चित्रण: tuput
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चंडीगढ़ के सेक्टर 1 में बना कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को की 17 स्थलों वाली ले कोर्बुज़िए सूची का भारतीय हिस्सा है, जिसे 17 जुलाई 2016 को इस्तांबुल में दर्ज किया गया। उसके आसपास का शहर विभाजन के बाद पूर्वी पंजाब की नई राजधानी के रूप में योजनाबद्ध किया गया, और चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार उसकी नींव का पत्थर 1952 में रखा गया।
17 जुलाई 2016 को इस्तांबुल में बैठी विश्व धरोहर समिति ने चंडीगढ़ के कैपिटल कॉम्प्लेक्स को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में दर्ज किया। यह सात देशों में फैली 17 स्थलों की संपत्ति “द आर्किटेक्चरल वर्क ऑफ़ ले कोर्बुज़िए, एन आउटस्टैंडिंग कॉन्ट्रिब्यूशन टू द मॉडर्न मूवमेंट” का भारतीय घटक है, और यूनेस्को के अपने शब्दों में यह परिसर भारत के आधुनिकता में प्रवेश का प्रतीक था। जिस शहर में यह बसा है, वह विभाजन के बाद शिवालिक की तलहटी की एक ख़ाली जगह पर खींचा गया, और चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार उसकी नींव का पत्थर 1952 में रखा गया।
विभाजन में खोई राजधानी और 1948 में चुनी गई जगह
1947 के विभाजन में लाहौर पाकिस्तान में चला गया और पूर्वी पंजाब बिना राजधानी के रह गया, जिस विभाजन का ब्योरा रैडक्लिफ़ रेखा वाले लेख में है। चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार नया शहर पूर्वी पंजाब की राजधानी के रूप में और पश्चिमी पंजाब से उजड़कर आए हज़ारों शरणार्थियों को बसाने के लिए सोचा गया था।
1948 में पंजाब सरकार ने अपने मुख्य अभियंता पी. एल. वर्मा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई, जिसे मौजूदा शहरों को परखना था। प्रशासन के अनुसार कोई भी शहर उपयुक्त नहीं निकला, और वह सैन्य असुरक्षा, पीने के पानी की कमी, ख़राब पहुँच और शरणार्थियों की बड़ी आमद को समेटने की कठिनाई गिनाता है। मार्च 1948 में पंजाब सरकार ने भारत सरकार से परामर्श करके इसके बजाय शिवालिक की तलहटी को मंज़ूरी दी। शहर का नाम जगह के पास बने चंडी मंदिर पर पड़ा।
प्रशासन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का वह मूल निर्देश उद्धृत करता है कि शहर “अतीत की परंपराओं से मुक्त, भारत की आज़ादी का प्रतीक” हो। फ़ाउंडेशन ले कोर्बुज़िए, जिसके पास, यूनेस्को के अनुसार, वास्तुकार के काम के नैतिक अधिकार हैं, यह भी जोड़ती है कि नई दिल्ली शुरुआती वित्त का एक तिहाई उठाने पर सहमत हुई।
अल्बर्ट मायर से ले कोर्बुज़िए की टीम तक
पहली योजना अमेरिकी थी। प्रशासन के अनुसार मायर, व्हिटलसी एंड ग्लास नाम की फ़र्म को 1950 में ज़िम्मा मिला, और अल्बर्ट मायर तथा मैथ्यू नोविकी ने आत्मनिर्भर सुपर ब्लॉकों पर टिकी पंखे के आकार की योजना बनाई। फ़ाउंडेशन मायर की नियुक्ति दिसंबर 1949 के अंत की बताती है। नोविकी की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई और मायर ने हटने का फ़ैसला किया।
फ़ाउंडेशन के अनुसार 30 दिसंबर 1950 को यूरोप में यात्रा कर रहे दो सदस्यों के एक आयोग, मुख्य प्रशासक पी. एन. थापर और मुख्य अभियंता पी. एल. वर्मा, ने ले कोर्बुज़िए की अगुवाई वाली नई टीम चुनी, जिसमें पिएर ज़ेनेरे (उनके चचेरे भाई), मैक्सवेल फ़्राई और जेन ड्रू थे। प्रशासन हस्तांतरण की तारीख़ 1951 बताता है। ज़ेनेरे, फ़्राई और ड्रू को तीन साल भारत में रहना था, जबकि ले कोर्बुज़िए को साल में दो बार एक-एक महीने के लिए आना था, और मास्टर प्लान तथा कैपिटल की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी।
उनके अधीन युवा भारतीय वास्तुकारों का एक समूह काम करता था, जिनमें एम. एन. शर्मा, ए. आर. प्रभावलकर और आदित्य प्रकाश शामिल थे, और तीनों के नाम प्रशासन ने दिए हैं। शर्मा आगे चलकर परियोजना के पहले भारतीय मुख्य वास्तुकार बने और उन्होंने ज़ेनेरे से कार्यभार लिया, जो 1965 में स्विट्ज़रलैंड लौट गए।
फ़ाउंडेशन के अनुसार नेहरू 1952 में आए, जब शहर की रूपरेखा दिखने लगी थी, और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 7 अक्तूबर 1953 को चंडीगढ़ का औपचारिक उद्घाटन किया। फ़ाउंडेशन के ब्योरे में उसी दिन पंजाब सरकार शिमला का अपना डेरा छोड़कर नए शहर के अस्थायी सचिवालय में आ गई।
सेक्टर, सात तरह की सड़कें और बीच से गुज़रता पार्क
मास्टर प्लान शहर को एक शरीर की तरह पढ़ता है। प्रशासन सेक्टर 1 के कैपिटल कॉम्प्लेक्स को सिर, सेक्टर 17 के सिटी सेंटर को हृदय, लेज़र वैली और सेक्टरों की हरियाली को फेफड़े, और शैक्षिक तथा सांस्कृतिक संस्थानों को बुद्धि बताता है। सड़कें रक्त-संचार तंत्र हैं, जो सात प्रकारों में बँटी हैं और जिन्हें ले कोर्बुज़िए 7V कहते थे।
बुनियादी इकाई सेक्टर है, जिसे प्रशासन पारंपरिक भारतीय मोहल्ले जैसा बताता है। एक सामान्य सेक्टर 800 गुणा 1,200 मीटर का होता है और 250 एकड़ में फैला होता है। उसे V-2 या V-3 श्रेणी की सड़कें घेरती हैं, जिन पर कोई इमारत नहीं खुलती, और यातायात चार नियंत्रित बिंदुओं से भीतर आता है। पहले चरण के लिए ली गई लगभग 20,000 एकड़ में से करीब 2,000 एकड़ पार्कों के लिए रखी गई।
फ़ाउंडेशन लेज़र वैली को एक सतत रैखिक पार्क बताती है, जो एक मौजूदा जलधारा से गढ़ा गया और शहर की पूरी लंबाई में बलखाता चलता है, उसमें पैदल रास्ते हैं और छोटे खुले रंगमंचों की एक कड़ी है जिन्हें ले कोर्बुज़िए ने उसके लिए डिज़ाइन किया। उन्होंने पेड़ों के आकार को सड़कों की श्रेणियों से मिलाती एक रोपण योजना भी बनाई। संरक्षित हरित पट्टी, परिधि (पेरिफ़ेरी), की शुरुआती त्रिज्या 8 किलोमीटर थी, जिसे 1962 में बढ़ाकर 16 किलोमीटर किया गया।
कैपिटल कॉम्प्लेक्स में क्या खड़ा है
कैपिटल कॉम्प्लेक्स शहर की योजना का सिर है, जिसके पीछे शिवालिक की पहाड़ियाँ हैं, और फ़ाउंडेशन उसे राजेंद्र पार्क और सुखना झील के बीच रखती है। उसका नक्शा 800 गुणा 800 मीटर और 400 गुणा 400 मीटर के एक-दूसरे में बैठे वर्गों पर टिका है, और फ़ाउंडेशन खुले प्रबलित कंक्रीट के व्यवस्थित उपयोग का उल्लेख करती है। जहाँ ज़रूरत थी, वहाँ वाहनों की सड़कें चौड़े कंक्रीट के चबूतरे से 5 मीटर तक नीचे धँसाई गईं, और खोदी गई मिट्टी से कृत्रिम टीले बनाए गए जो पहाड़ियों के दृश्य को चौखटे में बाँधते हैं।
उस पर तीन इमारतें हैं। हाई कोर्ट, जो फ़ाउंडेशन के अनुसार 1955 में तैयार हुआ, में नौ अदालतें और उनके लिए बनाए गए नौ बड़े टेपेस्ट्री हैं। सचिवालय 240 मीटर लंबा, 24 मीटर चौड़ा और 50 मीटर ऊँचा है, और मंज़िलों के बीच पैदल चलने के लिए उसमें दो ढलान हैं। विधानसभा में बिना खंभों वाला गोलाकार सभागार है, जिस पर हाइपरबोलॉइड का पतला आवरण है, और एक औपचारिक इनेमल का दरवाज़ा है।
चबूतरे के साथ-साथ स्मारक खड़े हैं। चंडीगढ़ प्रशासन धातु की विशाल मूर्ति खुले हाथ (ओपन हैंड) को शहर का आधिकारिक प्रतीक कहता है और बताता है कि वह देने के लिए खुले और लेने के लिए खुले रहने के सिद्धांत को व्यक्त करता है। फ़ाउंडेशन उसकी ऊँचाई 12.5 मीटर और चौड़ाई 8.86 मीटर बताती है, वह पीटे हुए लोहे की चादरों से बना है और इस तरह लगा है कि हवा में हल्के से घूमता है। छायाओं की मीनार 15.5 मीटर का एक वर्ग है, जिसकी चारों भुजाएँ धूप को अलग-अलग ढंग से सँभालती हैं। ज्यामितीय पहाड़ी (जिओमेट्रिक हिल) का ढलान वाला मुख 45 मीटर चौड़ा है, जिस पर 24 सोलर आवर्स नाम की कृति लगनी थी। फ़ाउंडेशन कुल छह स्मारक गिनती है, जबकि पर्यटन मंत्रालय का पोर्टल इनक्रेडिबल इंडिया चार नाम देता है: ओपन हैंड, जिओमेट्रिक हिल, छायाओं की मीनार और शहीद स्मारक।
2016 में यूनेस्को ने क्या लिखा
यूनेस्को ने इस शृंखला को तीन कसौटियों पर दर्ज किया। कसौटी (i) इस काम को मानव रचनात्मक प्रतिभा की उत्कृष्ट कृति कहती है। कसौटी (ii) आधी सदी में विश्व स्तर पर मानवीय मूल्यों के आदान-प्रदान की बात करती है। कसौटी (vi) स्थलों को आधुनिक आंदोलन के विचारों से जोड़ती है। सूची कहती है कि वास्तुकार का बचा हुआ काम चार महाद्वीपों के ग्यारह देशों में फैला है, और चुने गए 17 स्थल तीन महाद्वीपों के सात देशों में हैं। बाकी देश अर्जेंटीना, बेल्जियम, फ़्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्ज़रलैंड हैं।
चंडीगढ़ पर यूनेस्को का संक्षिप्त सार कहता है कि कैपिटल कॉम्प्लेक्स का भारतीय उपमहाद्वीप में काफ़ी प्रभाव रहा और, उद्धृत वाक्यांश में, उसने “भारत के आधुनिकता में प्रवेश” को प्रतीकित किया। वह यह भी दर्ज करता है कि प्राकृतिक एयर-कंडीशनिंग और ऊर्जा बचत की चिंता से धूप-रोधक जालियाँ, दोहरी परत वाली छतें और परावर्तक जलाशय बने, जो बारिश का पानी रोकते हैं और हवा को ठंडा करते हैं। यूनेस्को के अनुसार खुले स्थान मॉड्यूलर (Modulor) का अनुसरण करते हैं, जो ले कोर्बुज़िए की मानव-पैमाने के अनुपातों की प्रणाली है, और ऊपर उठी बाँह वाले एक मनुष्य की छवि को प्रतिबिंबित करते हैं। वह आगे कहता है कि इस परिसर को ले कोर्बुज़िए के संशोधित रूप में एथेंस चार्टर के सिद्धांतों और उनके रेडिएंट सिटी के विचार का सबसे पूर्ण योगदान माना जाता है।
यूनेस्को का मूल्यांकन-पाठ यह भी बताता है कि आगे क्या आता है। उसे कैपिटल कॉम्प्लेक्स के लिए संरक्षण योजना की तुरंत ज़रूरत दिखती है, और वह कहता है कि मूल डिज़ाइन के गवर्नर पैलेस या ज्ञान के संग्रहालय के बन जाने से परिसर की प्रामाणिकता प्रभावित हो सकती है। द ट्रिब्यून ने 8 दिसंबर 2023 को बताया कि एक हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट में सेक्टर 1 की तीन प्रस्तावित परियोजनाओं के नकारात्मक असर मिले थे, एक भूमिगत कार पार्किंग, हाई कोर्ट की विकास योजना और एयर-कंडीशनिंग चिलर प्लांट। उसने कहा कि वैकल्पिक जगहें खोजे जाने तक तीनों को रोक दिया गया।
सूची कैपिटल कॉम्प्लेक्स को शामिल करती है, पूरे शहर को नहीं। द ट्रिब्यून ने 4 फ़रवरी 2025 को बताया कि संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र शेखावत ने लोकसभा में लिखित उत्तर में कहा कि चंडीगढ़ को विश्व धरोहर शहर घोषित नहीं किया गया है। उसी रिपोर्ट में ले कोर्बुज़िए सेंटर की पूर्व निदेशक दीपिका गांधी को उद्धृत किया गया है, जिनके अनुसार कैपिटल कॉम्प्लेक्स और सुखना झील शहर के मास्टर प्लान 2031 के तहत ग्रेड 1 हेरिटेज ज़ोन हैं।
नेक चंद का चोरी-छिपे बनाया रॉक गार्डन
चंडीगढ़ का एक अलग आकर्षण एक सरकारी कर्मचारी की बिना अनुमति की परियोजना के रूप में शुरू हुआ। नेक चंद फ़ाउंडेशन के अनुसार नेक चंद 1951 में लोक निर्माण विभाग में सड़क निरीक्षक बनकर आए, और 1958 में उन्होंने शहर के लिए गिराए गए गाँवों से पत्थर और फेंका हुआ सामान जमा करना शुरू किया। इनक्रेडिबल इंडिया बाग़ की शुरुआत 1957 में बताता है, यानी दोनों स्रोतों में एक साल का अंतर है।
1965 के आसपास उन्होंने सार्वजनिक स्वामित्व वाले एक वन आरक्षित क्षेत्र में रात के समय कंक्रीट और फेंके हुए बर्तनों, टाइलों और पत्थरों से आकृतियाँ जोड़नी शुरू कीं। शहर के निरीक्षकों को यह जगह 1975 में मिली, और फ़ाउंडेशन के अनुसार प्रशासन इसे तोड़ना चाहता था। बहस के बाद चंडीगढ़ लैंडस्केप एडवाइज़री कमेटी ने इसे खुलने की इजाज़त दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. रंधावा ने इसे रॉक गार्डन नाम दिया, और इसका औपचारिक उद्घाटन 24 जनवरी 1976 को हुआ।
इसके बाद नेक चंद को स्थानीय सरकार से थोड़ा बजट और मददगार मिले। इनक्रेडिबल इंडिया के अनुसार उन्हें 50 कारीगरों की टीम दी गई, और वह तथा फ़ाउंडेशन का लंबा पाठ दोनों बाग़ का क्षेत्रफल लगभग 40 एकड़ बताते हैं। दूसरा चरण, जो फ़ाउंडेशन के अनुसार 1983 के आसपास पूरा हुआ, उसमें एक झरना, चौक, एक छोटा रंगमंच और मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों से जड़ी लगभग 5,000 कंक्रीट आकृतियाँ हैं।
आज का चंडीगढ़
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 1 नवंबर 1966 को लागू हुआ और उसने पंजाब से हरियाणा बनाया। प्रशासन के अनुसार चंडीगढ़ 1952 से 1966 तक पंजाब की राजधानी था, और तब दोनों राज्यों ने उस पर दावा किया। जब तक यह सवाल खुला रहा, केंद्र ने अधिनियम की धारा 4 के तहत शहर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। वह आज भी पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है और केंद्र द्वारा सीधे प्रशासित है।
1 जून 1984 से पंजाब के राज्यपाल प्रशासक के रूप में सेवा दे रहे हैं, और मुख्य आयुक्त का पहले का पद प्रशासक के सलाहकार का पद बन गया। प्रशासन की तथ्य-पत्री इस क्षेत्र का क्षेत्रफल 114 वर्ग किलोमीटर और 2011 की साक्षरता दर 86.0 प्रतिशत देती है। एक नज़र में वाला परिचय उसकी सरकार, अर्थव्यवस्था और लोगों को समेटता है, और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना उसे बाकियों के बगल में रखती है। जिन दो राज्यों की वह सेवा करता है, उनके अपने परिचय हैं, पंजाब और हरियाणा।
कैपिटल कॉम्प्लेक्स और रॉक गार्डन देखने जाना
इनक्रेडिबल इंडिया कैपिटल कॉम्प्लेक्स के खुलने का समय सुबह 10:00 बजे और बंद होने का समय शाम 5:00 बजे बताता है। उस पन्ने पर टिकट की कीमत, टूर के समय, पहचान के नियम या सप्ताह के दिन नहीं दिए गए हैं। चंडीगढ़ पर्यटन विभाग का परिसर वाला अपना पन्ना इस लेख की पड़ताल के समय खुल नहीं सका, इसलिए tuput यहाँ टूर के समय, शुल्क या बुकिंग के नियम नहीं देता और यात्रा से पहले वह पन्ना देख लेने की सलाह देता है।
रॉक गार्डन के लिए इनक्रेडिबल इंडिया अप्रैल से सितंबर तक सुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक और अक्तूबर से मार्च तक सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक का समय देता है, और प्रवेश शुल्क नहीं बताता। दोनों सूचियाँ 22 अक्तूबर 2026 को पढ़ी गई थीं।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- UNESCO World Heritage Centre: The Architectural Work of Le Corbusier, an Outstanding Contribution to the Modern Movement
- UNESCO World Heritage Centre, 17 July 2016: Four new sites inscribed on UNESCO's World Heritage List
- Chandigarh Administration: About Us (city history, master plan, sectors, parks, Capitol Complex, 1966 status)
- Chandigarh Administration: Historical Background (site selection, planners, Le Corbusier's team)
- Chandigarh Administration: The Administrator (Union Territory status from 1 November 1966, capital of Punjab 1952 to 1966)
- Fondation Le Corbusier: City of Chandigarh, India, 1950-1965
- Nek Chand Foundation: The Rock Garden, its history and construction
- Incredible India (Ministry of Tourism): Capitol Complex, Chandigarh
- Incredible India (Ministry of Tourism): Rock Garden, Chandigarh
- The Tribune, 4 February 2025: Chandigarh not designated World Heritage City, Centre tells Parliament
- The Tribune, 8 December 2023: Chandigarh Administration hosts delegations' meeting on preservation of Capitol Complex
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