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खजुराहो के मंदिरों का प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 40 रुपये और विदेशियों के लिए 600 रुपये दर्ज है, और समय, शो और रास्ते वही हैं जो सरकारी पन्ने बताते हैं
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खजुराहो के मंदिरों का प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 40 रुपये और विदेशियों के लिए 600 रुपये दर्ज है, और समय, शो और रास्ते वही हैं जो सरकारी पन्ने बताते हैं

फ़ोटो: javieriborra / Pixabay

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण खजुराहो के मंदिरों का प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 40 रुपये और विदेशियों के लिए 600 रुपये दर्ज करता है, और साइट को सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला बताता है। मध्य प्रदेश पर्यटन शाम के ध्वनि और प्रकाश शो का टिकट भारतीय वयस्कों के लिए 300 रुपये और विदेशी वयस्कों के लिए 800 रुपये दर्ज करता है। 53वाँ खजुराहो नृत्य समारोह 20 से 26 फ़रवरी 2027 के लिए दर्ज है।

· · 7 मिनट का पठन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का खजुराहो के मंदिरों वाला पन्ना प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपये और विदेशियों के लिए 600 रुपये बताता है, दोनों नकद भुगतान के रूप में दर्ज हैं, और 15 साल से छोटे बच्चों का प्रवेश मुफ़्त है। उसी पन्ने के मुताबिक़ समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक है। हमने इसे 8 अक्टूबर 2026 को पढ़ा, साथ ही मध्य प्रदेश पर्यटन, इन्क्रेडिबल इंडिया और नीचे दिए गए ज़िला पन्ने भी, और जहाँ किसी सरकारी पन्ने ने आँकड़ा नहीं दिया, वहाँ हमने उसे छोड़ दिया।

टिकट और समय के बारे में एएसआई का पन्ना क्या कहता है

एएसआई का पन्ना, जिसका शीर्षक “खजुराहो के मंदिर समूह (1986)” है, भारतीय आगंतुकों के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपये और जिन्हें वह “Other Foreign Visitor” लिखता है उनके लिए प्रति व्यक्ति 600 रुपये दर्ज करता है। उस पर अद्यतन की कोई तारीख़ नहीं है, और नीचे की पट्टी पर 2025 लिखा है। वह शुल्क को समूहों के हिसाब से नहीं बाँटता, और यह भी नहीं बताता कि पूर्वी और दक्षिणी समूह के लिए अलग टिकट लगता है या नहीं। हमारे खोले किसी और सरकारी पन्ने ने भी यह नहीं बताया, इसलिए गेट पर पूछ लें कि आपका टिकट क्या-क्या कवर करता है।

ऑनलाइन टिकट के बारे में, ऑल इंडिया रेडियो ने 7 जनवरी 2026 को बताया कि 170 से ज़्यादा केंद्र संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों के एएसआई टिकट ओपन नेटवर्क फ़ॉर डिजिटल कॉमर्स पर चलने वाले ऐप के ज़रिए बुक हो सकते हैं, जिसमें भारतीय आगंतुकों को 5 रुपये और विदेशी नागरिकों को 50 रुपये की छूट है। चूँकि उस रिपोर्ट में स्मारकों के नाम नहीं हैं, हम पुष्टि नहीं कर सकते कि खजुराहो उनमें है। एएसआई के अपने बुकिंग पोर्टल पर हमें कोई शुल्क सूची नहीं दिखी।

तीन समूह, और घूमने का एक समझदार क्रम

इन्क्रेडिबल इंडिया मंदिरों को पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी समूहों में बाँटता है। उसका गंतव्य पन्ना पश्चिमी समूह में बारह मंदिर गिनता है, जिनमें कंदरिया महादेव, विश्वनाथ, लक्ष्मण, देवी जगदंबी और चित्रगुप्त शामिल हैं। उसका दूसरा पन्ना कहता है कि ग्रेनाइट का बना चौसठ योगिनी मंदिर सबसे पहले बना था, “लगभग 9वीं सदी में”। गंतव्य पन्ने के अनुसार पश्चिमी समूह के भीतर पुरातत्व संग्रहालय है, जिसमें चंदेल काल की मूर्तियों की पाँच दीर्घाएँ हैं। इन्क्रेडिबल इंडिया के दोनों पन्नों में से किसी में उसके खुलने का समय नहीं दिया गया।

मतंगेश्वर परिसर का अकेला मंदिर है जहाँ अब भी पूजा होती है, सुबह और दोपहर की प्रार्थना के साथ, इन्क्रेडिबल इंडिया के दूसरे पन्ने के अनुसार।

खजुराहो गाँव के पास पूर्वी समूह है, और इन्क्रेडिबल इंडिया के दोनों पन्ने उसके बारे में अलग-अलग बात कहते हैं: एक में तीन हिंदू और चार जैन मंदिर गिने गए हैं, दूसरा चार जैन मंदिर (पार्श्वनाथ, आदिनाथ, शांतिनाथ और घंटाई) और उनके साथ ब्रह्मा और वामन मंदिर गिनाता है। जवारी पहली सूची में है। गाँव से क़रीब पाँच किलोमीटर दक्षिण में दक्षिणी समूह है, जिसमें शिव को समर्पित दुलादेव मंदिर और चतुर्भुज मंदिर हैं। इन्क्रेडिबल इंडिया के मुताबिक़ वहाँ चतुर्भुज अकेला मंदिर है जिसमें कामुक नक़्क़ाशी नहीं है।

दूसरे पन्ने पर सुझाया गया एक रास्ता यह है: सुबह-सुबह पश्चिमी समूह, फिर पूर्वी समूह, और सूर्यास्त के समय तक चतुर्भुज पर पहुँचना। किसी भी पन्ने पर हर मंदिर के अलग समय नहीं दिए गए हैं। हमारा हम्पी गाइड भी इसी तरह तारीख़ दर्ज करके पढ़ने के तरीक़े पर चलता है, और ओडिशा का कोणार्क तथा अजंता और एलोरा की चट्टान में तराशी गुफाएँ अलग मंदिर परंपराएँ हैं, जिन पर अलग से लिखा गया है।

किसने बनवाया, और कब

एएसआई का पन्ना कहता है कि खजुराहो चंदेल शासकों का है। वह लक्ष्मण मंदिर का श्रेय यशोवर्मन को देता है, जिसकी तिथि ईस्वी 954 है, और सबसे बड़े मंदिर कंदरिया महादेव को राजा गंड के नाम करता है, ईस्वी 1017 से 1029। इन्क्रेडिबल इंडिया निर्माण का ज़्यादातर हिस्सा 950 और 1050 के बीच रखता है और खजुराहो को 9वीं से 12वीं सदी तक चंदेलों की राजधानी बताता है। उसके गंतव्य पन्ने के अनुसार कंदरिया महादेव के शिखर 31 मीटर से ऊँचे हैं और उसमें 870 से ज़्यादा मूर्तियाँ हैं। वही पन्ना चौसठ योगिनी को सबसे पुराना बचा हुआ मंदिर भी कहता है, और एएसआई नोट करता है कि चौसठ योगिनी, ब्रह्मा और जिसे वह महादेव मंदिर कहता है, वे ग्रेनाइट के हैं, जबकि बाक़ी बलुआ पत्थर के।

इन्क्रेडिबल इंडिया के मुताबिक़ एक ब्रिटिश अफ़सर टी.एस. बर्ट ने 1830 में इस जगह को फिर खोज निकाला।

मंदिरों की गिनती हर पन्ने पर अलग है। एएसआई के अनुसार स्थानीय परंपरा 85 मंदिर गिनाती है, जिनमें से 25 खड़े हैं। इन्क्रेडिबल इंडिया का गंतव्य पन्ना कहता है कि छह वर्ग किलोमीटर में क़रीब 20 बचे हैं, जबकि उसका दूसरा पन्ना क़रीब 25 कहता है और फिर देवता के हिसाब से जो ब्योरा देता है उसका जोड़ 20 बैठता है। गूगल आर्ट्स एंड कल्चर की कहानी, जिसे इन्क्रेडिबल इंडिया ने एएसआई के साथ छापा है, वह भी क़रीब 20 कहती है। किसी भी एक गिनती को अनुमानित ही मानें।

कामुक नक़्क़ाशी कई विषयों में से एक है। उसी कहानी में रोज़मर्रा का जीवन, मानवीय भावनाएँ, अप्सराएँ, हाथियों की लड़ाई और शिकार के दृश्य भी गिनाए गए हैं, और कामुक मूर्तिकला को पार्वती मंदिर की बाहरी दीवार पर बताया गया है। मंदिर शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य देव और जैन तीर्थंकरों (जैन जिन 24 गुरुओं को मानते हैं) को समर्पित हैं।

शाम का ध्वनि और प्रकाश शो

मध्य प्रदेश पर्यटन पश्चिमी समूह के मंदिर परिसर में खजुराहो का एक शो दर्ज करता है, अंग्रेज़ी और हिंदी में। उसके पन्ने पर 13 जुलाई 2026 की तारीख़ है, अद्यतन का कोई लेबल नहीं। समय मौसम के साथ बदलता है:

  • अक्टूबर से फ़रवरी: अंग्रेज़ी शाम 6.30 से 7.05 बजे, हिंदी शाम 7.25 से रात 8 बजे।
  • मार्च से सितंबर: अंग्रेज़ी शाम 7.30 से 8.05 बजे, हिंदी शाम 8.25 से रात 9 बजे।

टिकट भारतीय वयस्क के लिए 300 रुपये, भारतीय बच्चे के लिए 150 रुपये, विदेशी वयस्क के लिए 800 रुपये और विदेशी बच्चे के लिए 400 रुपये है। इन्क्रेडिबल इंडिया के अनुसार यह हर शाम चलता है। हमें ऐसा कोई सरकारी पन्ना नहीं मिला जो संचालक का नाम बताए, टिकट कहाँ बिकते हैं यह समझाए या बारिश में क्या होता है यह कहे, इसलिए इन बातों पर हम कुछ नहीं कहते।

खजुराहो नृत्य समारोह

मध्य प्रदेश पर्यटन 53वें खजुराहो नृत्य समारोह को 20 से 26 फ़रवरी 2027 के लिए खजुराहो मंदिर समूह में दर्ज करता है, प्रवेश मुफ़्त। पन्ने के मुताबिक़ यह समारोह पाँच दशकों से ज़्यादा समय से चल रहा है और भारतीय शास्त्रीय नृत्य का उत्सव मनाता है। इन्क्रेडिबल इंडिया भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी का नाम लेता है। हमारे खोले किसी सरकारी पन्ने में रोज़ का समय या कार्यक्रम सूची नहीं है, और पर्यटन पन्ने पर अब भी 2026 की कुछ भाषा बनी हुई है, इसलिए समय नज़दीक आने पर तारीख़ें दोबारा जाँच लें।

कब जाएँ

इन्क्रेडिबल इंडिया का गंतव्य पन्ना कहता है कि घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है, जबकि उसका दूसरा पन्ना अक्टूबर से फ़रवरी कहता है। गंतव्य पन्ने के मासिक तापमान दायरे डिग्री सेल्सियस में इस तरह हैं: जनवरी में 3.7 से 30.2, दिसंबर में 4.9 से 30.8, मई में 21.8 से 46.6 और जून में 23.9 से 46.1। फ़रवरी का समारोह दोनों पन्नों की खिड़की के भीतर पड़ता है।

कैसे पहुँचें

हवाई रास्ते से, मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार खजुराहो सिविल एयरोड्रोम (कोड HJR) शहर के केंद्र से क़रीब 2 किमी दूर है और दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, वाराणसी और इंदौर से जुड़ा है। वह समय-सारणी नहीं देता, और हमारे खोले किसी और सरकारी पन्ने ने भी नहीं दी।

रेल से, पर्यटन पन्ना खजुराहो रेलवे स्टेशन (KURJ) को शहर के केंद्र से क़रीब 5 किमी दूर बताता है, जहाँ से दिल्ली और वाराणसी के लिए, और सतना के रास्ते मुंबई और कोलकाता के लिए गाड़ियाँ मिलती हैं। भारतीय रेल की समय-सारणी वाले पन्ने हमारे लिए खुले नहीं, इसलिए हम ट्रेन नंबर नहीं देते। छतरपुर ज़िले की साइट, जिसका पन्ना जुलाई 2019 में आख़िरी बार अद्यतन हुआ, खजुराहो को झाँसी से, जो रानी लक्ष्मीबाई का शहर है, क़रीब 175 किमी दक्षिण-पूर्व में और छतरपुर शहर से क़रीब 45 से 50 किमी पर बताती है (ज़िले के अपने पन्नों में दोनों आँकड़े हैं)।

सड़क से, मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार खजुराहो झाँसी, ओरछा, बांधवगढ़ और छतरपुर से जुड़ा है, और इनमें से किसी से भी टैक्सी किराये पर ली जा सकती है।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Archaeological Survey of India: Group of Temples, Khajuraho (1986), Madhya Pradesh
  2. Incredible India (Ministry of Tourism): Khajuraho
  3. Incredible India (Ministry of Tourism): Khajuraho temple, all you need to know
  4. Google Arts & Culture, published by Incredible India with the Archaeological Survey of India: Khajuraho, human emotions, eloquent and unabashed
  5. Madhya Pradesh Tourism: Sound and Light Shows in Madhya Pradesh
  6. Madhya Pradesh Tourism: Khajuraho Dance Festival
  7. Chhatarpur District, Government of Madhya Pradesh: Khajuraho (page last updated 12 July 2019)
  8. Chhatarpur District, Government of Madhya Pradesh: How to reach (page last updated 10 July 2019)
  9. All India Radio News (7 January 2026): Online ticket booking launched for over 170 archaeological monuments

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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