक्षा तक पहुँची।

ISRO का विवरण वह सूची देता है जो एजेंसी ने उपलब्ध कराया: श्रीहरिकोटा में पहले चरण की मोटर की ढलाई और स्थैतिक परीक्षण, अपने तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र में Raman-I तरल इंजन का परीक्षण, और स्काईरूट के संचालन पर चौबीसों घंटे नज़र रखती एक सुरक्षा टीम। IN-SPACe ने मिशन तैयारी की समीक्षाएँ और प्रक्षेपण मंज़ूरियाँ दीं।

स्काईरूट ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का इस्तेमाल अपनी ख़ुद की जानकारी देने के लिए किया। बिज़नेस टुडे के अनुसार कंपनी ने 23 अगस्त को पोस्ट किया कि उसके दूसरे Vikram-1 का पहला चरण श्रीहरिकोटा के रास्ते में है। रिपोर्ट ने प्रक्षेपण की कोई तारीख़ नहीं दी।

जो लक्ष्य इस दिन दोहराए गए

18 जुलाई का बैकग्राउंडर भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को आज लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर की आँकता है और 2030 तक 40 अरब से 45 अरब अमेरिकी डॉलर तथा 2040 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुमान रखता है। अहमदाबाद में, मोरंग एक्सप्रेस और क़ज़ाइनफ़ॉर्म के अनुसार शेखावत ने अगले दशक में संभावना लगभग 44 अरब अमेरिकी डॉलर बताई, जिसे क़ज़ाइनफ़ॉर्म 2033 की तारीख़ देता है; News On AIR ने यह आँकड़ा 45 अरब अमेरिकी डॉलर बताया। शेखावत ने यह भी कहा कि वृद्धि को पैसे के साथ-साथ तकनीक और कुशल रोज़गार पर भी परखा जाना चाहिए, और अंतरिक्ष मलबे, साइबर सुरक्षा और AI के ज़िम्मेदार इस्तेमाल को चुनौतियों के रूप में गिनाया।

मोरंग एक्सप्रेस के अनुसार नारायणन ने आयोजन में कहा कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, यानी भारत का नियोजित अंतरिक्ष स्टेशन, 2035 के लिए लक्षित है और उसका पहला मॉड्यूल पहले ही मंज़ूर हो चुका है।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. ISRO: 3rd National Space Day 2026 celebrated at Ahmedabad
  2. ISRO: About National Space Day 2026
  3. Press Information Bureau: Parliament Question, Space Startups (Lok Sabha, 12 August 2026)
  4. Press Information Bureau: Parliament Question, Support to Space Startups (Rajya Sabha, 13 August 2026)
  5. Press Information Bureau: Historic reforms initiated in the Space sector (24 June 2020)
  6. Press Information Bureau: Vikram-1, Charting India's Cosmic Future (backgrounder, 18 July 2026)
  7. ISRO: First private orbital launch lifts off from Sriharikota
  8. News On AIR: Prime Minister Modi extends greetings on National Space Day (23 August 2026)
  9. Telangana Today (IANS): National Space Day, PM Modi hails India's rise, says Gen Z building new technologies (23 August 2026)
  10. Morung Express: India's space economy poised to reach $44 billion in next decade, Gajendra Singh Shekhawat
  11. Qazinform: India eyes $44bn space economy by 2033 amid rapid space-sector growth (25 August 2026)
  12. Outlook Business: Space startup ecosystem soars to 450-plus ventures as policy reforms fuelled growth, IN-SPACe Dir
  13. Via Satellite: Skyroot Aerospace Makes History for India With First Launch Success (20 July 2026)
  14. IEEE Spectrum: Startup Skyroot nails an orbital launch on the first try
  15. Business Today: Skyroot gears up for next Vikram-1 launch, moves stage 1 to Sriharikota (24 August 2026)
  16. The Week: Aug 23 to be National Space Day, Chandrayaan-3 landing point named Shivshakti (26 August 2023)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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