फ़ोटो: ISRO / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप किया गया)
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रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल अपना पहला प्रक्षेपण विक्रम-1 पर और दूसरा उन्नत विक्रम-1यू पर करेगी, जो अभी बन रहा है। किसी भी कंपनी ने कीमत या प्रक्षेपण की तारीख प्रकाशित नहीं की है।
हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस, जिसका विक्रम-1 रॉकेट 18 जुलाई 2026 को कक्षा में पहुँचा, को अमेरिका से प्रक्षेपण का ऑर्डर मिला है। अमेरिकी अंतरिक्ष स्टार्टअप रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल ने 14 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि उसने स्काईरूट से दो समर्पित प्रक्षेपण खरीदे हैं। पहला विक्रम-1 पर उड़ेगा। दूसरा विक्रम-1यू पर उड़ेगा, जो एक उन्नत संस्करण है और अभी विकास में है।
इस तरह रॉकेट की पहली उड़ान के तीन महीने से भी कम समय में एक विदेशी व्यावसायिक ग्राहक बही-खाते में आ गया है। कंपनियों ने कीमत, प्रक्षेपण की तारीखें या रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल का कौन-सा अंतरिक्ष यान जाएगा, यह प्रकाशित नहीं किया है।
दोनों कंपनियों ने क्या घोषणा की
वाया सैटेलाइट और पेलोड दोनों घोषणा की तारीख 14 अक्टूबर बताते हैं। विज्ञप्ति को idrw.org ने 15 अक्टूबर की तारीख के साथ और एवरटिक ने 19 अक्टूबर को दोबारा छापा, इसलिए पुनर्प्रकाशन की तारीखें घोषणा की तारीख से अलग हैं।
विज्ञप्ति कहती है कि प्रक्षेपण रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल को पक्का कार्यक्रम और क्षमता देते हैं, और वे उन प्रक्षेपणों में जुड़ते हैं जिनकी कंपनी अमेरिकी स्थलों से योजना बना रही है। एवरटिक के विवरण के अनुसार वह यह भी कहती है कि सौदा विक्रम परिवार में स्काईरूट के व्यावसायिक प्रक्षेपण कार्यक्रम को फैलाता है। समर्पित प्रक्षेपण एक ग्राहक के पेलोड के लिए बुक होता है, कई ग्राहकों में साझा नहीं।
रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी बेन नोवैक ने कारण सीधे शब्दों में बताया: “अभी प्रक्षेपण क्षमता की सचमुच कमी है।” स्काईरूट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा, “रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल उस तरह के महत्त्वाकांक्षी वैश्विक अंतरिक्ष अभियान का प्रतिनिधित्व करती है जिसकी सेवा के लिए विक्रम परिवार बनाया जा रहा है।”
न्यू स्पेस इकॉनमी का विश्लेषण कहता है कि समर्पित प्रक्षेपण साझा उड़ान की एक सीट की तुलना में संचालक को तैनाती और कक्षा पर ज़्यादा अधिकार देता है। जिस कंपनी को कुछ भी बेचने से पहले अपने आईने एक खास कक्षा में रखने हों, उसके लिए ऐसे नियंत्रण का मतलब है।
विक्रम-1 कहाँ खड़ा है
विक्रम-1 ने 18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से भारतीय समयानुसार दोपहर 12:05:30 बजे उड़ान भरी। इसरो कहता है कि यह “पहली बार है कि किसी निजी भारतीय कंपनी ने भारतीय ज़मीन से रॉकेट का कक्षीय प्रक्षेपण किया है।” हमारी उस उड़ान की रिपोर्ट में ब्योरा है, और निजी रॉकेट को मंज़ूरी का रास्ता हमारे भारत की अंतरिक्ष नीति पर व्याख्यात्मक लेख में बताया गया है।
स्काईरूट की वेबसाइट विक्रम-1 को निचली पृथ्वी कक्षा में 350 किलोग्राम तक और सूर्य-समकालिक कक्षा में 260 किलोग्राम तक बताती है, और समर्पित तथा साझा, दोनों तरह के प्रक्षेपण पेश करती है। वाया सैटेलाइट भी 350 किलोग्राम देता है। इंक42 बिना स्रोत बताए 480 किलोग्राम और 290 किलोग्राम के ऊँचे आँकड़े देता है, इसलिए यह लेख कंपनी के अपने आँकड़े इस्तेमाल करता है।
23 अगस्त 2026 के राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इसरो ने अहमदाबाद के आयोजन में स्काईरूट की टीम को सम्मानित किया। उसका पृष्ठ 2020 के सुधारों के बाद 440 से ज़्यादा भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप गिनता है, और हमारा भारत के न्यूस्पेस स्टार्ट-अप लेख उस क्षेत्र को बताता है जिसका स्काईरूट हिस्सा है। उसी दिन स्काईरूट ने पोस्ट किया कि उसके दूसरे विक्रम-1 का पहला चरण श्रीहरिकोटा के रास्ते में है। बिज़नेस टुडे ने रिपोर्ट किया कि पोस्ट में प्रक्षेपण की तारीख नहीं थी, और इस लेख के लिए देखे गए किसी स्रोत ने तब से तारीख नहीं दी है।
दूसरा रॉकेट अभी बन रहा है
विक्रम-1यू सौदे का वह हिस्सा है जो अभी उड़ा नहीं है। रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल की विज्ञप्ति उसे अतिरिक्त पहले-चरण बूस्टरों और बेहतर प्रदर्शन वाला बताती है। स्काईरूट की वेबसाइट उसे सूचीबद्ध नहीं करती।
दो मीडिया संस्थान तारीख देते हैं। पेलोड कहता है कि पहला विक्रम-1यू अभियान 2027 की पहली तिमाही में अपेक्षित है, और इंक42 ने उसी तिमाही की रिपोर्ट की, साथ में उससे पहले इसी साल विक्रम-1 के दो और प्रक्षेपणों तक की बात की। दोनों में से कोई भी तारीख स्काईरूट के किसी नामित अधिकारी के नाम नहीं करता, और कंपनियों की अपनी विज्ञप्ति में वह नहीं है। पेलोड विक्रम-1यू के लिए करीब 550 किलोग्राम का पेलोड आँकड़ा भी देता है। वह आँकड़ा किसी और स्रोत में नहीं है, इसलिए यहाँ छोड़ दिया गया है।
चंदाना ने जुलाई में इंक42 से कहा कि स्काईरूट को भारत, अमेरिका, यूरोप, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया से “बहुत रुचि” दिख रही है, पर ग्राहकों के नाम नहीं लिए।
रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल कौन है
रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल बड़े आईनों वाले उपग्रह बना रही है जो सूरज की रोशनी को पृथ्वी पर चुनी हुई जगहों पर मोड़ते हैं। उसकी वेबसाइट एक रोशनी-सेवा और एक ऊर्जा-सेवा गिनाती है, और ऐसी योजना जो 2026 में दो उपग्रहों से 2028 में 1,000 से ज़्यादा और 2035 में 50,000 से ज़्यादा तक जाती है। एवरटिक का विवरण संभावित ग्राहकों में दूरदराज़ के खोज-और-बचाव अभियानों और सौर फ़ार्मों के नाम लेता है।
उसके पहले अंतरिक्ष यान एरेंडिल-1 को अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफ़सीसी) ने 9 जुलाई 2026 को लाइसेंस दिया। एफ़सीसी का आदेश एक उपग्रह के लिए है और उसे सूरज की रोशनी परावर्तित करने वाली प्रौद्योगिकी का परीक्षण-मंच कहता है। वह कार्य-कक्षा 625 किलोमीटर, घटा-बढ़ाकर 25 किलोमीटर, 88 डिग्री के झुकाव पर तय करता है, और लाइसेंस की अवधि उस तारीख से दो साल जब रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल प्रमाणित करे कि उपग्रह कक्षा में है। एस्ट्रोनॉमी पत्रिका और यूनिवर्स टुडे खुले हुए आईने का आकार 18 मीटर गुणा 18 मीटर बताते हैं।
एरेंडिल-1 स्काईरूट के रॉकेट पर उड़ेगा या नहीं, यह नहीं बताया गया है। विज्ञप्ति “भविष्य के अंतरिक्ष यानों” की बात करती है, और पेलोड कहता है कि घोषणा पेलोड का नाम नहीं देती।
अमेरिकी पक्ष की आपत्तियाँ
अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने लाइसेंस नामंज़ूर करने की याचिका दायर की, और वाया सैटेलाइट के अनुसार आवेदन पर 2,000 से ज़्यादा टिप्पणियाँ आईं। एफ़सीसी के स्पेस ब्यूरो ने 9 जुलाई के अपने आदेश में याचिका खारिज कर दी। आदेश कहता है कि एफ़सीसी की भूमिका रेडियो उपयोग को अधिकृत करना है, और उसने प्रकाश प्रदूषण तथा प्रकाशीय खगोल विज्ञान की चिंताओं को उस भूमिका से बाहर माना। उसने यह भी कहा कि भविष्य के किसी तारामंडल की समीक्षा उसके अपने गुण-दोष पर होगी।
एक्सटेरा जेएससी के अनुसार अक्टूबर में लाइसेंस को दो चुनौतियाँ अब भी लंबित थीं, जिनमें अर्थजस्टिस की दायर की हुई पुनर्विचार याचिका शामिल है। 14 अक्टूबर को रिपोर्ट हुए एक आदेश में स्पेस ब्यूरो ने रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल की ज़मानत-बॉन्ड, यानी वित्तीय गारंटी, जमा करने की समय-सीमा 10 अगस्त से बढ़ाकर 5 जनवरी 2027 कर दी। आदेश कहता है कि कंपनी मंज़ूरी के कई महीनों के भीतर प्रक्षेपण की योजना बना रही है।
रिफ़्लेक्ट ऑर्बिटल की साइट कहती है कि वह खगोल विज्ञान और संवेदनशील पर्यावरणों के लिए अपवर्जन क्षेत्र रखती है। इसमें से कुछ भी सीधे स्काईरूट के रॉकेट या इसरो के प्रक्षेपण स्थल से जुड़ा नहीं है, पर यह वह संदर्भ है जिसमें ग्राहक काम कर रहा है।
29 अक्टूबर 2026 तक क्या खुला है
अनुबंध की कीमत, दोनों प्रक्षेपणों की तारीखें, हर एक का प्रक्षेपण स्थल और पहले अंतरिक्ष यान की पहचान सार्वजनिक नहीं हैं। दूसरे विक्रम-1 की कोई प्रक्षेपण तारीख घोषित नहीं है। विक्रम-1यू की स्काईरूट की ओर से कोई उड़ान तारीख नहीं है, और चल रही एकमात्र तारीखें 2027 की पहली तिमाही की प्रेस रिपोर्टों से आती हैं।
एफ़सीसी का आदेश अनिवार्य करता है कि एरेंडिल-1 को 9 जुलाई 2032 तक प्रक्षेपित और संचालित किया जाए।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- Via Satellite: Skyroot to Provide 2 Launches for Reflect Orbital (14 October 2026)
- Payload: Reflect Orbital buys two Skyroot Aerospace launches (14 October 2026)
- Evertiq: Reflect Orbital purchases two Skyroot Aerospace launches (19 October 2026, from the companies' release)
- idrw.org: Reflect Orbital purchases two Skyroot launches (reposted release)
- New Space Economy: Why did Reflect Orbital book two Skyroot launches (15 October 2026)
- Skyroot Aerospace: Vikram-1 launch vehicle and newsroom
- Reflect Orbital: company website
- Federal Communications Commission: Order and Authorization DA 26-706, Reflect Orbital Inc., Earendil-1 (9 July 2026)
- Exterra JSC: FCC extends surety bond deadline for solar reflector satellite to Jan. 5 (14 October 2026)
- Astronomy magazine: FCC approves Reflect Orbital filing for mirror in space
- Universe Today: FCC approves first launch for space reflector constellation
- ISRO: First private orbital launch lifts off from Sriharikota
- ISRO: 3rd National Space Day 2026
- Business Today: Skyroot gears up for next Vikram-1 launch, moves stage 1 to Sriharikota (24 August 2026)
- Inc42: Vikram-1 test launch, Skyroot enters its commercial launch era (23 July 2026)
- Inc42: Skyroot creates history with India's first private orbital rocket launch
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