फ़ोटो: PJeganathan / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप किया गया)
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गुवाहाटी से असम वन विभाग के साथ चलने वाले पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम ने 7 जून 2026 को मानस राष्ट्रीय उद्यान के कुरीबील घास के मैदानों में बंदी-प्रजनित 15 हॉग छोड़े। साझेदारों की गिनती है कि 2008 से अब तक 194 हॉग पैदा कर छोड़े गए हैं, और उनका लक्ष्य 2040 तक लगभग 300 जंगली जानवरों का है।
7 जून 2026 को असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के कुरीबील घास के मैदानों में बंदी-प्रजनित 15 पिग्मी हॉग, नौ मादा और छह नर, छोड़े गए। ड्यूरेल के अनुसार कुरीबील वही जगह है जहाँ 30 साल पहले पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम के छह संस्थापक जानवर पकड़े गए थे। इंडिया टुडे एनई और महाबाहु पोर्टल दोनों ने बताया कि कार्यक्रम और असम वन विभाग ने स्थानीय समुदायों के साथ आठ साल उस घास को बहाल करने और बचाने में लगाए, और कुरीबील में नौ साल से पिग्मी हॉग की कोई पुष्ट निशानी नहीं थी।
कार्यक्रम के साझेदार गिनते हैं कि 2008 से असम में 194 हॉग पैदा कर छोड़े गए हैं। आईयूसीएन वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप के अनुसार पिग्मी हॉग दुनिया का सबसे छोटा जंगली सूअर है, और प्रजनन तथा रिहाई का काम असम भर के स्थलों पर भारतीय वैज्ञानिकों की अगुवाई वाली एक क्षेत्रीय टीम करती है।
कुरीबील में क्या हुआ
15 हॉग कार्यक्रम के तहत बक्सा ज़िले में मानस की बांसबाड़ी रेंज में छोड़े गए। महाबाहु के अनुसार रिहाई के समय असम वन विभाग के मुख्य वन्यजीव वार्डन, एक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मानस टाइगर रिज़र्व के फ़ील्ड निदेशक मौजूद थे। मुख्य वन्यजीव वार्डन ने इसे “उल्लेखनीय संरक्षण उपलब्धि” कहा। इंडिया टुडे एनई के अनुसार असम के मुख्यमंत्री ने 9 जून 2026 को इस पर “आज़ादी की ओर एक दौड़” शीर्षक के साथ पोस्ट किया।
यह 2020 के बाद मानस में छठी रिहाई थी, जिससे उद्यान में दोबारा बसाए गए हॉग की संख्या 78 हो गई। ड्यूरेल का ब्योरा जोड़ता है कि कार्यक्रम पाँच हॉग को रेडियो से ट्रैक करता है, ताकि समझा जा सके कि वे कैसे जीते हैं और आवास का कैसे इस्तेमाल करते हैं, जबकि व्यापक निगरानी कैमरा ट्रैप और निशान सर्वेक्षण से होती है। उसकी योजना पाँच साल में लगभग 80 और रिहाइयों और 2040 तक करीब 300 जानवरों की जंगली आबादी की है। 29 अक्टूबर 2026 तक दोनों साझेदारों के घोषित लक्ष्य हैं, नतीजे नहीं।
छह हॉग, और उससे ज़्यादा की अनुमति नहीं
वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप की प्रोफ़ाइल के अनुसार, वयस्क पिग्मी हॉग कंधे पर लगभग 25 सेमी ऊँचा होता है और उसका वज़न 6.6 से 9.7 किलो होता है, और प्रोफ़ाइल यह भी बताती है कि दोनों लिंग घोंसले बनाते हैं। वह हिमालय के दक्षिण में तलहटी की नदी-किनारे की ऊँची, घनी घास में रहता है। समूह कहता है कि 1971 तक दो दशकों में कोई जानवर न दिखने से उसे विलुप्त मान लिया गया था, फिर वह बरनदी के पास और मानस में दोबारा मिला। डाउन टू अर्थ ने 1971 की खोज के लिए अकेले बरनदी का नाम दिया, इसलिए जगह के बारे में दोनों विवरण थोड़ा भिन्न हैं।
कार्यक्रम टीम की 2023 की समीक्षा के अनुसार 1993 तक जंगली जानवर सिर्फ़ मानस की कुछ जेबों में बचे थे। उन्हें पालने की एक पहले की कोशिश नाकाम रही: कार्यक्रम के देका, नारायण और दास का लिखा एफ़एओ केस स्टडी कहता है कि 1971 से 1990 के बीच 50 से ज़्यादा जंगली हॉग बंदी में लाए गए, और 1993 तक कहीं भी बंदी में एक भी ज़िंदा नहीं था।
कार्यक्रम 1995 में ड्यूरेल, असम सरकार के वन विभाग, आईयूसीएन वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बनाया, और गुवाहाटी के संरक्षण समूह आरण्यक तथा भारतीय संगठन इकोसिस्टम्स-इंडिया ने बाद में रोज़ का काम सँभाला। आरण्यक की 2022 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 1996 में प्रजनन शुरू करने के लिए मानस की बांसबाड़ी रेंज से छह हॉग, दो नर और चार मादा, पकड़े गए। कार्यक्रम के संस्थापक गौतम नारायण ने डाउन टू अर्थ से कहा: “हमें केवल छह हॉग की अनुमति दी गई थी।” वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप की प्रोफ़ाइल कहती है कि पकड़ना मादाओं की अपेक्षित गर्भावस्था के बीच के समय पर रखा गया था, और चार में से तीन मादाओं ने छह हफ़्ते के भीतर 13 बच्चे दिए। विज्ञप्ति के अनुसार लगभग पाँच साल में बंदी स्टॉक 77 हो गया, और बाद में चार और जंगली हॉग उसमें जुड़े, एक 2001 में और तीन 2013 में।
बंदी हॉग को जंगली होने के लिए कैसे तैयार किया जाता है
प्रजनन केंद्र गुवाहाटी के किनारे बसिष्ठ में है। नामेरी राष्ट्रीय उद्यान के पास पोटासली में दूसरा स्थल 2006 से रिहाई-पूर्व सुविधा है, धृतिमान दास, जोनमणि कलिता और पराग ज्योति देका की 2023 की समीक्षा बताती है। असंबद्ध, ज़्यादातर युवा हॉग के समूह वहाँ 2,400 से 3,200 वर्ग मीटर के बाड़ों में पाँच से छह महीने बिताते हैं, और उनका पूरक भोजन रोज़ की ज़रूरत के चौथाई से कम कर दिया जाता है ताकि वे ख़ुद चारा खोजें।
रिहाई स्थल पर हर समूह लगभग 100 वर्ग मीटर के बाँस के “सॉफ़्ट रिलीज़” बाड़े में तीन दिन पूरे चारे के साथ रखा जाता है, जिसके चारों ओर हाथियों से बचाव के लिए सौर-ऊर्जा से चलने वाली बाड़ है। फिर बाड़ के हिस्से हटा दिए जाते हैं और एक कैमरा ट्रैप लगाया जाता है। लेखक लिखते हैं कि हॉग बेहद शर्मीले हैं और उनका पीछा करना कठिन है, और 3 मीटर से ऊँची घास में गैंडे, हाथी और बाघ भी शरण पाते हैं, जिससे क्षेत्र का काम जोखिम भरा हो जाता है। हार्नेस, कान के टैग और दूसरे लगाव सीमित रूप से सफल रहे, और टीम अब पेट में प्रत्यारोपित रेडियो ट्रांसमीटर इस्तेमाल करती है। भारत का दूसरा जाना-माना संरक्षण-प्रजनन प्रयास, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए, हमारे बस्टर्ड लेख में है।
चार रिहाई स्थल और अब तक की गिनतियाँ
मानस से लगभग 150 किमी पूर्व में सोनाई रूपाई वन्यजीव अभयारण्य में 2008 में पहली रिहाई हुई, जिसे इसलिए चुना गया कि गेलगेली के छोटे, सुरक्षित घास के मैदान जल्दी बहाल हो सकते थे। वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप अगले साल वहाँ पहले जंगली जन्म दर्ज करता है। कुल मिलाकर 2008 से 2010 के बीच सोनाई रूपाई में 35 हॉग गए, और अभयारण्य के कर्मचारियों को आवास प्रबंधन और निगरानी का प्रशिक्षण दिया गया।
2023 की समीक्षा के अनुसार ओरंग राष्ट्रीय उद्यान को 2011 से 2015 तक 59 हॉग मिले: क्रमिक वर्षों में 13, 12, 14, 11 और 9। आरण्यक की 2022 की प्रेस विज्ञप्ति ने कहा कि वहाँ छोड़ी गई आबादी लगभग ढाई गुना बढ़ गई और रिहाई स्थलों से दूर के इलाक़ों तक फैल गई। ओरंग की आबादी के अनुमान समय के साथ बढ़े हैं और अलग-अलग तरीक़ों से आते हैं। एफ़एओ केस स्टडी ने 2022 में उसे 150 से ऊपर रखा, 2023 की समीक्षा ने घोंसला सर्वेक्षणों से 120 या अधिक दिए, और जून 2026 की रिपोर्टें लगभग 200 कहती हैं और मानती हैं कि वे पूरी तरह जंगल में जन्मे हैं।
बरनदी वन्यजीव अभयारण्य, जहाँ आख़िरी निश्चित रिकॉर्ड 1991 में था, में 2016 से 22 हॉग गए, जब कार्यक्रम के कर्मचारियों और मज़दूर समूहों ने 2014 और 2015 में पेड़ों के पौधे और आक्रामक पौधे साफ़ किए थे। मानस दूसरे जानवरों के लिए भी पुनर्वास स्थल रहा है, और वहाँ भेजे गए गैंडों की चर्चा काजीरंगा के लेख में है। हॉग के लिए रिहाइयाँ 2020 से ख़ुद मानस में पहुँचीं: 2020 में 14, 2021 में 12 और 8 तथा 10 जून 2022 को 10, यानी 2022 के मध्य तक 36, फिर 2023 की समीक्षा तक 54 और जून 2026 तक 78।
अलग-अलग तारीख़ों पर प्रकाशित कुल संख्याएँ आपस में मेल खाती हैं। कार्यक्रम ने 2018 तक 116 हॉग छोड़े (35, 59 और 22)। आरण्यक ने जून 2022 की रिहाई के बाद 152 गिने, 2023 की समीक्षा ने 170, ड्यूरेल की टीम प्रोफ़ाइल ने 179, और जून 2026 में छोड़े गए 15 के साथ 194 हुए। एक स्रोत अलग खड़ा है: एफ़एओ केस स्टडी कुल 142 देता है, जबकि उसकी अपनी आँकड़ों की सूची 140 जुड़ती है।
भारत और जर्सी की साझेदारी, आगे भारतीय टीम
ड्यूरेल जर्सी में स्थित एक चैरिटी है और कार्यक्रम साझा प्रयास है, जिसे आरण्यक की प्रेस विज्ञप्ति ड्यूरेल, असम सरकार, वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की साझेदारी बताती है। काम करने वाले लोग असम में हैं। पराग ज्योति देका कार्यक्रम के निदेशक हैं और आरण्यक के संकटग्रस्त प्रजाति पुनरुद्धार कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर भी, और दास क्षेत्र के वैज्ञानिक हैं। ड्यूरेल की टीम प्रोफ़ाइल कहती है कि कार्यक्रम 1996 में एक स्थल पर तीन लोगों से बढ़कर नौ स्थलों पर 29 कर्मचारियों तक पहुँचा, जिनमें 70 प्रतिशत 30 से कम उम्र के हैं।
एफ़एओ केस स्टडी बताती है कि साझेदारों के बीच समझौते के तहत सभी बंदी-प्रजनित हॉग का स्वामित्व असम सरकार के पास है और जानवरों के किसी भी स्थानांतरण के लिए सभी की सहमति चाहिए। तत्कालीन मानस फ़ील्ड निदेशक ने 2022 की रिहाई पर कहा कि मानस टाइगर रिज़र्व कार्यक्रम का स्रोत स्टॉक है और नई रिहाइयाँ ऐसे निगरानी तरीक़े बनाने का मौक़ा थीं जो हर साल दोहराए जा सकें।
रेड लिस्ट क्या कहती है
आईयूसीएन रेड लिस्ट पिग्मी हॉग को मानदंड डी के तहत संकटग्रस्त सूचीबद्ध करती है, जिसका आकलन 1 फ़रवरी 2016 को हुआ (प्रविष्टि मैजार्ड, नारायण और देका को श्रेय देती है) और जो 2019 में प्रकाशित हुआ। वह 100 से 250 परिपक्व जानवर देती है, ऐसी आबादी जो बुरी तरह खंडित है, और रुझान अज्ञात दर्ज है। पहले वह गंभीर रूप से संकटग्रस्त थी; कार्यक्रम टीम 2023 की समीक्षा और एफ़एओ केस स्टडी में कहती है कि ओरंग में दोबारा बसाने के बाद 2016 में उसे एक श्रेणी नीचे लाया गया। ड्यूरेल का 2020 का रिहाई पन्ना और डाउन टू अर्थ का 2018 का लेख अब भी “गंभीर रूप से संकटग्रस्त” कहते हैं, जो रेड लिस्ट की प्रविष्टि नहीं कहती।
देका, हडसन, दास और केनरली के 2022 के एक अलग आईयूसीएन ग्रीन स्टेटस आकलन ने हॉग को 8 प्रतिशत का प्रजाति पुनरुद्धार स्कोर दिया, “क्रिटिकली डिप्लीटेड” श्रेणी में, और 2023 की समीक्षा बताती है कि संरक्षण कार्य उसे ऊँची “संरक्षण विरासत” देता है। वही समीक्षा जंगली आबादी 150 से 250 जानवर रखती है, जिनमें 100 से 150 मानस में और उतने ही ओरंग में हैं। एफ़एओ केस स्टडी और 2023 की समीक्षा के अनुसार यह प्रजाति भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में है।
आग, सूअर और एक वायरस
वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप सूखे मौसम में घास जलाने को पिग्मी हॉग के लिए अकेला सबसे अहम ख़तरा कहता है। 2023 की समीक्षा आक्रामक पौधों और घास के मैदान में पेड़ों के अतिक्रमण को दूसरी समस्याएँ गिनाती है, जिन्हें मानस का काम घास के मैदान प्रबंधन के परीक्षणों से सँभालता है।
ड्यूरेल के अनुसार अफ़्रीकी स्वाइन फ़ीवर, सूअरों की एक विषाणु-जनित बीमारी, की पुष्टि भारत में 18 मई 2020 को हुई। ड्यूरेल का 2020 का ब्योरा कहता है कि तब कोई टीका नहीं था। देका ने कहा “हम पूरी बंदी आबादी खो सकते थे”, और केंद्रों ने आगंतुकों पर रोक लगाई, बाड़ और संक्रमणमुक्ति बढ़ाई और चारे से शकरकंद हटा दी। देका ने पत्रिका साइंस से कहा, जैसा डाउन टू अर्थ ने अप्रैल 2023 में बताया, कि ओरंग में जोखिम कम है क्योंकि आसपास कुछ ही पालतू सूअर रहते हैं, जबकि मानस में जंगली सूअर किनारे के गाँवों में घुसते हैं जहाँ घर-आँगन के सूअर पाले जाते हैं, और पिग्मी हॉग पर असर अभी ज्ञात नहीं है।
अगले चरण के लिए कार्यक्रम का कहना है कि पाँच साल में लगभग 80 और बंदी-प्रजनित हॉग मानस भेजे जाएँगे, 2040 तक लगभग 300 जंगली जानवरों के लक्ष्य के मुक़ाबले।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- Durrell Wildlife Conservation Trust: Full circle moment as the world's smallest pig returns home (11 June 2026)
- India Today NE: Pygmy hogs return to Assam's Manas grasslands after nine years without sightings (7 June 2026)
- Mahabahu: 15 more pygmy hogs return to their historical home (June 2026)
- India Today NE: Assam CM Himanta Biswa Sarma hails release of 15 pygmy hogs into Manas National Park (9 June 2026)
- IUCN Red List of Threatened Species: Porcula salvania (Pygmy Hog), Meijaard, Narayan and Deka, assessed 1 February 2016, and Green Status assessment 2022
- IUCN SSC Wild Pig Specialist Group: Pygmy hog, detailed profile
- Das, Kalita and Deka: Pygmy Hog Conservation, Current Status and Future Prospects, GUINEIS Journal vol. X(2), 2023, pp. 104 to 110
- FAO India: Pygmy hog, back from the brink, a case study by Parag Jyoti Deka, Goutam Narayan and Dhritiman Das (20 May 2022)
- Aaranyak: press release, 10 rare Pygmy Hogs released in Assam's Manas National Park (10 June 2022)
- ThePrint, PTI: Ten pygmy hogs released in Manas National Park (10 June 2022)
- Down To Earth: The pygmy hog, to the brink of extinction and back (Azera Parveen Rahman, 25 April 2018)
- Down To Earth: African Swine Fever threatens India's Pygmy Hog, other Asian wild pig species, Science article (Rajat Ghai, 27 April 2023)
- Durrell: Rare pygmy hogs released into the wild (Manas release, 2020)
- Durrell: Team spotlight, the Pygmy Hog Conservation Programme
- Durrell: Rare pygmy hogs in lockdown after African swine fever hits India (2020)
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