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30 जुलाई 2025 को छोड़े गए NASA-ISRO रडार उपग्रह NISAR ने अब धँसते मेक्सिको सिटी, वेनेज़ुएला के भूकंप के बाद खिसकी ज़मीन और फटते कामचटका ज्वालामुखी का नक़्शा बना लिया है
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30 जुलाई 2025 को छोड़े गए NASA-ISRO रडार उपग्रह NISAR ने अब धँसते मेक्सिको सिटी, वेनेज़ुएला के भूकंप के बाद खिसकी ज़मीन और फटते कामचटका ज्वालामुखी का नक़्शा बना लिया है

चित्रण: tuput

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NISAR में दो रडार हैं, NASA का एल-बैंड और ISRO का एस-बैंड, जो 12 मीटर की जालीदार परावर्तक के नीचे लगे हैं। यह 12 दिन के चक्र में धरती की ज़मीन और बर्फ़ की 242 किमी चौड़ी पट्टी स्कैन करता है। दोनों रडारों का सार्वजनिक डेटा 20 जुलाई 2026 को खोल दिया गया।

· · 9 मिनट का पठन

30 जुलाई 2025 को भारत के GSLV Mk II रॉकेट ने श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण-स्थल से एक उपग्रह के भीतर तह करके रखी 12 मीटर की रडार डिश को आसमान में उठाया। इस उपग्रह का नाम NISAR है, यानी NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार, और यह पहला स्वतंत्र रूप से उड़ने वाला मिशन है जो अलग-अलग तरंग-लंबाई के दो रडार लेकर चलता है। 20 जुलाई 2026 से आम लोग दोनों का डेटा डाउनलोड कर सकते हैं।

NASA का मिशन-पेज इसका लक्ष्य “धरती की ज़मीन, बर्फ़, पानी और वनस्पति में बदलावों” को मापना बताता है। तरीक़ा है सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR): उपग्रह नीचे की ओर माइक्रोवेव की तरंगें भेजता है, चलते-चलते उनकी गूँज दर्ज करता है और उन्हें जोड़कर एक तसवीर बनाता है। रडार अपना संकेत ख़ुद भेजता है, इसलिए वह रात में और बादलों के आर पार भी काम करता है, मानसून के बादलों के आर पार भी।

किसने क्या बनाया

बँटवारा ISRO के मिशन-पेज पर लिखा है। NASA ने एल-बैंड रडार, 12 मीटर की परावर्तक, उसे उपग्रह से दूर थामने वाली 9 मीटर की बूम, एक सॉलिड-स्टेट डेटा रिकॉर्डर, एक GPS रिसीवर और तेज़ डाउनलिंक दिया। ISRO ने उपग्रह का ढाँचा (वह मुख्य हिस्सा जिसमें बिजली, कंप्यूटर और थ्रस्टर होते हैं), एस-बैंड रडार, डेटा संभालने की व्यवस्था, डाउनलिंक और प्रक्षेपण-प्रणाली दी।

प्रक्षेपण के समय की JPL की विज्ञप्ति केंद्रों के हिसाब से श्रेय गिनाती है: ISRO के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर ने ढाँचा बनाया, अहमदाबाद के उसके स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने एस-बैंड रडार बनाया, और उसके विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने प्रक्षेपण-यान दिया। कमान और संचालन ISRO सँभालता है। कक्षा बदलने की योजना और रडार के संचालन की योजना NASA देता है।

ISRO के मुताबिक़ पेलोड और मुख्य ढाँचे को तैयार होने में 8 से 10 साल लगे। रडार का ढाँचा JPL में जोड़ा और परखा गया, फिर ISRO को भेजा गया। कम बजट में एजेंसी के बड़े रिकॉर्ड के लिए देखें ISRO, किफ़ायती अंतरिक्ष शक्ति; 2025 की उसकी दूसरी बड़ी कक्षीय उपलब्धि थी SpaDeX की डॉकिंग।

12 मीटर की जालीदार डिश और 242 किमी की पट्टी

NASA के अनुसार परावर्तक को नॉर्थरोप ग्रुम्मन की कंपनी एस्ट्रो एयरोस्पेस ने सोने की परत चढ़े तार के जाल से बनाया। 12 मीटर के साथ यह उस एजेंसी का अंतरिक्ष में भेजा गया अब तक का सबसे बड़ा रडार-एंटीना परावर्तक है, और प्रक्षेपण के समय वह तह किया हुआ था।

ISRO के बयान के हवाले से प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ने 28 नवंबर 2025 को बताया कि बूम के जोड़ 9 अगस्त 2025 को खुलने शुरू हुए और पाँच दिन लगे। परावर्तक 15 अगस्त को खुला, और ISRO ने एंटीना के प्रदर्शन को संतोषजनक कहा।

डिश इसलिए है कि तसवीर का दायरा चौड़ा हो सके, क्योंकि आम तौर पर रडार में ब्योरे और दायरे के बीच सौदा करना पड़ता है। SweepSAR नाम की तकनीक इससे पार पाती है, जिसे JPL ने जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी DLR के साथ मिलकर विकसित किया। इसमें फ़ीड परावर्तक की ओर ऊर्जा की एक पतली पट्टी भेजता है, जिसे परावर्तक ज़मीन पर फैला देता है। लौटते समय फ़ीड अपनी किरण को परावर्तक पर घुमाता है और पूरी पट्टी की गूँज एक साथ पकड़ लेता है। NASA के SweepSAR पेज के मुताबिक़ ज़मीन पर यह पट्टी 242 किमी चौड़ी है।

NASA के अनुसार एल-बैंड का रिज़ॉल्यूशन उपग्रह की गति की दिशा में 7 मीटर है और उसके आर पार 2 से 8 मीटर, मोड के हिसाब से। कुल मिलाकर मिशन का अवलोकन 3 से 10 मीटर बताता है। चौड़ाई की क़ीमत चुकानी पड़ती है: रडार भेजते समय सुन नहीं सकता, जिससे खाली जगहें रह जाती हैं। पल्स की दर बदलने से ये खाली जगहें इधर-उधर खिसक जाती हैं और डेटा बाद में भर लिया जाता है।

दो तरंग-लंबाइयाँ, एक ही दृश्य

NASA के उपग्रह-पेज पर एल-बैंड की तरंग-लंबाई 24 सेमी और एस-बैंड की 9.4 सेमी है। लंबी तरंगें ज़्यादा गहराई तक जाती हैं। NASA कहता है कि एल-बैंड पेड़ों की छतरी के आर पार जा सकता है और मिट्टी की नमी तथा ज़मीन की हरकत को इंच के अंशों तक नाप सकता है। JPL के मुताबिक़ छोटी तरंग वाला एस-बैंड छोटी वनस्पति के प्रति ज़्यादा संवेदनशील है, जो कुछ फ़सलों और घास के मैदानों के लिए काम का है।

दोनों बैंड मिलकर एक ही दृश्य की अलग-अलग परतें देखते हैं। अर्थडेटा की विज्ञप्ति जोड़ती है कि कुछ हालात में एल-बैंड बर्फ़ के भीतर भी पहुँच जाता है।

कक्षा की ऊँचाई क़रीब 747 किमी है, सूर्य-समकालिक कक्षा में (ऐसी कक्षा जो हर अक्षांश को हर बार एक ही स्थानीय समय पर पार करती है), जिसका झुकाव 98.4 डिग्री है। ज़मीन पर इसका सटीक रास्ता हर 12 दिन में दोहराया जाता है। कवरेज दक्षिणी ध्रुव से कुछ डिग्री पहले से लेकर 77.5 डिग्री उत्तर तक है, और JPL के मुताबिक़ लगभग सारी ज़मीन और बर्फ़ हर 12 दिन के चक्र में दो बार देखी जाती है, उत्तर की ओर जाते और दक्षिण की ओर जाते फेरों में। मिशन रोज़ दर्जनों टेराबाइट डेटा बनाता है।

यह क्या मापने के लिए बना है

ISRO के मिशन-पेज पर उद्देश्य साफ़ गिनाए गए हैं। इनमें लकड़ीदार बायोमास और उसमें बदलाव, फ़सलों का क्षेत्र, आर्द्रभूमि का क्षेत्र, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ़ की चादरें, समुद्री बर्फ़ और पहाड़ी हिमनद शामिल हैं। भूकंप, ज्वालामुखी और भूस्खलन से ज़मीन का विरूपण भी है, और जलभृतों तथा तेल-गैस भंडारों के ऊपर ज़मीन का धँसना या उठना भी।

विरूपण का काम इंटरफ़ेरोमेट्री (InSAR) से होता है, जिसमें एक ही जगह के ऊपर से गुज़री दो रडार-पारियों की तुलना की जाती है। उपग्रह और ज़मीन के बीच की दूरी में बदलाव रडार के फ़ेज़ में खिसकाव के रूप में दिखता है। NASA नीचे के वेनेज़ुएला वाले नक़्शे को इसी तरह समझाता है।

प्रक्षेपण से पहली तसवीरों तक

प्रक्षेपण 30 जुलाई 2025 को भारतीय समय के अनुसार 17:40 बजे तय था। JPL के मुताबिक़ सितंबर 2025 के मध्य तक उपग्रह अपनी संचालन-कक्षा में पहुँच चुका था।

पहली तसवीरें प्रक्षेपण के कुछ हफ़्तों के भीतर आ गईं। ISRO की पहली एस-बैंड तसवीर 19 अगस्त 2025 की है और आंध्र प्रदेश के गोदावरी डेल्टा को दिखाती है। 25 सितंबर 2025 को JPL ने दो एल-बैंड तसवीरें जारी कीं: 21 अगस्त की मेन राज्य का माउंट डेज़र्ट द्वीप, और 23 अगस्त की नॉर्थ डकोटा की फ़ॉरेस्ट नदी के पास के खेत और आर्द्रभूमि।

28 नवंबर 2025 को ISRO ने घोषणा की कि मिशन विज्ञान-चरण में पहुँच गया है, और एस-बैंड की पहली झलकों का एक सेट जारी किया, जिसमें चिल्का झील, वेम्बनाड आर्द्रभूमि, कोसी बैराज और अंटार्कटिका का रेनिक हिमनद शामिल थे। 29 जनवरी 2026 को JPL ने 29 नवंबर 2025 की मिसिसिपी नदी के डेल्टा की एल-बैंड तसवीर प्रकाशित की, उस दिन की जब बादलों ने इस इलाक़े के ऊपर ऑप्टिकल उपग्रहों को रोक रखा था।

अब तक क्या मिला है

अंटार्कटिका में JPL के सिग्नल विश्लेषण इंजीनियर सोंगसु जियोंग ने अगस्त 2025 के परीक्षण-डेटा से पूर्वी अंटार्कटिका की एक पहाड़ी चोटी नुनाटाक ज़ाटेरजावशीजा की एल-बैंड तसवीर बनाई, जिसमें बहती बर्फ़ की दरारें तीखी हरी रेखाओं के रूप में दिखती हैं। उन्होंने कहा, “NISAR से हम वह देख रहे हैं जो सतह के नीचे छिपा है।” उसी जगह की 2 नवंबर 2025 की लैंडसैट 9 की ऑप्टिकल तसवीर लगभग पूरी सफ़ेद दिखती है।

JPL का मेक्सिको सिटी का नक़्शा 25 अक्टूबर 2025 से 17 जनवरी 2026 तक का है और दिखाता है कि शहर के कुछ हिस्से महीने में कुछ सेंटीमीटर तक धँस रहे हैं। ये माप प्रारंभिक हैं। NASA ध्यान दिलाता है कि 1990 और 2000 के दशकों में महानगर के कुछ हिस्से साल में क़रीब 35 सेमी धँसे थे।

वेनेज़ुएला में 24 जून 2026 को उत्तर में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया, और एक मिनट से भी कम बाद 7.5 तीव्रता का मुख्य झटका, NASA अर्थ ऑब्ज़र्वेटरी के अनुसार। 13 और 18 जून के फेरों से तुलना करने पर 25 और 30 जून की NISAR तसवीरों में दिखा कि एक भ्रंश-खंड के ठीक दक्षिण की ज़मीन पश्चिम की ओर 60 सेमी तक खिसक गई। NASA के मुताबिक़ USGS ने इस डेटा से भ्रंश के खिसकने के अपने मॉडल को सुधारा, और NISAR की अर्जेंट रिस्पांस प्रणाली का, जो 12 से 24 घंटे में डेटा दे सकती है, किसी बड़े भूकंप पर यह पहला इस्तेमाल था।

कामचटका में 30 जुलाई 2025 को, यानी NISAR के प्रक्षेपण वाले दिन, तट से दूर 8.8 तीव्रता का भूकंप आया। NASA के अनुसार कुछ दिन बाद क्रैशेनिनिकोव ज्वालामुखी लगभग पाँच सदियों में पहली बार फटने लगा। उपग्रह की उसकी पहली तसवीर 25 दिसंबर 2025 को आई, और 24 सितंबर 2026 को जारी 17 फ़्रेमों का टाइम-लैप्स अगस्त 2026 के मध्य तक चलता है, जिसमें लावा भीतरी काल्डेरा को भरता और पंखे की शक्ल में फैलता दिखता है। विज्ञान-दल के सदस्य, कॉर्नेल के भूभौतिकीविद् मैथ्यू प्रिचर्ड ने कहा कि दल ऐसे ज्वालामुखी देख रहा है “जिन पर हमारी नज़र पहले कभी इस तरह नहीं रही।“

डेटा कैसे पाएँ

नीति मुफ़्त और खुली है। एल-बैंड के उत्पाद फ़ेयरबैंक्स के अलास्का सैटेलाइट फ़ैसिलिटी डिस्ट्रिब्यूटेड एक्टिव आर्काइव सेंटर में रखे हैं और NASA अर्थडेटा के ज़रिए उपयोगकर्ताओं तक पहुँचते हैं। JPL के मुताबिक़ जनवरी 2026 में क़रीब 25 नमूना-उत्पाद आए और फ़रवरी में पहले से कैलिब्रेट किए गए हज़ारों एल-बैंड उत्पाद। कैलिब्रेट किया हुआ डेटा 20 जुलाई 2026 को आया, जिसमें 17 जून 2026 के बाद के अवलोकन हैं। पहले का विज्ञान-डेटा जोड़ा जा रहा है और पूरा रिकॉर्ड 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है, और अर्थडेटा का पेज इस सबको अनंतिम (प्रोविज़नल) बताता है।

एस-बैंड डेटा ISRO के भूनिधि पोर्टल से मिलता है, जहाँ पंजीकृत उपयोगकर्ता खोज और डाउनलोड कर सकते हैं। 24 जुलाई 2026 की तारीख़ वाला एक रिलीज़ पेज कहता है कि चक्र 25 के उत्पाद, जो 8 जुलाई 2026 को शुरू हुआ, संचालन-स्तर की उत्पादन प्रणाली से आते हैं और पहले के डेटा को चरणों में दोबारा प्रोसेस किया जाएगा। पेज ज्ञात सीमाएँ गिनाता है: समुद्र और रेगिस्तान जैसे कम-संकेत वाले इलाक़ों में बची हुई पट्टियाँ, और रेडियो-हस्तक्षेप के संभावित अवशेष। नमूना-तसवीरों में असम का ब्रह्मपुत्र, तमिलनाडु का नागपट्टिनम और इंडोनेशिया का माउंट रिंजानी हैं, सब जुलाई 2026 के।

जहाँ प्रकाशित आँकड़े अलग हैं

दोनों एजेंसियाँ एक जैसे आँकड़े नहीं देतीं। ISRO की प्रक्षेपण-पूर्व सूचना में 743 किमी की कक्षा का लक्ष्य था, जबकि उसका मिशन-पेज और NASA दोनों संचालन-कक्षा के लिए 747 किमी देते हैं। पट्टी की चौड़ाई NASA के SweepSAR पेज और ISRO की प्रक्षेपण-सूचना में 242 किमी है, और ISRO के दूसरे पन्नों पर “लगभग 240 किमी”।

मिशन की उम्र में फ़र्क़ ज़्यादा है। NASA का अवलोकन 3 साल का आधार-आँकड़ा देता है, ISRO का मिशन-पेज 5 साल कहता है, और NASA जोड़ता है कि विस्तारित संचालन की अगुवाई ISRO कर सकता है। हमारे खोले किसी भी NASA या ISRO पन्ने पर लागत का कोई आँकड़ा नहीं मिला।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. NASA Science: NISAR mission page
  2. NASA Science: NISAR mission overview and quick facts
  3. NASA Science: About the NISAR satellite
  4. NASA Science: SweepSAR
  5. ISRO: NISAR, NASA ISRO Synthetic Aperture Radar Mission
  6. ISRO: GSLV-F16 will launch ISRO-NASA joint satellite NISAR on July 30, 2025
  7. ISRO: NISAR S-Band SAR Data Products Release
  8. NRSC Bhoonidhi: NISAR, NASA ISRO SAR Mission
  9. NASA JPL: NASA-ISRO Satellite Sends First Radar Images of Earth's Surface (25 September 2025)
  10. NASA JPL: NASA-ISRO Radar Mission Peers Through Clouds to See Mississippi River Delta (29 January 2026)
  11. NASA JPL: US-Indian Space Mission Maps Extreme Subsidence in Mexico City (29 April 2026)
  12. NASA Earth Observatory: Where Venezuela's Earthquakes Shifted the Ground (10 July 2026)
  13. NASA JPL: US-India Satellite Delivers Data, Reveals Hummingbird in Antarctica (21 July 2026)
  14. NASA Earthdata: NISAR L-Band Data Released, Expanding Record of Surface Changes
  15. NASA JPL: US-India Satellite Captures Time-lapse Video of Volcanic Eruption (24 September 2026)
  16. PTI via The Week: NISAR satellite deploys 12-metre diameter antenna, enters science phase (28 November 2025)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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