Skip to content
भारत का गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस दस साल का होते-होते 20 लाख करोड़ रुपये की सरकारी ख़रीद पार कर गया, 25.45 लाख विक्रेताओं और 3.78 करोड़ ऑर्डरों के साथ
अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा

भारत का गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस दस साल का होते-होते 20 लाख करोड़ रुपये की सरकारी ख़रीद पार कर गया, 25.45 लाख विक्रेताओं और 3.78 करोड़ ऑर्डरों के साथ

चित्रण: tuput

हिन्दी

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने 7 अगस्त 2026 तक, अपनी दसवीं वर्षगाँठ से दो दिन पहले, 3.78 करोड़ ऑर्डरों के ज़रिये 20 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की ख़रीद कराई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार पहले 10 लाख करोड़ रुपये में आठ साल से ज़्यादा लगे और दूसरे में दो साल से कम।

· · 9 मिनट का पठन

भारत के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने, जो सरकारी दफ़्तरों के सामान और सेवाएँ ख़रीदने का ऑनलाइन पोर्टल है, 7 अगस्त 2026 तक 3.78 करोड़ से ज़्यादा ऑर्डरों के ज़रिये 20 लाख करोड़ रुपये (20 ट्रिलियन रुपये) से ज़्यादा की ख़रीद कराई, उसी तारीख़ की वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार। पोर्टल ने 9 अगस्त 2026 को दस साल पूरे किए। इसका सालाना मूल्य वित्त वर्ष 2016-17 के 422 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में से हर एक में 5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँचा।

दोनों गोल किए हुए कुल आँकड़ों को भाग देने पर औसत ऑर्डर लगभग 5.3 लाख रुपये का आता है (यह हमारा भाग है)। इस लेख के आँकड़े 7 अगस्त 2026 तक के मंत्रालय के आँकड़े हैं, और 29 अक्टूबर 2026 तक tuput को कोई नया संचयी कुल नहीं मिला।

दूसरे 10 लाख करोड़ रुपये में दो साल से कम लगे

मंत्रालय की विज्ञप्ति कहती है कि संचयी मूल्य के पहले 10 लाख करोड़ रुपये में आठ साल से ज़्यादा लगे, और अगले 10 लाख करोड़ रुपये दो साल से कम में आ गए। पहले के सरकारी और अख़बारी आँकड़े इस चढ़ाई को दिखाते हैं। प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 8 फ़रवरी 2023 की विज्ञप्ति ने संचयी कुल 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बताया था। राज्यसभा में लिखित उत्तर, जिसे प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ने 10 अगस्त 2024 को रिपोर्ट किया, ने 30 जुलाई 2024 तक 9.82 लाख करोड़ रुपये बताए।

फिर मंत्रालय ने 25 अगस्त 2025 को कहा कि GeM ने 15 लाख करोड़ रुपये पार कर लिए हैं। IANS ने 6 अप्रैल 2026 को रिपोर्ट किया कि मंत्रालय ने कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये बताया, जिसमें से 5 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन वित्त वर्ष 2025-26 में हुआ।

120 उत्पाद श्रेणियों वाला एक पायलट

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी 2020 की रिपोर्ट संख्या 18 में शुरुआत का वर्णन किया। आपूर्ति एवं निपटान महानिदेशालय (DGS&D) 1951 से केंद्रीय ख़रीद एजेंसी था। फ़रवरी 2016 में सरकार ने एक ऑनलाइन, शुरू से अंत तक की ख़रीद प्रणाली बनाने का निर्णय लिया, और DGS&D द्वारा नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीज़न के साथ विकसित एक पायलट 9 अगस्त 2016 को चालू हुआ। उसमें 120 उत्पाद श्रेणियाँ और एक सेवा श्रेणी थी।

रिपोर्ट DGS&D की पुरानी दर-अनुबंध प्रणाली की उन कमज़ोरियों को गिनाती है जिन्हें GeM को दूर करना था, जिनमें बेहतर दाम पाने के लिए अलग-अलग दफ़्तरों के ऑर्डरों को जोड़ने की व्यवस्था का न होना, कार्टेल के लिए खुलापन (आपूर्तिकर्ताओं का आपस में दाम तय कर लेना), केवल उत्पादों पर ध्यान और भुगतान में देरी शामिल हैं।

GeM को 17 मई 2017 को कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया, और DGS&D को 31 अक्टूबर 2017 को समाप्त कर दिया गया। वित्त मंत्रालय ने सामान्य वित्तीय नियम 2017 के नियम 149 के तहत सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए GeM से ख़रीद अनिवार्य कर दी। नया प्लेटफ़ॉर्म दो चरणों में चालू हुआ, 26 जनवरी 2018 को और दिसंबर 2018 में। मार्च 2019 तक CAG ने 16,286.99 करोड़ रुपये मूल्य के 13.81 लाख ऑर्डर गिने, और 30 मार्च 2020 तक कुल 51,467 करोड़ रुपये मूल्य के 38.38 लाख ऑर्डर थे, जिनमें कुछ ऐसे ऑर्डर भी शामिल थे जो अभी शुरुआती चरण में थे।

दफ़्तर कैसे ख़रीदता है, और किससे

PIB की फ़रवरी 2023 की विज्ञप्ति ख़रीद के तरीक़े गिनाती है: सीधी ख़रीद, L1 (सबसे कम दाम की पेशकश), बोली, रिवर्स ऑक्शन (विक्रेता बोली लगाकर दाम नीचे लाते हैं) और बोली के बाद रिवर्स ऑक्शन। उपयोगकर्ताओं का प्रमाणीकरण सरकारी डेटाबेसों से जुड़ाव के ज़रिये होता है, जिनमें आधार, PAN, स्टार्टअप रजिस्टर, GST नेटवर्क और कंपनी रजिस्ट्री शामिल हैं। इसका GST वाला पक्ष tuput के GST कैसे काम करता है वाले लेख में समझाया गया है।

PIB के 8 अगस्त 2026 के फ़ीचर के अनुसार ख़रीदारों में केंद्र और राज्यों के मंत्रालय और विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय, स्थानीय निकाय, पंचायतें और सहकारी संस्थाएँ शामिल हैं। दस साल में ख़रीदार संगठनों की संख्या 1,707 से बढ़कर 1.37 लाख हो गई। कैटलॉग में 10,660 से ज़्यादा उत्पाद श्रेणियाँ और 350 सेवा श्रेणियाँ हैं, चिकित्सा उपकरण, फ़र्नीचर और कंप्यूटर से लेकर हस्तशिल्प, परिवहन, खानपान और वाहन किराये तक। फ़ीचर हाल के सुधारों में बार-बार होने वाली ख़रीद के लिए दर अनुबंध और विक्रेताओं के लिए अमानत राशि (एक जमा) हटाए जाने को गिनाता है।

7 अगस्त 2026 को ऑल इंडिया रेडियो द्वारा रिपोर्ट की गई एक प्रेस वार्ता में GeM के मुख्य कार्यकारी मिहिर कुमार ने कहा कि अब सभी राज्य जुड़ चुके हैं। PIB का फ़ीचर कहता है कि अकेले सैन्य मामलों के विभाग का संचयी मूल्य 6 अगस्त 2026 तक 1.35 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका था।

विक्रेता: 3,339 से 25.45 लाख तक

विज्ञप्ति प्रोफ़ाइल पूरी कर चुके विक्रेताओं की संख्या 25.45 लाख बताती है, जो 3,339 से बढ़ी है। पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यम (MSE) 2,424 से बढ़कर 12.25 लाख हो गए। MSE ने 9.07 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के ऑर्डर पूरे किए हैं, जो संचयी मूल्य का 45.6 प्रतिशत है। 2.24 लाख से ज़्यादा महिला-नेतृत्व वाले MSE ने 99,147 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के 50 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए हैं, और 42,242 स्टार्टअप ने 65,633 करोड़ रुपये से ऊपर के ऑर्डर जीते हैं। इन कंपनियों की गिनती कैसे होती है, यह tuput के भारत के मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और यूनिकॉर्न वाले लेख में है।

PIB का फ़ीचर अकेले वित्त वर्ष 2025-26 के आँकड़े देता है। 11 लाख से ज़्यादा पंजीकृत MSE ने 2.36 लाख करोड़ रुपये से ऊपर के 51 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए। 2.1 लाख से ज़्यादा पंजीकृत महिला-नेतृत्व वाले MSE ने 28,000 करोड़ रुपये से अधिक हासिल किए। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमों से ख़रीद 6,000 करोड़ रुपये से ऊपर रही, जो लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, और स्टार्टअप से ख़रीद 19,000 करोड़ रुपये पार कर गई, जो 36 प्रतिशत से ऊपर की बढ़ोतरी है।

विज्ञप्ति विक्रेताओं की ओर की शुल्क कटौतियाँ भी गिनाती है। लेन-देन शुल्क 0.50 प्रतिशत से घटकर 0.30 प्रतिशत हो गया। 10 लाख रुपये तक के ऑर्डरों पर कोई लेन-देन शुल्क नहीं लगता, जिसका मतलब विज्ञप्ति के अनुसार यह है कि सभी ऑर्डरों के 97 प्रतिशत पर कोई शुल्क नहीं लगता। अधिकतम शुल्क 3 लाख रुपये पर सीमित है, और विक्रेता मूल्यांकन शुल्क 92 प्रतिशत तक घटे हैं।

अन्य सहायता में GeM सहाय है, एक मोबाइल ऐप जो पात्र एकल-स्वामित्व वाले विक्रेताओं को बिना गिरवी के कार्यशील पूँजी ऋण देता है। 18 जून 2026 को GeM ने CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता किया, ताकि दिल्ली क्षेत्र सहित चुनिंदा राज्यों में पायलट के रूप में 50 GeM सुविधा केंद्र (विक्रेताओं के लिए सहायता केंद्र) खोले जा सकें। PIB के अनुसार लगभग 5.3 लाख विक्रेता इससे पहले कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क के ज़रिये पंजीकृत हो चुके थे। मुख्य कार्यकारी ने विज्ञप्ति में कहा कि GeM ने सरकारी ख़रीद को अपारदर्शी, बिखरी प्रक्रियाओं से एक पारदर्शी बाज़ार में बदल दिया है जहाँ क्षमता से सफलता तय होती है।

बचत का दावा और उसका आधार

विज्ञप्ति IIT दिल्ली के एक अध्ययन का हवाला देती है, जो वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 को कवर करता है। वह दाम और प्रक्रिया की कुशलता से 86,571.69 करोड़ रुपये का मौद्रिक लाभ और 1,76,411.46 करोड़ रुपये की शुद्ध सामाजिक बचत आँकता है। अन्य ऑनलाइन बाज़ारों से 101 वस्तुओं की तुलना में GeM 74.3 प्रतिशत वस्तुओं पर सस्ता था, ख़र्च-भारित बचत 13.6 प्रतिशत थी। ऑल इंडिया रेडियो के अनुसार मुख्य कार्यकारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि तुलना अमेज़न, फ़्लिपकार्ट और इंडियामार्ट से थी।

ANI की रिपोर्ट 86,571.69 करोड़ रुपये को इस तरह बाँटती है: अनुमानित और अनुबंधित दामों के अंतर से 85,940 करोड़ रुपये, प्रचार के काल्पनिक मूल्य के 590.74 करोड़ रुपये और भुगतान-चक्र की वित्तीय बचत के 40.95 करोड़ रुपये। विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि अध्ययन किसने कराया, न उसकी पद्धति प्रकाशित करती है, और tuput ने अध्ययन ख़ुद नहीं देखा है।

इससे पहले की एक सार्वजनिक तुलना आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में है। उसने 6 जनवरी 2022 की स्थिति में 22 वस्तुओं को अमेज़न, फ़्लिपकार्ट और कंपनियों की वेबसाइटों से मिलाया। 22 में से दस GeM पर सस्ती थीं, और पूरे नमूने में GeM के दाम लगभग 9.5 प्रतिशत कम थे, जबकि पिछले साल के सर्वेक्षण में यह लगभग 3 प्रतिशत था। सर्वेक्षण की तालिका उन वस्तुओं को भी दिखाती है जो GeM पर महँगी थीं। वह विश्व बैंक के एक आकलन का हवाला देता है जिसमें फ़रवरी 2019 से जनवरी 2020 के बीच माध्यिका दाम पर औसतन 9.75 प्रतिशत की बचत मिली थी। नमूने (22 और 101 वस्तुएँ), साल और पद्धतियाँ अलग हैं, इसलिए ये आँकड़े एक ही श्रृंखला नहीं बनाते।

2020 की ऑडिट में क्या मिला

CAG ने GeM के पहले चरण का ऑडिट किया, 26 जनवरी 2018 से 31 मार्च 2019 तक का। उसने निष्कर्ष निकाला कि GeM सरकारी ख़रीद को ऑनलाइन लाने में सफल रहा था। उसने ऐसे निष्कर्ष भी दिए जिनका ज़िक्र मंत्रालय की 2026 की विज्ञप्ति में नहीं है।

इलेक्ट्रॉनिकी मंत्रालय के 2011 के दिशानिर्देश ई-प्रोक्योरमेंट प्रणालियों के गुणवत्ता-प्रमाणन ऑडिट की माँग करते हैं, जो मानकीकरण परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणन (STQC) निदेशालय करे। CAG ने कहा कि वह ऑडिट दिशानिर्देशों के दायरे के अनुसार नहीं हुआ था, इसलिए वह ई-बिडिंग तरीक़े की विश्वसनीयता पर आश्वस्त नहीं हो सका, जबकि जाँचे गए दौर में GeM से हुई ख़रीद के मूल्य का 37 प्रतिशत से ज़्यादा इसी तरीक़े से हुआ। GeM के प्रबंधन ने STQC की अगस्त 2018, दिसंबर 2018 और अगस्त 2019 की रिपोर्टों का हवाला दिया, और लेखा परीक्षकों ने उनके दायरे को दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं माना।

CAG ने भुगतान में देरी को अपने जाँचे गए दौर के लिए “एक गंभीर प्रणालीगत समस्या” कहा। उसने यह भी कहा कि GeM द्वारा प्रकाशित बचत बाज़ार दाम और पेश किए गए दाम के अंतर के रूप में निकाली गई थी और इस पद्धति की समीक्षा की ज़रूरत थी। GeM के प्रबंधन ने फ़रवरी 2020 में लेखा परीक्षकों को बताया कि उसने IIM लखनऊ से बचत की गणना का ढाँचा विकसित करने को कहा है। रिपोर्ट 2020 की है, और tuput को GeM की कोई बाद की प्रकाशित ऑडिट नहीं मिली।

भुगतान के बारे में, स्वराज्य ने 9 जनवरी 2026 को रिपोर्ट किया कि देरी से भुगतान की शिकायतों का सरकारी पोर्टल MSME समाधान दिसंबर 2025 तक 31,039.28 करोड़ रुपये के लंबित आवेदन दिखा रहा था। यह आँकड़ा सभी ख़रीदारों का है, अकेले GeM का नहीं।

मंत्रालय के अनुसार आगे क्या

विज्ञप्ति कहती है कि GeM अब पूरे ख़रीद-चक्र को डिजिटल करता है और कार्टेलीकरण, मिलीभगत और ऑर्डर-बँटवारे (एक ख़रीद को छोटे हिस्सों में बाँटना ताकि कोई नियम न लगे) की आशंका को चिह्नित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग उपकरणों का उपयोग करता है। वह जोड़ती है कि लेन-देन का रिकॉर्ड नीति-निर्माताओं को सार्वजनिक ख़र्च पर नज़र रखने देता है। मुख्य कार्यकारी ने कहा कि अगला दशक AI के गहरे उपयोग से आकार लेगा।

PIB का फ़ीचर कहता है कि GeM का केंद्रीय सार्वजनिक ख़रीद पोर्टल से एकीकरण निविदा जानकारी के लिए एक ही पहुँच-बिंदु देता है, और भारतीय रेल की ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली तथा रक्षा सार्वजनिक ख़रीद पोर्टल का एकीकरण चल रहा है। वह अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी की ख़रीद के लिए IN-SPACe और ड्रोन के लिए ड्रोन फ़ेडरेशन इंडिया के साथ अप्रैल 2025 की साझेदारियों को भी गिनाता है। जून 2026 की PIB विज्ञप्ति के अनुसार सुविधा केंद्र पायलट का आकलन अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तार के लिए किया जाना है।

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों के लिए विज्ञप्ति GeM का मूल्य 1,47,888 करोड़ रुपये देती है।

Share
Copied!

स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. PIB, Ministry of Commerce and Industry: GeM Completes a Decade of Transforming Public Procurement with Cumulative GMV Exceeding Rs 20 Lakh Crore (7 August 2026)
  2. PIB: Where Every Purchase Finds a GeM, Transforming Public Procurement Through Digital Governance (8 August 2026)
  3. PIB, Ministry of Commerce and Industry: GeM Partners with Common Service Centre to Expand Access to Government Procurement Opportunities Across India (18 June 2026)
  4. PIB, Ministry of Commerce and Industry: GeM media interaction on its FY23 GMV and cumulative GMV (8 February 2023)
  5. Comptroller and Auditor General of India: Report No. 18 of 2020, Chapter IV, Information Systems Audit of Government e-Marketplace
  6. Ministry of Finance: Economic Survey 2021-22, Box 5 on GeM prices against other platforms (pages 99 to 101)
  7. Tribune India (ANI): GeM completes 10 years, crosses Rs 20 lakh crore in cumulative GMV (7 August 2026)
  8. Devdiscourse: GeM marks 10 years with Rs 20 lakh crore in public procurement (August 2026)
  9. News On AIR (All India Radio): GeM emerges as cornerstone of India's digital governance ecosystem, CEO Mihir Kumar (7 August 2026)
  10. IANS: Government e-Marketplace hits Rs 18 lakh crore GMV mark, MSEs account for 68 pc (6 April 2026)
  11. Tribune India (ANI): GeM crosses Rs 15 lakh crore milestone in public procurement (25 August 2025)
  12. Free Press Journal (PTI): GeM portal achieves Rs 9.82 lakh crore gross merchandise value milestone (10 August 2024)
  13. Swarajya: Beyond the GeM portal, why MSMEs are still waiting for their money from government buyers (9 January 2026)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

#gem#government e-marketplace#public procurement#msme#startups#ministry of commerce and industry#digital india#cag

अच्छा लगा? अगला लेख पाएँ।

एक बार में एक अच्छा लेख, सीधे आपके इनबॉक्स में। कोई स्पैम नहीं, जब चाहें अनसब्सक्राइब करें।

इसी श्रेणी में और: अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा
अगस्त 2026 के अंत में भारत में 1,101.21 मिलियन ब्रॉडबैंड ग्राहक गिने गए, और अप्रैल से जून की तिमाही में हर मोबाइल डेटा उपयोगकर्ता का औसत 28.39 GB प्रति माह रहा
मशीन कनेक्शन अलग गिने गए हैं, 5G फ़िक्स्ड वायरलेस में ग्रामीण कनेक्शन आगे हैं, और अप्रैल से जून में एक गीगाबाइट से ऑपरेटरों को Rs 7.13 मिले। नियामक की अपनी तालिकाएँ, 8 अक्टूबर को प्रधानमंत्री और संचार मंत्री के कहे के बगल में रखी हुई।
भाषिणी 22 भारतीय भाषाओं में आवाज़ और 36 में पाठ की सेवा देती है, और IIT मद्रास की एक प्रयोगशाला ने सभी 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए खुला अनुवाद मॉडल बनाया
एक सरकारी मंच और एक विश्वविद्यालय प्रयोगशाला मिलकर मशीनों को हिंदी, तमिल, संथाली और बाक़ी भाषाएँ सिखाने का काम बाँटते हैं। ये वे आँकड़े, शोध-पत्र और तैनातियाँ हैं जो तारीख़ों के साथ दर्ज हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को केवल उसी तरह हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, और हर लेखा-परीक्षा रिपोर्ट संसद या राज्य विधानमंडल के सामने रखी जाती है
जो कार्यालय यह जाँचता है कि सार्वजनिक धन उसी तरह खर्च हुआ या नहीं जैसे विधानमंडल ने मंज़ूर किया था, वह गणराज्य से पुराना है और संविधान की ढाल में है। यहाँ देखिए कि वह किसकी लेखा-परीक्षा करता है, कोई निष्कर्ष कैसे आगे बढ़ता है, और उसकी दो सबसे जानी-मानी रिपोर्टों का आगे क्या हुआ।
← सभी लेख