फ़ोटो: Yorkspotter / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप किया गया)
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1983 से पहले छह विश्व कप मैचों में सिर्फ़ एक जीतने वाले भारत ने फ़ाइनल में 183 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 140 पर आउट कर दिया। मोहिंदर अमरनाथ ने 26 रन बनाए और 12 रन देकर 3 विकेट लिए, और मदन लाल ने 31 रन देकर 3 विकेट। एक हफ़्ते पहले भारत के 17 रन पर 5 विकेट गिरने के बाद कपिल देव ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ 138 गेंदों में नाबाद 175 रन बनाए थे।
भारत ने 25 जून 1983 को लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज को 43 रन से हराकर पहली बार विश्व कप जीता। भारत ने 183 रन बनाए और दो बार की चैंपियन टीम को 52 ओवर में 140 पर आउट कर दिया। ESPNcricinfo के स्कोरकार्ड और विज़डन के 1984 के अल्मनैक के अनुसार, 26 रन बनाने और 12 रन देकर 3 विकेट लेने वाले मोहिंदर अमरनाथ मैन ऑफ़ द मैच रहे।
तब 24 साल के कपिल देव टीम के कप्तान थे। फ़ाइनल से सात दिन पहले उन्होंने टनब्रिज वेल्स में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ 138 गेंदों में नाबाद 175 रन बनाए थे, एक ऐसी पारी जिसने भारत को 17 रन पर 5 विकेट गिरने की हालत से निकाला और जिसे किसी टेलीविज़न कैमरे ने दर्ज नहीं किया।
66 के मुक़ाबले 1 की बाज़ी और छह में एक जीत
1983 से पहले भारत 1975 और 1979 में छह विश्व कप मैच खेल चुका था और उनमें से एक जीता था, ईस्ट अफ़्रीका के ख़िलाफ़, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के रिकॉर्ड के अनुसार। आईसीसी की वर्षगाँठ वाली फ़ीचर के मुताबिक़ भारतीय खिलाड़ियों में से कुछ इंग्लैंड के इस दौरे को सैर-सपाटे की तरह देखते थे, और संदीप पाटिल ने 2015 में लिखा कि भारत “मुक़ाबले में कहीं नहीं था।”
सट्टे का बाज़ार भी यही कहता था। सुरेश मेनन ने ESPNcricinfo पर लिखा कि वेस्टइंडीज के साथ भारत के शुरुआती मैच के समय सट्टेबाज़ों के भाव भारत पर 66-1 थे। फ़ाइनल को स्टैंड से देखने वाले राजदीप सरदेसाई टूर्नामेंट की शुरुआत में 50 के मुक़ाबले 1 का भाव बताते हैं, यानी भाव इस पर निर्भर करता है कि कौन बता रहा है और कब का बता रहा है।
कपिल को कप्तान बने क़रीब चार महीने हुए थे। क्रिकइन्फ़ो के सांबित बाल ने लिखा कि पाकिस्तान से टेस्ट शृंखला हारने और सुनील गावस्कर को हटाए जाने के बाद उन्हें यह ज़िम्मेदारी मिली, और कम ही लोग, उनके अपने साथी खिलाड़ी भी, मानते थे कि वे इसके लिए तैयार हैं।
दो हारें, फिर 17 पर 5 विकेट
भारत ने वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ शुरुआत की। यशपाल शर्मा ने 89 रन बनाए, भारत ने 262 रन बनाए और वेस्टइंडीज 228 पर आउट हो गई, जिसमें रोजर बिन्नी और रवि शास्त्री ने तीन-तीन विकेट लिए, आईसीसी के अनुसार। फिर भारत ने ज़िम्बाब्वे को हराया, जिसमें आईसीसी के ब्योरे के मुताबिक़ मदन लाल ने 27 रन देकर 3 विकेट लिए।
इसके बाद दो हारें आईं, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज से, जिससे ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ दूसरे मैच से पहले भारत के खाते में दो जीत और दो हार थीं। बिन्नी ने बाद में कहा, जैसा स्क्रॉल ने बताया: “उस पारी के बिना हमारा टूर्नामेंट ख़त्म था।”
18 जून को टनब्रिज वेल्स में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी चुनी। क्रिकइन्फ़ो के अभिलेख की रिपोर्ट के अनुसार पीटर रॉसन और केविन करन ने गेंद को सीम से हिलाया और उछाल भी निकाला, और शीर्ष क्रम तेज़ी से ढह गया। गावस्कर पहले ही ओवर में रॉसन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू होकर शून्य पर आउट हुए, कृष श्रीकांत शून्य पर कैच आउट हुए, अमरनाथ ने 5, पाटिल ने 1 और यशपाल शर्मा ने 9 रन बनाए। ज़िम्बाब्वे के विकेटकीपर डेव हॉटन ने तीन कैच पकड़े। स्कोरकार्ड में भारत का स्कोर 17 पर 5 विकेट है।
138 गेंदों में नाबाद 175
स्कोरकार्ड के अनुसार कपिल छठे नंबर पर उतरे, और विकेट 0, 6, 6, 9 और 17 के स्कोर पर गिरे थे, इसलिए वे 17 पर 5 विकेट की हालत में क्रीज़ पर पहुँचे। बाल और आईसीसी समेत कई बाद के ब्योरे कहते हैं कि जब वे आए तब भारत 9 पर 4 विकेट था। कपिल को दी गई विज़डन की 1995 की श्रद्धांजलि स्कोरकार्ड से सहमत है और 17 पर 5 विकेट बताती है।
बिन्नी 77 तक उनके साथ टिके रहे। शास्त्री 78 पर गए, और मदन लाल ने स्कोर को 140 पर 8 विकेट तक ले जाने में मदद की। फिर बचे सैयद किरमानी, जिन्होंने 56 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाए, जबकि नौवें विकेट की उनकी अटूट साझेदारी के 126 रनों में से ज़्यादातर कपिल ने बनाए। कपिल 16 चौकों और 6 छक्कों के साथ 175 पर रहे, और भारत 60 ओवर में 8 विकेट पर 266 रन तक पहुँचा।
क्रिकइन्फ़ो के अभिलेख की रिपोर्ट मैदान का एक ब्योरा भी जोड़ती है: पिच वर्गाकार हिस्से के किनारे पर थी, इसलिए एक बाउंड्री बहुत लंबी और दूसरी छोटी थी, और कपिल ने छोटी तरफ़ का फ़ायदा उठाया। वह यह भी दर्ज करती है कि ज़िम्बाब्वे के पाइक्रॉफ़्ट और हॉटन का मानना था कि उनके कप्तान डंकन फ़्लेचर ने रॉसन और करन को लगभग एक ही समय गेंदबाज़ी से हटाकर ग़लती की।
अपने पहले विश्व कप में खेल रही ज़िम्बाब्वे 31 रन पीछे रह गई। करन ने 73 रन बनाए, मदन लाल ने 42 रन देकर 3 विकेट लिए, और ज़िम्बाब्वे 57 ओवर में 235 पर आउट हो गई। कपिल ने 32 रन देकर 1 विकेट और दो कैच भी लिए, और उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया।
वह पारी जिसे किसी ने नहीं फ़िल्माया
उसकी कोई फ़ुटेज नहीं है। आईसीसी के मुताबिक़ मैच का टेलीविज़न प्रसारण नहीं हुआ, इसलिए नेविल ग्राउंड पर मौजूद लोगों ने ही उसे देखा। आम तौर पर इसकी वजह बीबीसी की हड़ताल बताई जाती है, लेकिन स्क्रॉल ने अपने ही लेख से यह दावा हटा दिया और कहा कि इसका “कोई साफ़ सबूत नहीं” है। स्क्रॉल का ब्योरा है कि उस दिन बीबीसी के पास चार मैच और दो चैनल थे, और उसने इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज को चुना।
जिन्होंने देखा, वे विवरण छोड़ गए। क्रिकइन्फ़ो में उद्धृत द ऑब्ज़र्वर के जॉन पार्कर ने लिखा कि कपिल ने “कोई मौक़ा नहीं दिया और सचमुच 140 के काफ़ी आगे निकलने तक एक भी गेंद ग़लत नहीं खेली।” हॉटन ने स्क्रॉल से कहा कि कपिल ने “एक भी गेंद ग़लत नहीं खेली।” क्रिकइन्फ़ो के अभिलेख की रिपोर्ट के मुताबिक़ एक कठिन मौक़ा ज़रूर बना था, बाउंड्री पर ग्रांट पैटरसन के पास, जब कपिल नब्बे के दशक में थे। स्क्रॉल के मुताबिक़ गावस्कर का फ़ैसला था: “यह मेरे देखे वनडे का सबसे अच्छा शतक है, और मैंने कुछ देखे हैं।” कपिल को दी गई विज़डन की श्रद्धांजलि दर्ज करती है कि वे इसे “ज़िंदगी भर की पारी” कहते थे।
सेमीफ़ाइनल, फिर लॉर्ड्स
इसके बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया, 247 रन बनाकर और उसे 129 पर आउट करके, आईसीसी के अनुसार। सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड ने 213 रन बनाए और भारत पाँच से ज़्यादा ओवर बाक़ी रहते जीत गया, जिसमें यशपाल शर्मा और पाटिल के अर्धशतक थे। अमरनाथ ने 46 रन बनाए, डेविड गावर और माइक गैटिंग समेत कई विकेट लिए, और प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे।
लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण चुना, और विज़डन की रिपोर्ट कहती है कि पिच से सीम मूवमेंट मिल रहा था, जिसका फ़ायदा भारतीय मध्यम गति के गेंदबाज़ों ने उठाया। गावस्कर एंडी रॉबर्ट्स की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच होकर 2 पर आउट हुए। श्रीकांत ने 38, अमरनाथ ने 80 गेंदों में 26, पाटिल ने 27 और मदन लाल ने 17 रन बनाए, और भारत 54.4 ओवर में 183 पर आउट हो गया। रॉबर्ट्स ने 32 रन देकर 3 विकेट लिए। कपिल ने अपनी टीम से कहा, आईसीसी के अनुसार: “अगर यह जीत का स्कोर नहीं है, तो यह लड़ने लायक़ स्कोर तो ज़रूर है।”
बलविंदर संधू ने गॉर्डन ग्रीनिज को 1 रन पर बोल्ड किया। फिर विव रिचर्ड्स ने 28 गेंदों में सात चौकों के साथ 33 रन बनाए, इससे पहले कि मदन लाल की गेंद पर हुक ग़लत लग गया और कपिल ने कंधे के ऊपर से कैच पकड़ लिया। वेस्टइंडीज का स्कोर 66 पर 5 विकेट और 76 पर 6 विकेट हो गया। जेफ़ डूजॉन और मैल्कम मार्शल ने सातवें विकेट के लिए 43 रन जोड़े, जब तक अमरनाथ ने डूजॉन को बोल्ड नहीं कर दिया, और अमरनाथ सात ओवर में 12 रन देकर 3 विकेट के साथ ख़त्म हुए, स्कोरकार्ड दिखाता है। मदन लाल ने 31 रन देकर 3 विकेट, संधू ने 32 रन देकर 2, बिन्नी ने 23 रन देकर 1 और कपिल ने 21 रन देकर 1 विकेट लिया।
विज़डन के अनुसार दर्शकों की संख्या 24,609 थी, जिसमें सदस्य भी शामिल थे। उसने नतीजे को “जितना चौंकाने वाला, उतना ही उस दिन निर्णायक” कहा। वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने बाद में कहा कि उनकी टीम ने छोटे लक्ष्य को “बेफ़िक्री के भाव से” लिया और भारत “शायद मानसिक रूप से ज़्यादा मज़बूत था,” टोनी कोज़ियर ने बताया।
14 खिलाड़ी और मैनेजर
द वीक में छपी टीम की तस्वीर टीम के नाम बताती है: कपिल देव (कप्तान), मोहिंदर अमरनाथ (उप-कप्तान), सुनील गावस्कर, कृष श्रीकांत, संदीप पाटिल, यशपाल शर्मा, रोजर बिन्नी, रवि शास्त्री, मदन लाल, सैयद किरमानी, बलविंदर संधू, कीर्ति आज़ाद, दिलीप वेंगसरकर और सुनील वाल्सन। पी. आर. मान सिंह मैनेजर थे। फ़ाइनल का स्कोरकार्ड चौदह में से ग्यारह के नाम दर्ज करता है। शास्त्री, वेंगसरकर और वाल्सन उसमें नहीं हैं।
उसके बाद क्या बदला
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पास टीम को इनाम देने के लिए बहुत कम पैसा था। पीटीआई के अनुसार बोर्ड के अध्यक्ष एन. के. पी. साल्वे राज सिंह डूंगरपुर के पास गए, जिन्होंने लता मंगेशकर से दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक मुफ़्त कॉन्सर्ट में गाने को कहा। उससे इतना पैसा जुटा कि 14 सदस्यों में से हर एक को 1 लाख रुपये (1,00,000 रुपये) दिए जा सके। वाल्सन ने कहा कि दौरे की रक़म और दैनिक भत्ते से खिलाड़ियों की बचत उस महीने मुश्किल से 60,000 रुपये बनती थी, और उन्होंने इस भुगतान को “उन दिनों की बहुत अच्छी रक़म” बताया।
मेनन ने लिखा कि वनडे का प्रारूप क़रीब एक दशक से चल रहा था और भारत ने उसमें सिर्फ़ 40 अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच खेले थे, और कि “एकदिवसीय क्रिकेट रद्दी की थाली से शहंशाह की दावत बन गया।” रंगीन टेलीविज़न एक साल पहले दिल्ली के एशियाई खेलों के साथ भारत आ चुका था। सरदेसाई ने लिखा कि इस जीत ने भारतीय क्रिकेटर की व्यावसायिक क़ीमत बदल दी, और कि क्रिकेट 1983 में “आज़ाद” हुआ जबकि अर्थव्यवस्था 1991 में ही उदार हुई, उस साल का ज़िक्र tuput के 1991 के सुधारों के ब्योरे में है।
आईसीसी कहती है कि कपिल के ट्रॉफ़ी उठाने से राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर समेत एक पूरी पीढ़ी को प्रेरणा मिली, और मेनन उस समय दस साल के द्रविड़ को उद्धृत करते हैं: “उस जीत ने बहुत से छोटे बच्चों को खेल की ओर खींचा।” फ़ाइनल के बाद लॉयड ने कहा, आईसीसी दर्ज करती है: “भारतीय क्रिकेट आ गया है। और यहीं रहने वाला है।” वेस्टइंडीज 1983 के अंत में भारत आई और छह टेस्ट की शृंखला 3-0 से और पाँचों एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच जीते, कोज़ियर ने लिखा।
इस टूर्नामेंट पर फ़िल्म भी बनी है। कबीर खान की 2021 की फ़िल्म 83 में रणवीर सिंह ने कपिल की भूमिका निभाई है। इससे पहले की एक क्रिकेट फ़िल्म, 2001 में ऑस्कर के लिए नामित लगान, tuput के एक अलग लेख में है।
सम्मान, 2011 का ख़िताब और महिलाओं का फ़ाइनल
हरियाणा के कपिल देव निखंज का नाम 26 जनवरी 1982 को घोषित पुरस्कारों के लिए भारत के राजपत्र में पद्म श्री के अंतर्गत दर्ज है, और 26 जनवरी 1991 को घोषित पुरस्कारों के राजपत्र में पद्म भूषण पाने वाले (क्रिकेट, चंडीगढ़, हरियाणा) के रूप में। आईसीसी का हॉल ऑफ़ फ़ेम पन्ना उनका टेस्ट करियर 131 टेस्ट, 5,248 रन और 434 विकेट का बताता है, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड था, और कहता है कि उन्हें 2010 में शामिल किया गया।
भारत ने 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दूसरी बार विश्व कप जीता। श्रीलंका ने 6 विकेट पर 274 रन बनाए, और भारत ने 48.2 ओवर में 4 विकेट पर 277 रन बनाकर लक्ष्य पा लिया, जिसमें गौतम गंभीर ने 97 और एम एस धोनी ने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए, स्कोरकार्ड दिखाता है। बीसीसीआई की मैच रिपोर्ट इसे भारत का दूसरा ख़िताब कहती है, जो पहले के 28 साल बाद आया।
1 नवंबर 2025 को ESPNcricinfo की श्रुति रविंद्रनाथ ने महिलाओं के फ़ाइनल की तुलना 1983 से की और 25 जून 1983 की जीत को एक राष्ट्रीय जुनून का “उत्प्रेरक” कहा। भारत की महिलाओं ने अगले दिन, 2 नवंबर 2025 को, दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ वह फ़ाइनल 52 रन से जीता, जैसा tuput का विश्व कप में भारत की महिलाओं वाला ब्योरा बताता है।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- ESPNcricinfo: Full scorecard, India v West Indies, Final, Prudential World Cup, Lord's, 25 June 1983
- ESPNcricinfo: Full scorecard, India v Zimbabwe, 20th Match, Prudential World Cup, Tunbridge Wells, 18 June 1983
- Wisden Cricketers' Almanack 1984: 1983 World Cup final, India v West Indies (almanack report)
- ICC: 1983, cricket's greatest underdog story scripted by Kapil's Devils (24 December 2021)
- ESPNcricinfo, Sambit Bal: Kapil bedevils Zimbabwe (3 November 2014)
- Cricinfo archive: Zimbabwe v India, 5th match, World Cup 1983, match report
- Scroll.in: Pause, rewind, play, why Kapil Dev's 175 has achieved mythical proportions (18 June 2020, updated 6 January 2021)
- ESPNcricinfo, Suresh Menon: 1983, the year everything changed (25 June 2008)
- ESPNcricinfo, Rajdeep Sardesai: Being at the 1983 World Cup final (7 February 2015)
- ESPNcricinfo, Tony Cozier: Joel Garner, 1983 World Cup was the biggest disappointment of my career (29 January 2015)
- The Tribune (PTI): Lata ji and her love for cricket, when the nightingale of India rescued BCCI after the 1983 win (6 February 2022)
- The Week (PTI): When Kapil didn't want Madan to bowl at Viv (28 September 2017), team photograph caption naming the squad and manager
- Gazette of India Extraordinary, 20 March 1982: Padma awards announced 26 January 1982 (Padma Shri list)
- Gazette of India Extraordinary, 23 March 1991: Padma awards announced 26 January 1991 (Padma Bhushan list)
- ICC Hall of Fame: Kapil Dev
- BCCI: Match report, India v Sri Lanka, 2011 World Cup final
- ESPNcricinfo: Full scorecard, Sri Lanka v India, Final, ICC Cricket World Cup, Mumbai, 2 April 2011
- ESPNcricinfo, Sruthi Ravindranath: Indian women's cricket on the cusp of its 1983 moment (1 November 2025)
परदे पर और किताबों में
- 83 (2021) , निर्देशक Kabir Khan . रणवीर सिंह ने कपिल देव की भूमिका निभाई है; स्क्रॉल का एक समीक्षक लिखता है कि कुछ दृश्य गढ़े हुए हैं
यह सूची उन पाठकों के लिए है जो परदे पर देखी कहानी के पीछे का इतिहास ढूँढ़ रहे हैं। कोई फ़िल्म या नाट्य रूपांतरण स्रोत नहीं होता, और tuput का इनमें से किसी भी कृति से कोई संबंध नहीं है।
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