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स्पीति घाटी में 996 में बना ताबो मठ, 4,116 मीटर पर की मठ और 15,256 फ़ुट पर टाशीगंग का मतदान केंद्र है, जहाँ 2022 में सभी 52 मतदाताओं ने वोट डाला
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स्पीति घाटी में 996 में बना ताबो मठ, 4,116 मीटर पर की मठ और 15,256 फ़ुट पर टाशीगंग का मतदान केंद्र है, जहाँ 2022 में सभी 52 मतदाताओं ने वोट डाला

चित्रण: tuput

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स्पीति का ताबो मठ 996 का है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षित स्मारकों की सूची में है। की मठ 4,116 मीटर पर खड़ा है, और चुनाव आयोग के 1 जून 2024 के नोट में टाशीगंग मतदान केंद्र को सबसे ऊँचा बताया गया है। 3 अक्टूबर 2020 को खुली अटल सुरंग लाहौल की सड़क को सालभर खुला रखती है।

· · 9 मिनट का पठन

स्पीति में काज़ा के ऊपर बसे गाँव टाशीगंग में वह मतदान केंद्र है जिसे चुनाव आयोग का 1 जून 2024 का नोट “सबसे ऊँचा मतदान केंद्र” बताता है। द ट्रिब्यून और पीटीआई इसकी ऊँचाई 15,256 फ़ुट बताते हैं, और ट्रिब्यून ने 12 नवंबर 2022 को रिपोर्ट किया कि उसकी सूची के सभी 52 मतदाताओं ने उस साल के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में वोट डाला। इसके आसपास की घाटी में 996 में स्थापित ताबो मठ और की मठ (Key Monastery) भी हैं, और सितंबर 2025 से एक शीत मरुस्थल आरक्षित क्षेत्र भी, जिसे यूनेस्को ने अपने जैव मंडल नेटवर्क में जोड़ा है।

4,270 मीटर की घाटी तल वाला शीत मरुस्थल

ज़िला प्रशासन की वेबसाइट स्पीति के घाटी तल की औसत ऊँचाई 4,270 मीटर (14,010 फ़ुट) और सालाना बारिश 170 मिलीमीटर बताती है। स्पीति लाहौल और स्पीति ज़िले का पूर्वी हिस्सा है, जो 1960 में दो अलग ज़िलों से बना था, और काज़ा उसका उप-मंडल मुख्यालय है। हिमाचल पर्यटन के अनुसार काज़ा 3,660 मीटर पर है। लाहौल से आने वाली आम सड़क 4,551 मीटर ऊँचे कुंज़ुम दर्रे को पार करती है, और स्पीति नदी घाटी छोड़कर किन्नौर में सतलुज से मिलती है। यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत की प्रविष्टि स्पीति में 113 गाँव गिनती है, 81 स्थायी और 32 अस्थायी।

इसके आसपास के राज्य का अपना परिचय हमारी हिमाचल प्रदेश गाइड में है। हिमाचल पर्यटन के अनुसार अप्रैल से अक्टूबर घूमने का अच्छा समय है, और वह जोड़ता है कि सर्दियों में कुछ जगहों पर तापमान लगभग शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे जा सकता है।

काज़ा से 12 किलोमीटर दूर की मठ

हिमाचल पर्यटन के अनुसार की (जिसकी वर्तनी Kee, Ki और Kye भी लिखी जाती है) की स्थापना द्रोमतोन ने की, जो 1008 से 1064 तक जिए, और यह स्पीति का सबसे बड़ा और सबसे पुराने मठों में से एक है। यह ज्वालामुखी के आकार की एक पहाड़ी पर 4,116 मीटर पर खड़ा है, जिसे ज़िला प्रशासन लगभग 13,500 फ़ुट बताता है। प्रोतिब्बत, जो 2008 से मठ में काम कर रही एक संस्था है, कहती है कि इसकी जड़ें संभवतः 11वीं सदी में हैं।

हिमाचल पर्यटन के अनुसार भीतर एक बड़ा सभा कक्ष है जिसकी दीवारें धार्मिक चित्रों से सजी हैं, साथ में दुर्लभ थंका (चित्रित पट), पुराने तुरही, झाँझ और ढोल हैं, और तिब्बती बौद्ध ग्रंथों में से एक तंग्यूर की पांडुलिपियों का पुस्तकालय है। हिमाचल पर्यटन यहाँ 300 से ज़्यादा निवासी लामा गिनता है। ज़िले का पन्ना भित्तिचित्र, गचकारी की मूर्तियाँ और हथियारों का एक संग्रह जोड़ता है, और कहता है कि गर्मियों में जब नक़ाबपोश छम नृत्य होता है तो वायु वाद्य वाद्यवृंद में शामिल हो जाते हैं।

ज़िला प्रशासन कहता है कि स्पीति के ज़्यादातर बौद्ध गेलुग-पा संप्रदाय को मानते हैं, और हिमाचलस्टोरी की गाइड की को गेलुग मठ बताती है। प्रोतिब्बत के अनुसार 1975 के एक भूकंप ने मठ को नुक़सान पहुँचाया और भारत सरकार की मदद से उसकी मरम्मत हुई। ज़िले के पन्ने के मुताबिक़ उसी भूकंप से हिक्किम के पास का पुराना तंग्युद मठ गिर गया, और गाँव वालों ने उसे कोमिक के पास एक नई जगह पर दोबारा बनाया। हिमाचल पर्यटन के अनुसार की में कुछ बुनियादी ठहरने की व्यवस्था है।

ताबो, 996 में स्थापित

हिमाचल पर्यटन और ज़िला प्रशासन दोनों कहते हैं कि ताबो की स्थापना 996 में हुई। ज़िले का पन्ना इसका श्रेय उस अनुवादक और शिक्षक को देता है जिसका वह रिंचेनसांग पो नाम बताता है। यह हिमाचल पर्यटन के आँकड़े से स्पीति नदी के बाएँ किनारे पर 3,050 मीटर पर है, और सरकारी पन्ने के हिसाब से काज़ा से लगभग 46 से 50 किलोमीटर दूर। यह स्पीति का सबसे बड़ा मठ परिसर है, जिसमें नौ मंदिर, 23 चोर्टेन (बौद्ध अवशेष रखने वाले स्मारक), भिक्षुओं का एक कक्ष, भिक्षुणियों का एक कक्ष और ऊपर चट्टान में गुफाएँ हैं जहाँ भिक्षु रहते थे।

ज़िला प्रशासन कहता है कि इसके भित्तिचित्र और गचकारी की मूर्तियाँ अजंता की गुफाओं जैसी हैं, इसीलिए ताबो को “हिमालय का अजंता” कहा जाता है। यूनेस्को का वही पाठ कहता है कि ताबो दसवीं सदी का है और अपने कील खोर मंदिर में फीके पड़ चुके मंडल (दीवार पर चित्रित अनुष्ठान आरेख) सँजोए हुए है। गोम्पा तिब्बती बौद्ध मठ को कहते हैं। हज़ार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दलाई लामा ने 1996 में ताबो में कालचक्र समारोह किया, हिमाचल पर्यटन के अनुसार।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में ताबो की दो प्रविष्टियाँ हैं, लाहौल और स्पीति ज़िले में उसके शिमला मंडल के अंतर्गत: एक बौद्ध मठ और उससे लगी ज़मीन, और फू गुंफा बौद्ध मठ। अप्रैल 2015 में भारत ने यूनेस्को को एक अस्थायी सूची प्रविष्टि भेजी, भारत का शीत मरुस्थल सांस्कृतिक भूदृश्य, जो स्पीति, लद्दाख के कुछ हिस्सों और किन्नौर के एक हिस्से को कवर करती है और धनकर, की और ताबो को अपने अहम गोम्पाओं में गिनाती है। अस्थायी सूची की प्रविष्टि विश्व धरोहर सूची में शिलालेखन नहीं है।

धनकर, टीले पर पुरानी राजधानी

ज़िले का पन्ना कहता है कि धनकर का क़िला स्पीति की आधिकारिक राजधानी है, जो एक ऐसे टीले पर बना है जो खड़ी चट्टान पर ख़त्म होता है, शिचलिंग के पास काज़ा से 32 किलोमीटर नीचे की ओर। इसकी स्थिति से स्पीति के लोग हमलों के लिए आने वाले रास्तों पर नज़र रख सकते थे। धनकर का मतलब स्थानीय भाषा में क़िला है, और हिमाचल पर्यटन के अनुसार मठ नोनो, घाटी के वंशानुगत शासक, के महल का काम करता था, और वह वैरोचन की एक मूर्ति को इसकी प्रमुख मूर्ति बताता है। यूनेस्को की प्रविष्टि वहाँ लगभग 100 लामा गिनती है और वैरोचन को पीठ से पीठ सटाकर बैठी चार आकृतियों के रूप में बताती है। धनकर शिचलिंग से 7 किलोमीटर की शाखा सड़क से पहुँचा जाता है, और हिमाचल पर्यटन सिर्फ़ होम स्टे और बुनियादी मठ आवास गिनाता है।

टाशीगंग, 15,256 फ़ुट पर मतदान केंद्र

चुनाव आयोग का 1 जून 2024 का नोट, जो लोकसभा चुनाव के सातवें और आख़िरी चरण के बंद होने पर जारी हुआ, एक तस्वीर के साथ आता है जिसका शीर्षक है “सबसे ऊँचे मतदान केंद्र, टाशीगंग, हिमाचल प्रदेश पर मतदाता”। द ट्रिब्यून और पीटीआई ऊँचाई 15,256 फ़ुट बताते हैं, और पीटीआई ने बूथ पर लगा एक बोर्ड देखा जिस पर 4,650 मीटर लिखा था। पीटीआई कहता है कि स्पीति मंडी लोकसभा सीट का हिस्सा है।

पीटीआई ने लिखा कि 2024 टाशीगंग में हुआ चौथा चुनाव था। ट्रिब्यून कहता है कि 2019 से पहले सबसे ऊँचा केंद्र हिक्किम में था, जो लाहौल और स्पीति ज़िले में ही है, और टाशीगंग 2019 में मतदान केंद्र बना। उसने उस साल 45 मतदाता गिने (27 पुरुष और 18 महिलाएँ), 2021 के मंडी उपचुनाव में 48 और 2022 के विधानसभा चुनाव में 52 (30 पुरुष और 22 महिलाएँ)। 12 नवंबर 2022 को सभी 52 ने वोट डाला। बूथ को आदर्श मतदान केंद्र बनाया गया था, ताकि बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के लिए वोट डालना आसान हो, और मतदाताओं का स्वागत स्थानीय रीति और सामुदायिक भोज से किया गया। पीटीआई ने 2024 की सूची में टाशीगंग और गेते के 62 मतदाता बताए, हालाँकि ट्रिब्यून की अप्रैल 2024 की रिपोर्ट में अब भी 52 थे, इसलिए आँकड़ा इस पर निर्भर करता है कि सूची कब पढ़ी गई।

पीटीआई ने रिपोर्ट किया कि मतदान दल काज़ा से लगभग डेढ़ घंटे का सफ़र करता है, और उसे बूथ पर मोबाइल सिग्नल नहीं मिला। निवासी तंज़िन टकपा ने पीटीआई को बताया कि टाशीगंग में कोई अस्पताल, क्लिनिक, स्कूल या बाज़ार नहीं है, और काज़ा तक की लगभग 30 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क छह महीने बर्फ़ से बंद रहती है। चुनाव के पीछे की मशीनरी की चर्चा चुनाव आयोग, ईवीएम और आदर्श आचार संहिता वाली हमारी गाइड में है।

शीत मरुस्थल आरक्षित क्षेत्र और हिम तेंदुआ

पर्यावरण मंत्रालय ने 27 सितंबर 2025 को कहा कि शीत मरुस्थल जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र को यूनेस्को के जैव मंडल आरक्षित क्षेत्रों के विश्व नेटवर्क में शामिल कर लिया गया है, जिससे भारत के पास 13 हो गए। यूनेस्को का पन्ना इसका क्षेत्रफल 7,77,000 हेक्टेयर (7,770 वर्ग किलोमीटर) बताता है, 3,300 से 6,600 मीटर की ऊँचाइयों पर। वह 732 संवहनी पादप प्रजातियाँ दर्ज करता है, जिनमें 30 भारतीय हिमालय की स्थानिक हैं, और 12,457 लोग। इसमें पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान और किब्बर तथा चंद्रताल वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। भारत की अस्थायी सूची का पाठ कहता है कि शीत मरुस्थल को 2009 में जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।

हिमाचल पर्यटन कहता है कि किब्बर अभयारण्य किब्बर गाँव, जो 4,205 मीटर पर है, के आगे 1,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है और नीली भेड़, आइबेक्स और हिम तेंदुओं को शरण देता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान का पहला राष्ट्रीय हिम तेंदुआ आकलन, जो 30 जनवरी 2024 को जारी हुआ, भारत में 718 जानवरों का अनुमान देता है, जो 2019 से 2023 के सर्वेक्षणों पर आधारित है जिनमें कैमरा ट्रैप ने 241 अलग-अलग तेंदुओं की तस्वीरें खींचीं। उसने हिमाचल प्रदेश को 51 पर रखा। यह आँकड़ा पूरे राज्य का है, अकेले स्पीति का नहीं। कैमरा ट्रैप के अनुमान कैसे काम करते हैं, यह भारत बाघों और शेरों को कैसे गिनता है वाला हमारा लेख समझाता है।

अटल सुरंग और काज़ा की सड़क

अटल सुरंग 3 अक्टूबर 2020 को राष्ट्र को समर्पित हुई। रक्षा मंत्रालय की फ़ैक्टशीट कहती है कि 9.02 किलोमीटर लंबी यह सुरंग मनाली को लाहौल और स्पीति घाटी से सालभर जोड़ती है, जबकि घाटी पहले भारी बर्फ़बारी से हर साल लगभग छह महीने कटी रहती थी, और इसने मनाली से लेह की सड़क 46 किलोमीटर घटा दी। फ़ैक्टशीट जोड़ती है कि ज़िले में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। राज्य के पर्यटन विभाग के आँकड़ों का हवाला देते हुए ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया कि ज़िले में आगमन 2019 के 1,32,983 से बढ़कर 2021 में 9,60,952 हो गया। सुरंग कैसे बनी, यह सुरंग पर हमारे लेख में है।

सुरंग लाहौल में ख़त्म होती है, इसलिए स्पीति का आख़िरी चरण अब भी कुंज़ुम दर्रे से होकर जाता है। हिमाचल पर्यटन के अनुसार केलांग से काज़ा सिर्फ़ जून से अक्टूबर के बीच पहुँचा जा सकता है, जबकि शिमला से किन्नौर होकर सड़क मार्च से नवंबर तक सुरक्षित है। काज़ा में घाटी का इकलौता पेट्रोल पंप है, पन्ना जोड़ता है, और किन्नौर के रास्ते आने वाले विदेशी पर्यटकों को इनर लाइन परमिट चाहिए, जो रेकॉन्ग पियो में मिलता है। हिमाचल पर्यटन की काज़ा से दूरियों की तालिका में की 12 किलोमीटर दूर है, हिक्किम 17 किलोमीटर, किब्बर और कोमिक 18-18 किलोमीटर और ताबो 48 किलोमीटर।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Himachal Pradesh Tourism: Spiti Valley, official destination page
  2. Himachal Pradesh Tourism: Monasteries and the Buddhist Circuit, official page
  3. District Lahaul and Spiti, Government of Himachal Pradesh: home page and district profile
  4. District Lahaul and Spiti: Monasteries in Spiti
  5. District Lahaul and Spiti: Tourist Places in Spiti
  6. UNESCO World Heritage Centre: Cold Desert Cultural Landscape of India, Tentative List entry 6055 (submitted 15 April 2015)
  7. UNESCO Man and the Biosphere Programme: Cold Desert Biosphere Reserve
  8. Press Information Bureau, Ministry of Environment: Cold Desert Biosphere Reserve included in UNESCO's World Network of Biosphere Reserves (27 September 2025)
  9. Press Information Bureau, Ministry of Environment: Status Report of Snow Leopards in India released (30 January 2024)
  10. Ministry of Defence factsheet via PIB: Atal Tunnel, World's Longest Highway Tunnel (24 March 2022)
  11. Press Information Bureau, Election Commission: Polling now completed for 7 phases (1 June 2024)
  12. Archaeological Survey of India: Centrally Protected Monuments/Sites, State-wise and Circle-wise list
  13. The Tribune, 12 November 2022: World's highest polling station in Tashigang records 100 per cent turnout
  14. The Tribune, 20 April 2024: Reconsider decision, participate in elections, Tashigang voters urged
  15. PTI via ETV Bharat, 1 June 2024: Braving Icy Heights, Elections at World's Highest Polling Station
  16. The Tribune, 8 February 2022: Atal Tunnel jacks up tourist inflow to Lahaul-Spiti by 622%
  17. ProTibet: Ki monastery, project page
  18. HimachalStory: Key Monastery

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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