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भारत ने 15 अक्टूबर 2026 को सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को अपनी रामसर सूची में जोड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की संख्या अप्रैल के 99 से बढ़कर 103 हो गई
पर्यावरण

भारत ने 15 अक्टूबर 2026 को सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को अपनी रामसर सूची में जोड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की संख्या अप्रैल के 99 से बढ़कर 103 हो गई

चित्रण: tuput

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने 15 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि (199.51 हेक्टेयर) और उत्तर प्रदेश की सौज झील (40.76 हेक्टेयर) रामसर सूची में शामिल हो गई हैं। विभाग की सालाना गणना में सौज झील पर लगभग 35,000 जलपक्षी दर्ज होते हैं, और मंत्री के अनुसार देश में यह संख्या 2014 में 26 थी और अब 103 है।

· · 6 मिनट का पठन

भारत की रामसर स्थलों की सूची, यानी 1971 की एक संधि के तहत मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमियों की सूची, 15 अक्टूबर 2026 को 103 तक पहुँच गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने उसी दिन घोषणा की कि चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील इसमें जोड़ी गई हैं। सरकार के प्रेस कार्यालय, प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (PIB), ने यह विज्ञप्ति रात 8:41 बजे जारी की।

सुखना चंडीगढ़ के किनारे 199.51 हेक्टेयर में फैली है, और सौज झील मैनपुरी ज़िले में 40.76 हेक्टेयर में। दोनों आँकड़े रामसर सूचना पत्रकों से लिए गए हैं, जिन्हें रामसर साइट्स इन्फ़ॉर्मेशन सर्विस ने 15 अक्टूबर को प्रकाशित किया। दोनों स्थल मिलकर सूची में 240.27 हेक्टेयर जोड़ते हैं।

176 दिनों में चार नए स्थल

22 अप्रैल 2026 को गिनती 99 थी, जब PIB की एक विज्ञप्ति में अलीगढ़ के शेखा झील पक्षी अभयारण्य को 99वें स्थल के रूप में घोषित किया गया। PIB के अनुसार, प्रधानमंत्री ने 5 जून को उत्तर प्रदेश के बलिया के जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) का, जो 100वाँ स्थल था, स्वागत किया।

ग्लॉ झील 3 अगस्त को 101वाँ स्थल बनी और अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर झील है। यह कमलांग टाइगर रिज़र्व और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर है, और मंत्री ने कहा कि इस स्थल और उसके जलग्रहण क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियाँ और ऑर्किड की 49 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। उसी विज्ञप्ति में उन्होंने राष्ट्रीय आँकड़े को “2014 में 26 रामसर स्थलों से आज 101” बताया। सुखना और सौज झील ने इसे 101 से 103 पर पहुँचा दिया।

सुखना, 1958 में बना एक जलाशय

रामसर सूचना पत्रक सुखना को शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में बनी एक मानव-निर्मित, वर्षा-पोषित मीठे पानी की आर्द्रभूमि बताता है। यह 1958 में अस्तित्व में आई, जब एक मौसमी धारा, सुखना रिवुलेट, पर 12.8 मीटर ऊँचा चट्टान-भराव वाला मिट्टी का बाँध बनाया गया। पत्रक इसे उस शहर के उत्तर-पूर्वी कोने में रखता है जिसका वर्णन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और चंडीगढ़ की योजना पर हमारे लेख में है, और इसकी ऊँचाई लगभग 304 से 365 मीटर के बीच है।

पत्रक के आँकड़ों के अनुसार, सर्दियों की जलपक्षी गणना में औसतन 29 जलपक्षी प्रजातियाँ दिखती हैं, और 16 प्रजातियाँ झील पर प्रजनन करती हैं। कॉमन पोचार्ड, जिस बतख को पत्रक संवेदनशील श्रेणी में रखता है, फरवरी 2026 में हुए ताज़ा सर्वेक्षण में औसतन लगभग 500 दर्ज हुए। पत्रक में छह संकटग्रस्त प्रजातियाँ गिनी गई हैं, जिनमें पैलस का मछली-गरुड़ और काला तालाबी कछुआ शामिल हैं, और तीन संवेदनशील प्रजातियाँ।

यह सूचीबद्धता सम्मेलन के नौ मानदंडों में से तीन पर टिकी है: 2 (दुर्लभ प्रजातियाँ), 3 (जैविक विविधता) और 4 (जीवन-चक्र के निर्णायक चरणों या प्रतिकूल परिस्थितियों में सहारा)। इसे तैयार करने वाला चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश का वन और वन्यजीव विभाग है।

चंडीगढ़ का आवेदन कैसे आगे बढ़ा

ट्रिब्यून के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुखना को 1988 में राष्ट्रीय आर्द्रभूमि घोषित किया था, और ThePrint के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने 2020 में इसे आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत आर्द्रभूमि घोषित किया। 19 सितंबर 2025 को केंद्र शासित प्रदेश के राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने, जिसके अध्यक्ष पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक हैं, अपनी चौथी बैठक में रामसर प्रस्ताव को मंज़ूरी दी।

ट्रिब्यून के मुताबिक, 16 फरवरी 2026 तक केंद्रीय मंत्रालय प्रस्ताव को मंज़ूरी दे चुका था और विदेश मंत्रालय उसका समर्थन कर चुका था, और अगले सप्ताह रामसर सचिवालय को औपचारिक आवेदन जाना था। अख़बार ने अधिकारियों को जिन लाभों की उम्मीद थी, उनमें अंतरराष्ट्रीय धन और तकनीकी सहायता गिनाई।

रामसर पत्रक सुखना की अभिहित होने की तारीख 16 मार्च 2026 और सौज झील की 18 जून 2026 बताता है। PIB की विज्ञप्ति में मंत्री की 15 अक्टूबर की घोषणा है, और वह यह नहीं बताती कि पहले की तारीखें किस बात की हैं।

सौज झील और उसके 35,000 जलपक्षी

पत्रक के अनुसार, सौज झील गंगा के बाढ़ मैदान में खेतों और बस्तियों से घिरी एक उथली झील है, जिसमें मुख्यतः खेतों का बहाव और बारिश का पानी आता है। यह समान पक्षी अभयारण्य के पास है, जो दिसंबर 2019 में सूचीबद्ध हुआ था, 526.3 हेक्टेयर में फैला है और जहाँ नियमित रूप से 50,000 से अधिक जलपक्षी रहते हैं। ThePrint ने दर्ज किया कि नई सूचीबद्धता से मैनपुरी ज़िले में दो रामसर स्थल हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश वन विभाग की गणना में सौज झील पर 2021 में 34,154, 2022 में 35,206 और 2023 में 35,349 जलपक्षी गिने गए, यानी औसतन 34,903। पत्रक में 43 जलपक्षी प्रजातियाँ, 19 मछली प्रजातियाँ और सात सरीसृप प्रजातियाँ दर्ज हैं। वह बड़े सफ़ेद हवासील, ग्रेलैग हंस, बार-हेडेड हंस और सुरखाब को सर्दियों के प्रमुख मेहमान बताता है, और सारस तथा ग्रेटर स्पॉटेड ईगल को वहाँ की पाँच वैश्विक रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों में गिनता है।

संकटग्रस्त प्रजातियों में से दो कछुए हैं: चित्तीदार तालाबी कछुआ और भारतीय मोर नरम-खोल कछुआ, दोनों संकटग्रस्त श्रेणी में। पत्रक यह भी कहता है कि बर्डलाइफ़ इंटरनेशनल ने इस झील को संकटग्रस्त प्रजातियों और 20,000 से अधिक जलपक्षियों के अपने मानदंडों पर महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र, स्थल IN-UP-20, के रूप में चिह्नित किया है। सूचीबद्धता मानदंड 2, 3, 4 और 5 का हवाला देती है, जिनमें आख़िरी का आशय 20,000 से अधिक जलपक्षियों की गिनती है।

प्रबंधन योजनाओं में क्या है

सुखना का पत्रक जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली गाद और आक्रामक पौधों के फैलाव को प्रबंधन की मुख्य चुनौतियाँ बताता है। उसके अनुसार मिट्टी और नमी संरक्षण के कामों ने गाद का भार काफ़ी घटाया है, और खरपतवार समय-समय पर हटाए जाते हैं। ThePrint ने बताया कि गाद और कटाव के कारण झील अपनी जल-धारण क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक पिछले दशकों में खो चुकी है, और चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग विभाग ने जून 2026 में इसकी गाद निकाली।

ट्रिब्यून ने सितंबर 2025 में बताया कि प्राधिकरण ने 22.5 करोड़ रुपये की पाँच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना को भी मंज़ूरी दी थी, जिसे वन विभाग ने WWF और अन्य विभागों के साथ मिलकर तैयार किया। इसमें जल-स्तर, जलीय जीवन, झील के आसपास की स्वच्छता, पर्यटक सुविधाएँ और अधिक सौर-ऊर्जा चालित नौकाएँ शामिल हैं, और यह जलीय पारितंत्रों के संरक्षण की राष्ट्रीय योजना के तहत धन के लिए केंद्रीय मंत्रालय को भेजी गई।

सौज झील पर पत्रक स्थानीय लोगों की चराई और मछली पकड़ने को मुख्य ख़तरा बताता है। मैनपुरी सामाजिक वानिकी प्रभाग की योजना है कि घोंसले बनाने के अहम इलाक़ों में प्रवेश, चराई और मछली पकड़ने पर रोक लगे, मवेशियों को दूर रखने के लिए झील के चारों ओर काँटेदार प्रजातियाँ लगाई जाएँ, और सुरक्षा श्रमिक नाम के मवेशी-रक्षक तैनात हों। मानसून और सर्दियों के मौसम में मछली पकड़ना प्रतिबंधित होगा और बारीक जाल वर्जित होंगे।

ThePrint की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट में पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू को उद्धृत किया गया कि सुखना की सूचीबद्धता को किस कसौटी पर परखा जाएगा: “क्या दस साल बाद सुखना का पानी, पक्षी और जलग्रहण क्षेत्र बेहतर ढंग से सुरक्षित हैं।”

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. PIB, Ministry of Environment, Forest and Climate Change: India's Ramsar Site tally reaches 103 with addition of Sukhna Wetland (Chandigarh) and Sauj Jheel (UP) (15 October 2026)
  2. PIB, Ministry of Environment, Forest and Climate Change: Glaw Lake becomes Arunachal Pradesh's First Ramsar Site; India's Ramsar Sites tally reaches 101 (3 August 2026)
  3. PIB, Prime Minister's Office: Prime Minister lauds designation of Jai Prakash Narayan Bird Sanctuary as India's 100th Ramsar site (5 June 2026)
  4. PIB, Ministry of Environment, Forest and Climate Change: Shekha Jheel Bird Sanctuary announced as India's 99th Ramsar site (22 April 2026)
  5. Ramsar Sites Information Service: Sukhna Wetland, Ramsar Information Sheet for site no. 2602 (published 15 October 2026)
  6. Ramsar Sites Information Service: Sauj Jheel, Ramsar Information Sheet for site no. 2603 (published 15 October 2026)
  7. Ramsar Sites Information Service: Saman Bird Sanctuary, site no. 2413
  8. PTI via ThePrint: Sukhna Wetland in Chandigarh designated Ramsar site (15 October 2026)
  9. ThePrint: Chandigarh's first Ramsar site, Sukhna Lake, a 68-year-old reservoir (16 October 2026)
  10. The Tribune: Sukhna wetland set to get global status (16 February 2026)
  11. The Tribune: UT approves proposal to declare Sukhna wetland as Ramsar site (20 September 2025)
  12. News On AIR (Prasar Bharati): With inclusion of Sukhna Lake and Sauj Jheel, India's Ramsar tally reaches 103 (15 October 2026)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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