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एम्स दिल्ली को 2 जून 1956 को हस्ताक्षरित संसद के एक अधिनियम ने बनाया, न्यूज़ीलैंड के कोलंबो योजना अनुदान से खड़ा किया गया, और 2025 में एनआईआरएफ ने उसे भारत की मेडिकल श्रेणी में पहले स्थान पर रखा
आधुनिक भारत

एम्स दिल्ली को 2 जून 1956 को हस्ताक्षरित संसद के एक अधिनियम ने बनाया, न्यूज़ीलैंड के कोलंबो योजना अनुदान से खड़ा किया गया, और 2025 में एनआईआरएफ ने उसे भारत की मेडिकल श्रेणी में पहले स्थान पर रखा

चित्रण: tuput

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना भारत के अपने विशेषज्ञ तैयार करने और हर दूसरे मेडिकल कॉलेज के लिए मानक तय करने के लिए हुई थी। शुरुआत का खर्च न्यूज़ीलैंड के अनुदान ने उठाया, स्वास्थ्य मंत्री ने विधेयक को दोनों सदनों से निकाला, और संस्थान की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट एक साल में 41.40 लाख बाह्य रोगी दर्ज करती है।

· · 8 मिनट का पठन

नई दिल्ली का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान इसलिए है कि संसद ने 1956 में उसके लिए कानून बनाया: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान अधिनियम, संख्या 25 सन् 1956, दिनांक 2 जून 1956। अधिनियम ने संस्थान को “राष्ट्रीय महत्व की संस्था” घोषित किया, उसे अपनी डिग्रियाँ देने का अधिकार दिया, और उसके सामने तीन उद्देश्य रखे: भारत के हर दूसरे मेडिकल कॉलेज को दिखाना कि ऊँचा मानक कैसा होता है, स्वास्थ्य कर्मियों का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण एक जगह जुटाना, और भारत को स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में आत्मनिर्भर बनाना। उसकी अपनी 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट उस वर्ष 41.40 लाख (4.14 मिलियन) बाह्य रोगी मुलाक़ातें दर्ज करती है, और सितंबर 2025 में शिक्षा मंत्रालय की एनआईआरएफ रैंकिंग ने उसे मेडिकल श्रेणी में पहले स्थान पर रखा।

अधिनियम में असल में क्या लिखा है

अधिनियम छोटा है। एम्स की वेबसाइट पर उपलब्ध उसके पाठ के अनुसार संस्थान एक निगमित निकाय है जिसका उत्तराधिकार स्थायी है, जो “नई दिल्ली में स्थित होगा”, और जो आधुनिक चिकित्सा तथा उससे जुड़े विज्ञानों में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ा सकता है। वह शोध चला सकता है, परीक्षाएँ ले सकता है और किसी दूसरे विश्वविद्यालय से गुज़रे बिना “उपाधियाँ, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक सम्मान” दे सकता है।

एक धारा पहले प्रमुख की बात करती है: पहले निदेशक की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी और उसके बाद के हर निदेशक की संस्थान स्वयं। एक और धारा कहती है कि अधिनियम के कुशल प्रशासन के लिए केंद्र सरकार जो निर्देश दे, संस्थान को उन्हें पूरा करना होगा। संस्थान के हीरक जयंती निबंध के अनुसार अमृत कौर का मत था कि संस्थान 15 नवंबर 1956 से स्वायत्त हो गया।

विचार भोर समिति से आया

सर जोसेफ भोर की अध्यक्षता वाली स्वास्थ्य सर्वेक्षण और विकास समिति ने 1946 में अपनी रिपोर्ट दी और देश के बढ़ते स्वास्थ्य कार्य के लिए उच्च योग्यता वाले लोग तैयार करने वाला एक राष्ट्रीय चिकित्सा केंद्र बनाने की सिफ़ारिश की। एम्स का इतिहास पृष्ठ कहता है कि जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि ऐसा केंद्र दक्षिण-पूर्व एशिया में चिकित्सा शिक्षा और शोध की रफ़्तार तय करे, और उनकी स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने इस योजना का पूरा साथ दिया। भारत के संविधान परियोजना में उनके परिचय के अनुसार वे 1947 में नेहरू के पहले मंत्रिमंडल में स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री और उसकी पहली महिला सदस्य के रूप में शामिल हुईं, और 1950 में विश्व स्वास्थ्य सभा की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला और पहली एशियाई बनीं।

अमृत कौर ने 3 मई 1956 को राज्यसभा में कहा कि इस तरह के अखिल भारतीय संस्थान का विचार सबसे पहले भोर समिति ने रखा था, उन्होंने उसे तुरंत स्वीकार किया और पद पर अपने पहले साल से उसकी पैरवी की, और पैसा तब तक नहीं आया जब तक कोलंबो योजना नहीं आई। कोलंबो योजना राष्ट्रमंडल और एशियाई देशों के बीच विकास सहायता की एक व्यवस्था थी। इसके तहत शुरुआत का खर्च न्यूज़ीलैंड ने उठाया।

1952 की आधारशिला और न्यूज़ीलैंड का उपहार

एम्स का कहना है कि न्यूज़ीलैंड के अनुदान ने ही 1952 में आधारशिला रखना संभव किया। दिल्ली सरकार के मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज का एक इतिहास पृष्ठ तारीख़ 4 अप्रैल 1952 बताता है और कहता है कि पत्थर इरविन अस्पताल के परिसर में न्यूज़ीलैंड के एक मंत्री ने रखा। तारीख़ और जगह के लिए मुझे यही एकमात्र स्रोत मिला, और पृष्ठ में मंत्री के नाम की जो वर्तनी है वह भरोसेमंद नहीं लगती, इसलिए मैं नाम छोड़ देता हूँ। संस्थान बाद में अपने मौजूदा पते, अंसारी नगर, पर खड़ा हुआ।

अनुदान कितना था, यह इस पर निर्भर है कि गिनती कौन कर रहा है। एम्स की 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट और अमृत कौर पर संस्थान का हीरक जयंती निबंध, दोनों 10 लाख पाउंड बताते हैं। 3 मई 1956 को राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं न्यूज़ीलैंड सरकार की ओर से “सवा दस लाख पाउंड” का ज़िक्र किया। संसदीय रिकॉर्ड में बहस के जवाब में उनका यह कहना भी दर्ज है कि अनुदान के साथ कोई शर्त नहीं थी। स्रोत अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों आँकड़े यहाँ दिए गए हैं।

राज्यसभा में चार दिन

विधेयक 21 सितंबर 1955 को लोकसभा में पेश हुआ। लोकसभा की कार्य सलाहकार समिति ने उसके लिए 60 मिनट तय किए थे; सदन ने 18 से 21 फ़रवरी 1956 तक उस पर बहस की और उसे एक संशोधन के साथ पारित किया, जिसने संस्थान को अपनी वार्षिक रिपोर्ट दोनों सदनों के सामने रखने का पाबंद किया। फिर राज्यसभा ने उसे 3 से 9 मई 1956 तक लिया। संस्थान के हीरक जयंती विवरण के अनुसार दोनों बहसों के संसदीय रिकॉर्ड 800 से ज़्यादा पन्नों के हैं।

सभी दलों के सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया और उसके स्वरूप पर बहस की। राज्यसभा में सदस्यों ने ध्यान दिलाया कि उसकी 30 धाराओं में से 25 में “नियमों द्वारा निर्धारित” लिखा था, और कुछ ने पूछा कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी को क्यों शामिल नहीं किया गया। अमृत कौर ने जवाब दिया कि संस्थान आधुनिक चिकित्सा के लिए है, और आगे के लिए जामनगर में आयुर्वेद का और होम्योपैथी का एक अखिल भारतीय संस्थान बनाने का वादा किया। स्वायत्तता पर उन्होंने सदन से कहा: “अपनी सरकार पर भरोसा कीजिए, अपने वैज्ञानिकों पर भरोसा कीजिए।” 9 मई को राज्यसभा ने विधेयक पारित कर दिया। उसी जवाब में उन्होंने कहा: “मैं चाहती हूँ कि यह कुछ अद्भुत हो, जिस पर भारत गर्व कर सके, और मैं चाहती हूँ कि भारत इस पर गर्व करे।”

निजी प्रैक्टिस पर रोक, और पहले निदेशक

संसदीय बहस का विवरण एम्स को भारत और एशिया में अपनी तरह का पहला संस्थान बताता है, जिसकी दो ख़ास बातें थीं: किसी भी रूप में निजी प्रैक्टिस पर रोक, और उसकी भरपाई के लिए पर्याप्त ऊँचे वेतन। स्वास्थ्य मंत्री ने लोकसभा को बताया कि डॉक्टर अपना पूरा समय पढ़ाने, मरीज़ों और शोध को देंगे। उन्होंने राज्यसभा को यह भी बताया कि पहले निदेशक डॉ. बी. बी. दीक्षित होंगे, जिन्होंने हाफ़किन संस्थान में काम किया था और बंबई के सर्जन-जनरल रह चुके थे। संस्थान का उन पर पृष्ठ कहता है कि उन्हें 1956 में पहला निदेशक बनने का न्योता दिया गया और उन्होंने विदेश में काम कर रहे भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिकों को एम्स में वापस खींचा।

संसदीय बहस का विवरण उनका नाम Dixit लिखता है; संस्थान का अपना जीवन-परिचय पृष्ठ Dikshit लिखता है, और यह लेख बाद वाली वर्तनी (दीक्षित) अपनाता है।

शुरुआती साल: छोटा बजट, उधार के बिस्तर और विदेशी मदद

अमृत कौर पर संस्थान का हीरक जयंती निबंध, जो उसकी पहली अध्यक्ष बनीं और 1964 में अपनी मृत्यु तक शासी निकाय की अध्यक्षता करती रहीं, शुरुआती बजट की एक तस्वीर देता है। शासी निकाय की पहली बैठक 2 सितंबर 1957 को हुई थी। 1957-58 का बजट 40 लाख रुपये था, और दूसरी पंचवर्षीय योजना में एम्स के लिए पूरा आवंटन 11.11 करोड़ रुपये था। रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन ने किताबों, प्रकाशनों और उपकरणों के लिए 2,00,000 अमेरिकी डॉलर दिए और इमारत के वातानुकूलन को प्रायोजित किया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने सफ़दरजंग अस्पताल में चिकित्सा और शल्य चिकित्सा पढ़ाने के लिए 60 बिस्तर देने की पेशकश की, जबकि संस्थान का अपना अस्पताल न्यूज़ीलैंड के अनुदान से बन रहा था। 1959 तक एम्स के पास अपने 350 बिस्तर थे और सफ़दरजंग में 84 शिक्षण बिस्तर।

दाख़िला शुरू से खुली प्रतियोगिता से होता था। प्रवेश परीक्षा 1956, 1957 और 1958 में पाँच शहरों (बंबई, कलकत्ता, मद्रास, नागपुर और दिल्ली) में हुई, और निबंध के अनुसार एमबीबीएस की 50 सीटों के लिए 400 उम्मीदवार बैठे। शासी निकाय ने 1957 के अंत में यह भी तय किया कि संस्थान शल्य और क्लिनिकल विशेषज्ञताओं में एम.सी.एच. और डीएम की डिग्रियाँ देगा।

महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने 27 जनवरी 1961 को संस्थान की इमारतों का औपचारिक उद्घाटन किया, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में; 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट और द प्रिंट दोनों यह तारीख़ दर्ज करते हैं। उसी साल मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल ने अपनी 150वीं वर्षगाँठ पर एम्स को अमेरिका, कनाडा और यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में गिना और अमृत कौर को एक पदक भेंट किया, संस्थान के निबंध के अनुसार। उनकी आख़िरी शासी निकाय बैठक 14 अगस्त 1963 को हुई, जब निकाय ने शिमला में उनका घर “मैनरविल” एम्स के डॉक्टरों और नर्सों के लिए विश्राम गृह के रूप में उनके उपहार की तरह स्वीकार किया।

आँकड़े क्या दिखाते हैं

2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट वह सबसे ब्योरेवार आँकड़ा-समूह है जो मैं खोल पाया। एमबीबीएस की 72 सीटों के लिए 2,45,865 आवेदन आए और 29 मई 2016 की प्रवेश परीक्षा में 1,89,357 उम्मीदवार बैठे। अस्पताल और उसके केंद्रों में 2,362 बिस्तर थे और उस वर्ष लगभग 41.40 लाख बाह्य रोगी, 2.34 लाख भर्ती रोगी और 1.7 लाख से ऊपर शल्य प्रक्रियाएँ दर्ज हुईं। रिपोर्ट की सार तालिका पत्रिकाओं और सार-संक्षेपों में 2,485 प्रकाशन गिनाती है। वह यह भी कहती है कि संस्थान अगले सत्र से स्नातक प्रवेश 72 से बढ़ाकर 100 करेगा।

बाद के स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर tuput के अपने लेख हैं: भारत ने पोलियो कैसे मिटाया और आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई स्वास्थ्य कवर। उसी दौर की एक और राष्ट्रीय संस्था पर हिजली शिविर से मौजूदा नेटवर्क तक आईआईटी में लिखा है।

विभागों और प्रकाशनों की गिनती अलग-अलग पृष्ठों पर अलग है। एम्स की वेबसाइट कहती है कि शिक्षण और शोध 42 विषयों और साल में 600 से ऊपर प्रकाशनों तक फैले हैं; वार्षिक रिपोर्ट की प्रस्तावना लगभग 100 विषय और 2,000 से ऊपर प्रकाशन बताती है, और उसकी निदेशक समीक्षा 7 केंद्र और 42 स्वतंत्र विभाग गिनती है।

हाल के आँकड़े संस्थान के 70वें संस्थान दिवस पर निदेशक के भाषण से आते हैं, जिसे द ट्रिब्यून ने 26 सितंबर 2025 को छापा: एक साल में 50 लाख से ऊपर बाह्य रोगी, 3.2 लाख से ज़्यादा भर्तियाँ और 3.1 लाख से ऊपर शल्य क्रियाएँ। द ट्रिब्यून यह नहीं बताता कि ये योग किस साल के हैं, इसलिए इन्हें वहाँ रिपोर्ट किए गए निदेशक के आँकड़े ही मानिए।

शिक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 को एनआईआरएफ इंडिया रैंकिंग 2025 जारी की, और ऑल इंडिया रेडियो ने एम्स दिल्ली को मेडिकल श्रेणी में शीर्ष पर बताया। मेडिकल डायलॉग्स उसे 91.80 का स्कोर देता है, जबकि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चंडीगढ़, 82.58 के साथ दूसरे स्थान पर है। उसने कितने वर्ष शीर्ष स्थान रखा है, यह अलग-अलग रिपोर्टों में अलग गिना गया है, इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. AIIMS New Delhi: About Us (history of the Institute; page last updated 20 March 2019)
  2. AIIMS New Delhi: Annual Report 2016-17
  3. AIIMS Diamond Jubilee Celebrations: AIIMS Act 1956, The Parliament Debate (V. Srinivas)
  4. AIIMS Diamond Jubilee Celebrations: Rajkumari Amrit Kaur, Founder of the All India Institute of Medical Sciences (V. Srinivas)
  5. The All India Institute of Medical Sciences Act, 1956 (No. 25 of 1956), text and rules, hosted by AIIMS
  6. Parliamentary proceedings on the All-India Institute of Medical Sciences Bill, Lok Sabha February 1956 and Rajya Sabha May 1956 (compiled by A. K. Bisoi, hosted by AIIMS)
  7. AIIMS New Delhi: Professor B. B. Dikshit, the first Director
  8. Maulana Azad Medical College, Delhi government: Earlier Days in MAMC
  9. Constitution of India project: Rajkumari Amrit Kaur, member profile
  10. ThePrint: Elizabeth II visited India thrice; got rousing reception at Ramlila Maidan in 1961, inaugurated AIIMS buildings
  11. All India Radio News: Union Education Minister releases NIRF India Rankings 2025 (4 September 2025)
  12. Medical Dialogues: NIRF 2025 rankings, AIIMS New Delhi stays No. 1
  13. The Tribune: 50 lakh outpatients, 3.1 lakh surgeries in a year, AIIMS Director on Institute Day (26 September 2025)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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