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भारत की अग्नि मिसाइलें 1989 के एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक से शुरू हुईं और अब अग्नि-I से अग्नि-5 तक फैली हैं, जिसने 11 मार्च 2024 को मिशन दिव्यास्त्र में अपना पहला बहु-प्रक्षेपास्त्र परीक्षण उड़ाया
युद्ध और शौर्य

भारत की अग्नि मिसाइलें 1989 के एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक से शुरू हुईं और अब अग्नि-I से अग्नि-5 तक फैली हैं, जिसने 11 मार्च 2024 को मिशन दिव्यास्त्र में अपना पहला बहु-प्रक्षेपास्त्र परीक्षण उड़ाया

फ़ोटो: Defense Research and Development Organisation / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप किया गया)

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम 1983 में शुरू हुआ, जिसमें अग्नि पुनः-प्रवेश प्रौद्योगिकी का प्रदर्शक थी। उसकी विज्ञप्तियों में अग्नि-I की मारक दूरी 700 किमी, अग्नि-IV की 4,000 किमी और अग्नि-V की 5,000 किमी से अधिक बताई गई है। 11 मार्च 2024 को DRDO ने पहली बार अग्नि-5 को कई पुनः-प्रवेश वाहनों के साथ उड़ाया।

· · 9 मिनट का पठन

अग्नि बैलिस्टिक मिसाइलों का परिवार एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक से शुरू हुआ, जिसका पहला परीक्षण प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के एक फ़ीचर के अनुसार 1989 में हुआ था। अब उसमें अग्नि-I से अग्नि-5 तक पाँच क्रमांकित मिसाइलें हैं, और नई अग्नि-प्राइम भी। 2012 से 2025 के बीच की विज्ञप्तियों में रक्षा मंत्रालय ने मारक दूरी अग्नि-I के लिए 700 किमी, अग्नि-II के लिए 2,000 किमी, अग्नि-III के लिए 3,000 किमी से अधिक, अग्नि-IV के लिए 4,000 किमी, अग्नि-V के लिए 5,000 किमी से अधिक और अग्नि-प्राइम के लिए 2,000 किमी तक बताई है।

11 मार्च 2024 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पहली बार अग्नि-5 को कई वारहेड के साथ उड़ाया। इस उड़ान परीक्षण का नाम मिशन दिव्यास्त्र था। मिसाइलें DRDO विकसित करता है। सामरिक बल कमान, जिसे एक PIB फ़ीचर भारत के परमाणु शस्त्रागार का प्रबंधन करने वाली संस्था बताता है, उन्हें प्रशिक्षण प्रक्षेपणों में दागती है।

एक बड़े कार्यक्रम के भीतर पुनः-प्रवेश प्रदर्शक

रक्षा मंत्री ने 27 फ़रवरी 2008 को राज्य सभा में लिखित उत्तर में बताया कि एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) 1983 में ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू हुआ था। उत्तर में अग्नि को पुनः-प्रवेश प्रौद्योगिकी की प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। पुनः-प्रवेश प्रौद्योगिकी वह जानकारी है जिससे वारहेड वायुमंडल से नीचे लौटते हुए ताप सहकर बचा रहता है। उत्तर के अनुसार 16 जनवरी 2008 तक अग्नि प्रदर्शक पर 74.34 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे।

दिलीप घोष का लिखा 27 दिसंबर 2016 का PIB फ़ीचर पहली उड़ान का ब्योरा देता है। उसके अनुसार दो चरणों वाले अग्नि प्रौद्योगिकी प्रदर्शक का पहला परीक्षण 1989 में चांदीपुर की अंतरिम परीक्षण रेंज में हुआ, और वह 1,000 किलो का पारंपरिक पेलोड या एक परमाणु वारहेड ले जा सकता था। फ़ीचर आगे कहता है कि यह प्रदर्शक आगे चलकर ठोस ईंधन वाली अग्नि-1 और अग्नि-2 मिसाइलों में बदला। 1989 की उड़ान की सटीक तारीख़ इस लेख के लिए पढ़े गए आधिकारिक पन्नों में नहीं है।

लोक सभा को 13 अगस्त 2012 को दिया गया दूसरा लिखित उत्तर कहता है कि IGMDP 1983 में शुरू हुआ और मार्च 2012 में पूरा हुआ। उसे पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग और एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक अग्नि के विकास के लिए मंज़ूरी मिली थी। उत्तर के अनुसार अग्नि पुनः-प्रवेश प्रदर्शक सफलतापूर्वक पूरा हुआ और उसकी प्रौद्योगिकी अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों में इस्तेमाल होती है। अग्नि एक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो रॉकेट के बल पर ऊपर चढ़ती है और फिर एक चाप में गिरकर लक्ष्य पर पहुँचती है। ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल, जो पूरे रास्ते अपनी शक्ति से उड़ती है, अलग श्रृंखला है, और उसका अपना ब्योरा ब्रह्मोस की कहानी में है।

अग्नि-I और अग्नि-II, शस्त्रागार की पहली मिसाइलें

फ़ीचर के अनुसार भारत ने इसके बाद एक चरण वाली अग्नि-1 बनाई, जिसका पहला परीक्षण जनवरी 2002 में हुआ। वह अग्नि-I की मारक दूरी 700 से 1,250 किमी बताता है, कहता है कि वह रेल या सड़क से चलती है और ठोस प्रणोदक इस्तेमाल करती है, और अग्नि-II को 2,000 से 2,500 किमी तथा अग्नि-III को 3,000 से 3,500 किमी पर रखता है। फ़ीचर के अनुसार तीनों थलसेना में शामिल हैं।

मंत्रालय की अपनी विज्ञप्तियाँ मारक दूरी पर अधिक सटीक हैं। 13 जुलाई 2012 की एक विज्ञप्ति अग्नि I को 700 किमी की बैलिस्टिक मिसाइल कहती है, जो सड़क पर चलने वाले लॉन्चर से दागी गई और सशस्त्र बलों के शस्त्रागार में पहले से थी। उसे सामरिक बल कमान ने प्रशिक्षण अभ्यास के तौर पर दागा, और लक्ष्य के पास तैनात दो नौसैनिक जहाज़ों ने उड़ान के अंतिम चरण में उसे ट्रैक किया। मंत्रालय की 2012 की वर्ष-अंत समीक्षा अग्नि-II की मारक दूरी 2,000 किमी बताती है और कहती है कि उसका परीक्षण-प्रक्षेपण 9 अगस्त 2012 को हुआ।

यहाँ इस्तेमाल की गई रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्तियों में अग्नि-II या अग्नि-III की पहली उड़ान की तारीख़ें नहीं हैं, इसलिए यह विवरण इन दोनों मिसाइलों को मंत्रालय के मारक दूरी के आँकड़ों और बाद के प्रक्षेपणों के सहारे आगे बढ़ाता है। सामरिक बल कमान ने अग्नि-3 को 23 दिसंबर 2013 को ओडिशा तट के पास व्हीलर द्वीप से दागा। उस विज्ञप्ति में उसकी मारक क्षमता 3,000 किमी से अधिक बताई गई है।

अग्नि-IV, नई प्रौद्योगिकियाँ और 4,000 किमी की मारक दूरी

अग्नि-4 ने पहली उड़ान 15 नवंबर 2011 को व्हीलर द्वीप से सड़क पर चलने वाली प्रणाली से भरी। PIB की विज्ञप्ति के अनुसार मिसाइल लगभग 900 किमी की ऊँचाई तक पहुँची और 3,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक पुनः-प्रवेश तापमान के बीच वापस लौटी। उसमें ठोस प्रणोदक वाले दो चरण थे, और विज्ञप्ति कहती है कि उसकी संयुक्त सामग्री (कम्पोज़िट) की रॉकेट मोटर पहली बार इस्तेमाल हुई। टेसी थॉमस परियोजना निदेशक थीं, और उस समय अग्नि के कार्यक्रम निदेशक अविनाश चंदर ने कहा कि इस परीक्षण ने अग्नि-5 का रास्ता खोल दिया।

विकास श्रृंखला 20 जनवरी 2014 को पूरी हुई। विज्ञप्ति इसे लगातार तीसरा सफल परीक्षण कहती है और बताती है कि 4,000 किमी की इस मिसाइल ने 850 किमी से अधिक की ऊँचाई छुई और अपनी मारक दूरी लगभग 20 मिनट में तय की। उसे तैनाती वाले रूप में उड़ाया गया, जिसमें सामरिक बल कमान के कर्मी शामिल थे। चंदर ने कहा कि मिसाइल शामिल किए जाने के लिए तैयार है और उसका धारावाहिक उत्पादन अब शुरू होगा। प्रक्षेपण दल का नेतृत्व इस बार भी थॉमस ने किया।

6 अगस्त 2026 की एक विज्ञप्ति चांदीपुर की एकीकृत परीक्षण रेंज से अग्नि-4 के एक प्रक्षेपण की सूचना देती है, जिसने सामरिक बल कमान के तहत सभी संचालनात्मक और तकनीकी मानदंड प्रमाणित किए।

अग्नि-V और 5,000 किमी की श्रेणी

अग्नि-V ने पहली उड़ान 19 अप्रैल 2012 को सुबह 8:07 बजे व्हीलर द्वीप से भरी। PIB की विज्ञप्ति इसे भारत की पहली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल कहती है और उसकी मारक दूरी 5,000 किमी से अधिक बताती है। विज्ञप्ति के अनुसार उसके रॉकेट प्रणोदन के तीनों चरण पूरी तरह DRDO ने विकसित किए, और उसके मार्गदर्शन में रिंग लेज़र जाइरो (प्रकाश किरणों से घूमने को भाँपने वाला उपकरण) और एक दूसरी, अतिरिक्त नौवहन प्रणाली को मिलाया गया था, ताकि वह लक्ष्य के कुछ मीटर के भीतर पहुँचे। प्रक्षेपण देखने वाले, तत्कालीन सामरिक बल कमान के कमांडर-इन-चीफ़ एयर मार्शल के.जे. मैथ्यूज़ ने उसकी सफलता को भारत के लिए ऐतिहासिक घटना कहा।

पाँचवाँ परीक्षण 18 जनवरी 2018 को हुआ। विज्ञप्ति के अनुसार यह सड़क पर चलने वाले लॉन्चर पर रखे कनस्तर से लगातार तीसरा प्रक्षेपण था, और पाँचों मिशन सफल रहे थे। 2016 का PIB फ़ीचर कहता है कि मिसाइल को कहीं से भी ले जाकर तेज़ी से दागा जा सकता है।

27 अक्टूबर 2021 को मंत्रालय ने तीन चरणों वाली ठोस ईंधन की इस मिसाइल का वर्णन 5,000 किमी तक की दूरी के लक्ष्य भेदने में सक्षम मिसाइल के रूप में किया। उस विज्ञप्ति ने प्रक्षेपण को विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध की नीति के भीतर भी रखा, जिसके बारे में उसने कहा कि वही परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की प्रतिबद्धता का आधार है। 20 अगस्त 2025 को चांदीपुर में सामरिक बल कमान की देखरेख में हुए प्रक्षेपण ने, विज्ञप्ति के अनुसार, सभी संचालनात्मक और तकनीकी मानदंड प्रमाणित किए।

मिशन दिव्यास्त्र

रक्षा मंत्रालय की 11 मार्च 2024 की विज्ञप्ति के अनुसार मिशन दिव्यास्त्र नाम का यह उड़ान परीक्षण अग्नि-5 का मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल, यानी MIRV, प्रौद्योगिकी के साथ पहला परीक्षण था। मिसाइल ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से उड़ी। MIRV मिसाइल में एक रॉकेट कई अलग पुनः-प्रवेश वाहन ले जाता है, और हर एक को अलग लक्ष्य पर साधा जा सकता है।

विज्ञप्ति के अनुसार टेलीमेट्री और रडार केंद्रों ने कई पुनः-प्रवेश वाहनों को ट्रैक और मॉनिटर किया, और मिशन ने अपने तय मानदंड हासिल किए। प्रधानमंत्री ने सोशल मंच X पर DRDO के वैज्ञानिकों की सराहना की, और रक्षा मंत्री ने नतीजे को असाधारण सफलता कहा।

मंत्रालय की 9 मई की विज्ञप्ति के अनुसार दूसरी MIRV उड़ान 8 मई 2026 को हुई। उसके अनुसार MIRV प्रणाली वाली एक एडवांस्ड अग्नि मिसाइल उसी द्वीप से उड़ी, जिसके कई पेलोड हिंद महासागर क्षेत्र के एक बड़े इलाक़े में बिखरे अलग-अलग लक्ष्यों पर साधे गए थे। ज़मीनी केंद्रों और जहाज़ों ने उड़ान के आरंभ से हर पेलोड के गिरने तक पूरे प्रक्षेप-पथ को ट्रैक किया, और उड़ान के आँकड़ों ने पुष्टि की कि सभी मिशन उद्देश्य पूरे हुए। विज्ञप्ति के अनुसार मिसाइल DRDO की प्रयोगशालाओं ने देश भर के उद्योग के सहयोग से विकसित की। DRDO की 2026 की परीक्षण श्रृंखला का विवरण उस उड़ान और दो हफ़्ते बाद के अग्नि-1 प्रक्षेपण को समेटता है।

अग्नि-प्राइम और रेल लॉन्चर

अग्नि-प्राइम, जिसे मंत्रालय अग्नि P भी लिखता है, ने पहली उड़ान 28 जून 2021 को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से भरी। विज्ञप्ति उसे अग्नि वर्ग का नई पीढ़ी का उन्नत रूप कहती है, जो कनस्तर में बंद रहता है और जिसकी मारक दूरी 1,000 से 2,000 किमी के बीच है।

7 जून 2023 को सशस्त्र बलों के उपयोगकर्ताओं ने तीन सफल विकास परीक्षणों के बाद उसका पहला शामिल-पूर्व रात्रि प्रक्षेपण किया, और विज्ञप्ति के अनुसार उस उड़ान ने सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने का रास्ता तैयार किया। मंत्रालय ने बाद में कहा है कि सड़क पर चलने वाली अग्नि-P शामिल हो चुकी है।

24 सितंबर 2025 को DRDO और सामरिक बल कमान ने एक अग्नि-प्राइम को रेल पर आधारित चल लॉन्चर से दागा, जिसे विज्ञप्ति पूर्ण संचालनात्मक परिदृश्य कहती है। विज्ञप्ति के अनुसार मिसाइल 2,000 किमी तक मार करने के लिए बनी है, लॉन्चर रेल नेटवर्क पर बिना पूर्व-शर्तों के चल सकता है और थोड़े प्रतिक्रिया-समय में दाग सकता है, और यह अपनी तरह का पहला प्रक्षेपण है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस उड़ान से भारत उन चुनिंदा देशों में आ गया जिनके पास रेल नेटवर्क से कनस्तर वाली प्रक्षेपण प्रणाली है।

आँकड़े क्या कहते हैं और क्या नहीं

आधिकारिक मारक दूरी के आँकड़े अलग-अलग समय पर लिखे गए और हमेशा मेल नहीं खाते। 2012 की विज्ञप्ति अग्नि-V को 5,000 किमी से अधिक बताती है, जबकि 2021 की विज्ञप्ति 5,000 किमी तक कहती है। PIB फ़ीचर के अग्नि-I के लिए 700 से 1,250 किमी और अग्नि-III के लिए 3,000 से 3,500 किमी मंत्रालय की अपनी विज्ञप्तियों के एकल आँकड़ों से चौड़े दायरे हैं। अग्नि-5 पर अगस्त 2025 की विज्ञप्ति और अग्नि-4 पर अगस्त 2026 की विज्ञप्ति कोई मारक दूरी नहीं देती।

मंत्रालय के श्रेणी-नाम भी बदले हैं। 2018 की एक विज्ञप्ति अग्नि-5 को लंबी दूरी की मिसाइल कहती है, और अगस्त 2025 की विज्ञप्ति उसे मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल कहती है। अग्नि-4 के लिए 2011 की विज्ञप्ति लंबी दूरी कहती है, और अगस्त 2026 की विज्ञप्ति मध्यम दूरी। इस लेख के लिए पढ़ी गई विज्ञप्तियाँ भंडार की संख्या, वारहेड की संख्या या क्षमता नहीं देतीं। प्रक्षेपण का आदेश कौन दे सकता है, यह भारत के परमाणु कमान प्राधिकरण के विवरण में है। यहाँ इस्तेमाल की गई विज्ञप्तियों में सबसे ताज़ा प्रक्षेपण 6 अगस्त 2026 को चांदीपुर से अग्नि-4 की उड़ान है, जो सामरिक बल कमान की देखरेख में हुई।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Press Information Bureau, Ministry of Defence: DRDO successfully conducts Mission Divyastra, 11 March 2024
  2. Press Information Bureau, Ministry of Defence: India conducts successful flight-trial of Advanced Agni missile with Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle system, 9 May 2026
  3. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Abandonment of IGMDP, Rajya Sabha reply, 27 February 2008
  4. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Missile Development Programme, Lok Sabha reply, 13 August 2012
  5. Press Information Bureau feature by Dilip Ghosh: Successful Test launch of AGNI V, 27 December 2016
  6. Press Information Bureau, Ministry of Defence: AGNI I Ballistic Missile Successfully Launched, 13 July 2012
  7. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Year-End Review 2012 (achievements of the Ministry of Defence during 2012)
  8. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Agni-3 Launch, a Flawless Mission, 23 December 2013
  9. Press Information Bureau, Ministry of Defence: India Launches new Generation Strategic missile AGNI 4, 15 November 2011
  10. Press Information Bureau, Ministry of Defence: India Successfully Test Fires Agni-IV, 20 January 2014
  11. Press Information Bureau, Ministry of Defence: 'Agni-4' Ballistic Missile successfully test-fired, 6 August 2026
  12. Press Information Bureau, Ministry of Defence: India launches New Generation Strategic Missile AGNI-V, 19 April 2012
  13. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Successful Fifth Flight Test of Agni-5 Ballistic Missile, 18 January 2018
  14. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Surface to Surface Ballistic Missile, Agni-5, successfully launched from APJ Abdul Kalam Island, 27 October 2021
  15. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Successful test-firing of 'Agni 5' Intermediate Range Ballistic Missile, 20 August 2025
  16. Press Information Bureau, Ministry of Defence: DRDO successfully flight tests New Generation Agni P Ballistic Missile, 28 June 2021
  17. Press Information Bureau, Ministry of Defence: 'Agni Prime' ballistic missile successfully flight-tested by DRDO off Odisha coast, 8 June 2023
  18. Press Information Bureau, Ministry of Defence: DRDO carries out the successful launch of Intermediate Range Agni-Prime Missile from a Rail based Mobile launcher system, 25 September 2025

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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