चित्रण: tuput
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इसरो के स्पैडेक्स उपग्रह 16 जनवरी 2025 को जुड़े, 13 मार्च को अलग हुए, 20 अप्रैल को फिर जुड़े और 21 अप्रैल को उनके बीच बिजली का आदान-प्रदान हुआ। 23 मार्च 2026 को संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक़ अगले दो डॉकिंग प्रयोग अब भी अध्ययन के चरण में हैं।
इसरो ने 16 जनवरी 2025 की तड़के कक्षा में दो उपग्रहों को आपस में जोड़ा। प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के मुताबिक़ ऐसा करने वाला भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बना। एसडीएक्स01 और एसडीएक्स02 नाम के इन उपग्रहों में से हर एक का वज़न लगभग 220 किलो है, और इन्हें 30 दिसंबर 2024 को एक ही पीएसएलवी रॉकेट से साथ-साथ छोड़ा गया था।
इसरो ने 13 मार्च 2025 को इन्हें अलग किया, 20 अप्रैल को दूसरी बार जोड़ा और 21 अप्रैल को इनके बीच बिजली भेजी। 23 मार्च 2026 को राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक़ इसरो अगले दो डॉकिंग प्रयोगों का अभी सिर्फ़ अध्ययन कर रहा है।
प्रक्षेपण और दो टली हुई तारीख़ें
स्पेसफ़्लाइट नाउ के मुताबिक़ पीएसएलवी-सी60 ने 30 दिसंबर 2024 को रात 10 बजे (भारतीय समय) श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी। इसरो की मिशन पुस्तिका के अनुसार दोनों उपग्रह लगभग 15 मिनट बाद, क़रीब 477 किलोमीटर की ऊँचाई पर छोड़े गए। पीएसएलवी इसरो का भरोसेमंद रॉकेट है, और उसकी 2017 की 104 उपग्रहों वाली उड़ान की कहानी हमारे एक अलग लेख में है। पीआईबी की 28 दिसंबर की जानकारी के अनुसार रॉकेट का चौथा चरण शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप के 24 प्रयोग भी ले जाने वाला था।
31 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डॉकिंग 7 जनवरी 2025 को होने की उम्मीद है। तब यह नहीं हुआ। न्यूज़ ऑन एआईआर की ख़बर के अनुसार 6 जनवरी को इसरो ने इसे 9 जनवरी तक खिसका दिया, क्योंकि ज़मीनी सिमुलेशन में एक ऐसी स्थिति दिखी थी जिसमें प्रयोग रोकना पड़ सकता था, और उसकी और जाँच ज़रूरी थी।
9 जनवरी का प्रयास भी टल गया। दोनों उपग्रहों के बीच की दूरी 225 मीटर तक घटाने की कवायद के दौरान, जब वे ज़मीन से संपर्क में नहीं थे, वे उम्मीद से तेज़ी से एक-दूसरे से दूर खिसक गए। इसरो के मिशन पन्ने के अनुसार उपग्रह सुरक्षित थे।
12 जनवरी के अभ्यास में इसरो ने जोड़ी को 3 मीटर तक पास लाया और फिर सुरक्षित दूरी पर वापस ले गया, पीआईबी के रिकॉर्ड में यही दर्ज है। असली डॉकिंग 16 जनवरी की तड़के हुई।
आख़िरी 15 मीटर इसरो ने कैसे पार किए
दोनों यान पृथ्वी की परिक्रमा क़रीब 28,800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से करते हैं, इसलिए पीछा करने वाले यान को लक्ष्य के सापेक्ष अपनी रफ़्तार घटाकर 0.036 किलोमीटर प्रति घंटे पर लानी पड़ती है, पीआईबी ने 28 दिसंबर को यह समझाया था। यह 10 मिलीमीटर प्रति सेकंड है, जो इसरो के मिशन पन्ने पर दी गई पहुँच की रफ़्तार है।
एसडीएक्स01 पीछा करने वाला यान था और एसडीएक्स02 लक्ष्य। इसरो की पुस्तिका के अनुसार दोनों एंड्रोजिनस हैं: डॉकिंग तंत्र दोनों पर एक जैसा है, और कोई भी सक्रिय भूमिका निभा सकता था। योजना में पीछा करने वाले यान को चरणों में आगे बढ़ाया गया। दोनों पहले क़रीब 20 किलोमीटर की दूरी तक बहे, फिर 5 किलोमीटर, 1.5 किलोमीटर, 500 मीटर, 225 मीटर, 15 मीटर और 3 मीटर पर रुके। स्पेसफ़्लाइट नाउ के ब्योरे के अनुसार 5 किलोमीटर से उपग्रह रेडियो लिंक के ज़रिए एक-दूसरे को अपनी स्थिति और दिशा का डेटा भेजते रहे।
फ़ासला घटने के साथ कई सेंसर बारी-बारी से काम सँभालते गए। इसरो की सूची में 6,000 मीटर से 200 मीटर तक काम करने वाला लेज़र रेंज फ़ाइंडर, 2,000 मीटर से 10 मीटर तक रेंडेज़वू सेंसर, और 30 मीटर से 0.4 मीटर तक प्रॉक्सिमिटी और डॉकिंग सेंसर हैं। एक वीडियो कैमरे ने आख़िरी मीटरों को रिकॉर्ड किया, और एक मैकेनिज़्म एंट्री सेंसर ने पता लगाया कि पीछा करने वाला यान लक्ष्य के भीतर दाख़िल हो गया है। उपग्रह नेविगेशन (जीएनएसएस) संकेतों से चलने वाले एक प्रोसेसर ने हर यान की दूसरे के सापेक्ष स्थिति और रफ़्तार निकाली।
पीआईबी की 16 जनवरी की तथ्य-पत्रिका के अनुसार डॉकिंग की शुरुआत 3 मीटर के ठहराव बिंदु से हुई। मोटर से चलने वाले तंत्र ने लक्ष्य को पकड़ा, दोनों यानों को पास खींचने के लिए सिकुड़ा, और फिर रिजिडाइज़ हुआ, यानी इसरो के शब्द में दोनों को एक कठोर ढाँचे में बाँध दिया गया। इसरो के अनुसार इसके बाद जोड़ी को एक ही वस्तु की तरह चलाया जा सकता था।
इसरो का मिशन पन्ना अपने तंत्र की तुलना इंटरनेशनल डॉकिंग सिस्टम स्टैंडर्ड से करता है, जिसे दूसरी एजेंसियाँ मानव मिशनों के लिए इस्तेमाल करती हैं। इसरो का छल्ला 450 मिलीमीटर चौड़ा है और दो मोटरों से चलता है, जबकि मानक में 800 मिलीमीटर और 24 मोटरें हैं। पन्ना यह भी कहता है कि छोटे अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग में बड़े यानों के मुक़ाबले ज़्यादा बारीक सटीकता चाहिए। मंत्री इस स्वदेशी प्रणाली को भारतीय डॉकिंग सिस्टम कहते हैं।
अनडॉकिंग, दूसरी डॉकिंग और हीटर का परीक्षण
13 मार्च 2025 को लगभग 09:20 बजे इसरो ने 460 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में, जो 45 डिग्री झुकी हुई है, पहली ही कोशिश में उपग्रहों को अलग कर दिया। बेंगलुरु, लखनऊ और मॉरीशस के ग्राउंड स्टेशनों ने इस कार्रवाई पर नज़र रखी, और इसरो ने बताया कि दोनों उपग्रहों की सेहत सामान्य थी।
दूसरी डॉकिंग 20 अप्रैल 2025 को रात 8:20 बजे हुई। इसरो के अनुसार इस बार 15 मीटर से संपर्क तक की पहुँच पूरी तरह स्वायत्त थी। पहली डॉकिंग में 3 मीटर के ठहराव पर हाथ से कार्रवाई की गई थी।
21 अप्रैल को इसरो ने एसडीएक्स02 से एसडीएक्स01 को बिजली भेजी और फिर वापस भी, और एक उपग्रह का हीटर दूसरे की आपूर्ति से लगभग चार मिनट चलाया। इसरो ने कहा कि प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा।
अंतरिक्ष स्टेशन इससे क्या माँगता है
मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल बीएएस-1 को मंज़ूरी दी, एक संशोधित गगनयान कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, जिसमें आठ मिशन दिसंबर 2028 तक पूरे किए जाने हैं। अंतरिक्ष विभाग ने 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा को बताया कि स्टेशन में पाँच मॉड्यूल होंगे और उसे 2035 तक चालू करने की योजना है।
इसरो का स्पैडेक्स पन्ना कहता है कि जब किसी साझा उद्देश्य के लिए कई प्रक्षेपण चाहिए, तब अंतरिक्ष में डॉकिंग ज़रूरी हो जाती है। 23 मार्च 2026 का जवाब मानव उड़ान के लिए इससे आगे जाता है: चालक दल के स्थानांतरण और ईंधन, तरल पदार्थ और बिजली के आदान-प्रदान के लिए डॉकिंग तकनीक चाहिए। जवाब के अनुसार कक्षा में इसे साबित करना गगनयान के किसी मॉड्यूल को बीएएस जैसे स्टेशन से जोड़ने का रास्ता खोलता है। स्पैडेक्स ने इस सूची की एक चीज़ परखी, बिजली का आदान-प्रदान।
चंद्रयान-4 इससे क्या माँगता है
18 सितंबर 2024 को चंद्रयान-4 को दी गई मंत्रिमंडल की मंज़ूरी में डॉकिंग और अनडॉकिंग उन प्रौद्योगिकियों में गिनाई गई हैं जिन्हें चंद्रमा से नमूने वापस लाने वाले इस मिशन को दिखाना होगा। मंज़ूरी इस मिशन के लिए ₹2,104.06 करोड़ देती है, जिसमें दो एलवीएम3 प्रक्षेपण शामिल हैं, और मंज़ूरी के 36 महीनों के भीतर इसके पूरा होने की उम्मीद करती है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास भारत की सॉफ़्ट लैंडिंग हमारे चंद्रयान-3 वाले लेख में है।
इसरो का स्पैडेक्स पन्ना इस मिशन को उस स्वायत्त डॉकिंग का अग्रदूत बताता है जो चंद्रयान-4 जैसे चंद्र अभियानों को पृथ्वी से जीएनएसएस की मदद के बिना चाहिए होगी। इस लेख के लिए खोले गए स्रोत यह नहीं बताते कि इसरो ने वह हिस्सा अब तक दिखाया है या नहीं।
जो अब तक नहीं दिखाया गया
इसरो के मार्च 2025 के बयान के अनुसार स्पैडेक्स ने दो छोटे उपग्रहों से वृत्ताकार कक्षा में रेंडेज़वू, डॉकिंग और अनडॉकिंग दिखाई। 23 मार्च 2026 का जवाब दो और प्रयोगों का वर्णन करता है जिनका इसरो अध्ययन कर रहा है।
स्पैडेक्स-2 में दो यान एक अत्यंत दीर्घवृत्ताकार कक्षा में जुड़ेंगे, यानी ऐसे खिंचे हुए पथ पर जो वृत्ताकार नहीं है, ताकि चंद्रयान-4 की ज़रूरतें पूरी हों। इसमें दो मॉड्यूलों के बीच एक नमूना भी स्थानांतरित होगा। स्पैडेक्स-3 में भारतीय डॉकिंग सिस्टम से वृत्ताकार कक्षा में दो दबावयुक्त मॉड्यूल जुड़ेंगे, स्टेशन पर डॉकिंग के पूर्वगामी प्रयोग के रूप में।
जवाब में इनमें से किसी के लिए न प्रक्षेपण की तारीख़ है, न मंज़ूरी। सितंबर 2024 का मंत्रिमंडल नोट दिसंबर 2028 को वह तारीख़ बताता है जिसके भीतर आठों मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, जिनका अंत बीएएस-1 के प्रक्षेपण से होता है, पूरे किए जाने हैं।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- ISRO: SpaDeX Mission
- ISRO: SPADEX docking of SDX-01 and SDX-02 completed on 16 January 2025
- ISRO: SPADEX undocking successful
- ISRO: SPADEX Mission, successful demonstration of second docking and power transfer
- ISRO: PSLV-C60 SPADEX mission brochure
- Press Information Bureau: ISRO's year end mission to seek the rare feat of docking two satellites in space (28 December 2024)
- Press Information Bureau: ISRO's SPADEX mission, a giant leap in space docking technology (31 December 2024)
- Press Information Bureau: Space docking, ISRO achieved the unbelievable (16 January 2025)
- Press Information Bureau, Department of Space: SpaDeX Mission, Revolutionising Space Exploration (16 January 2025)
- Press Information Bureau: Parliament question on space docking technology (23 March 2026)
- Press Information Bureau: Dr. Jitendra Singh informs Rajya Sabha of key milestones in Gaganyaan (6 August 2026)
- Prime Minister of India: Cabinet approves Chandrayaan-4 (18 September 2024)
- Prime Minister of India: Cabinet approves the first module of the Bharatiya Antariksh Station (18 September 2024)
- News On AIR: ISRO postpones SpaDeX mission to January 9 (6 January 2025)
- News On AIR: ISRO postpones SpaDeX satellite docking experiment (9 January 2025)
- Spaceflight Now: India launches its first on-orbit docking demonstration (3 January 2025)
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