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अटल सुरंग 9.02 किलोमीटर लंबी है, 10,000 फ़ीट पर बनी है, 2005 के अनुमान से तीन गुना से ज़्यादा में पूरी हुई, और उसने लाहौल के छह महीने के सर्दियों वाले अलगाव को ख़त्म कर दिया
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अटल सुरंग 9.02 किलोमीटर लंबी है, 10,000 फ़ीट पर बनी है, 2005 के अनुमान से तीन गुना से ज़्यादा में पूरी हुई, और उसने लाहौल के छह महीने के सर्दियों वाले अलगाव को ख़त्म कर दिया

चित्रण: tuput

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सीमा सड़क संगठन की अटल सुरंग रोहतांग दर्रे के नीचे 9.02 किमी चलती है और 3 अक्टूबर 2020 को खुली। इसने मनाली से लेह की सड़क 46 किमी छोटी कर दी और लगभग छह महीने चलने वाली सर्दियों की बंदी ख़त्म कर दी। अब यातायात उस रोज़ाना मात्रा से कहीं ऊपर चल रहा है जिसके लिए इसे बनाया गया था।

· · 9 मिनट का पठन

अटल सुरंग हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के नीचे 9.02 किमी चलती है, मनाली से 25 किमी दूर दक्षिणी मुहाने से लाहौल घाटी में सिस्सू के पास उत्तरी मुहाने तक। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 3 अक्टूबर 2020 को इसे खोलने से पहले घाटी हर साल लगभग छह महीने बर्फ़ से कटी रहती थी।

इसे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने बनाया, जो रक्षा मंत्रालय की सड़क बनाने वाली शाखा है। मंत्रालय की 2022 की फ़ैक्टशीट इसे मनाली से लेह की सड़क 46 किमी और सफ़र का समय चार से पाँच घंटे घटाने का श्रेय देती है।

रक्षा मंत्रालय की फ़ैक्टशीट इसे क्या बताती है

सुरंग पीर पंजाल पर्वतमाला में लगभग 3,000 मीटर (10,000 फ़ीट) पर है। दक्षिणी मुहाना, यानी वह मुँह जहाँ मनाली की तरफ़ से यातायात भीतर आता है, 3,060 मी पर है। उत्तरी मुहाना 3,071 मी पर है।

यह घोड़े की नाल के आकार की एक ही नली है जिसमें दो लेन हैं, 10.5 मी चौड़ी खुदाई के भीतर 8 मी की सड़क और ऊपर 5.525 मी की ऊँचाई की जगह के साथ। डिज़ाइन के मुताबिक़ यातायात रोज़ाना 3,000 कारें और 1,500 ट्रक का है, अधिकतम 80 किमी/घंटा की रफ़्तार पर।

9 फ़रवरी 2022 को ब्रिटेन के संगठन वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स ने इसे 10,000 फ़ीट से ऊपर की दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग प्रमाणित किया। मंत्रालय की फ़ैक्टशीट नई दिल्ली में हुए समारोह को दर्ज करती है, जहाँ बीआरओ के महानिदेशक ने पुरस्कार लिया।

आग, हवा और बचाव की नली

बिजली और यांत्रिक पैकेज में अर्ध-अनुप्रस्थ वेंटिलेशन, SCADA प्रणाली (कंट्रोल-रूम का वह सॉफ़्टवेयर जो उपकरणों को दूर से चलाता है) से चलने वाला अग्निशमन, रोशनी और निगरानी शामिल हैं। मंत्रालय हर 150 मी पर एक टेलीफ़ोन, हर 60 मी पर एक फ़ायर हाइड्रेंट, हर 250 मी पर घटना की स्वचालित पहचान वाला सीसीटीवी, हर 1 किमी पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी, और हर 25 मी पर निकासी की रोशनी और निकास के संकेत गिनाता है। अग्निरोधी डैम्पर, यानी वे पल्ले जो धुएँ और लपटों को नलिकाओं में फैलने से रोकते हैं, हर 50 मी पर हैं, और दोनों मुहानों पर प्रवेश रोकने वाले अवरोधक बंद हो जाते हैं।

बचाव का रास्ता मुख्य नली में ही बना है। मंत्रालय मुख्य सुरंग के भीतर ही 3.6 मी गुणा 2.25 मी की एक अग्निरोधी निकासी सुरंग का वर्णन करता है। निर्माण संयुक्त उद्यम में भारतीय साझेदार अफ़कॉन्स के सतीश पारेतकर ने दिसंबर 2020 में इंडियन इन्फ़्रास्ट्रक्चर पत्रिका को बताया कि यह पहली भारतीय सुरंग है जिसकी निकासी सुरंग मुख्य सुरंग के बग़ल में नहीं, उसके भीतर है। पत्रिका 18 द्वार बताती है, हर 500 मी पर एक, और हर 2.2 किमी पर गाड़ी मोड़ने की एक गुफा।

जून 2000 का फ़ैसला और 2017 की कामयाबी

रक्षा मंत्रालय रोहतांग के नीचे रणनीतिक सुरंग बनाने के फ़ैसले की तारीख़ 3 जून 2000 बताता है, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। दक्षिणी मुहाने तक की पहुँच सड़क का शिलान्यास 26 मई 2002 को हुआ।

बाक़ी ब्योरा इंडियन इन्फ़्रास्ट्रक्चर भरता है। वह कहती है कि बीआरओ को यह काम 6 मई 2002 को सौंपा गया, कि डिज़ाइन का ठेका मई 2007 में ऑस्ट्रेलिया की SMEC को गया और तब पूरा होने की तारीख़ 2014 तय की गई, और कि निर्माण का ठेका सितंबर 2009 में, सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति से परियोजना मंज़ूर होने के बाद, अफ़कॉन्स और ऑस्ट्रिया की स्ट्राबैग के संयुक्त उद्यम को मिला। पहला धमाका 2010 में हुआ। पत्रिका यह भी कहती है कि परियोजना की कल्पना 1983 में की गई थी, एक तारीख़ जिसे सरकार की अपनी विज्ञप्तियाँ इस्तेमाल नहीं करतीं। स्ट्राबैग का परियोजना पन्ना बीआरओ को ग्राहक, निर्माण अवधि 2009 से 2020 और अनुबंध मूल्य 348 मिलियन यूरो बताता है।

खुदाई न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड के तहत ड्रिल-और-ब्लास्ट से हुई, जो सुरंग के आगे बढ़ने के साथ चट्टान को सहारा देने का तरीक़ा है। रोहतांग सर्दियों में बंद हो जाता है, इसलिए हर साल कुछ समय तक उत्तरी छोर तक पहुँचा नहीं जा सकता था। इंडियन इन्फ़्रास्ट्रक्चर बताती है कि लगभग चौथाई खुदाई उत्तर से और तीन चौथाई दक्षिण से हुई। दोनों छोर 15 अक्टूबर 2017 को मिले।

सबसे बुरी ज़मीन दक्षिणी मुहाने के पास 587 मी की सेरी नाला भ्रंश पट्टी थी। पारेतकर ने कुचली चट्टान का वर्णन किया जिसमें पानी 8,000 लीटर प्रति मिनट तक की रफ़्तार से भर रहा था, बार-बार धँसाव हुए, और पार होने में लगभग चार साल लगे। 14 जनवरी 2026 का पीआईबी बैकग्राउंडर जोड़ता है कि सर्दियों में बाहर तापमान शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गया जबकि सुरंग के भीतर कभी-कभी 45 डिग्री तक पहुँचा, और सेरी नाला से रिसाव ने एक बार सुरंग में पानी भर दिया। मंत्रिमंडल ने 24 दिसंबर 2019 को रोहतांग सुरंग का नाम वाजपेयी के नाम पर रखा।

बिल, चार आँकड़ों में

इंडियन इन्फ़्रास्ट्रक्चर अनुमान क्रम से देती है: 2000 में ₹500 करोड़, 2005 में ₹950 करोड़, और 2009 के ठेके के समय ₹1,458 करोड़ का अनुबंध मूल्य। वह अंतिम लागत ₹3,200 करोड़ और ₹3,500 करोड़ के बीच बताती है।

मोदी के उद्घाटन भाषण ने इन्हीं में से दो आँकड़े इस्तेमाल किए। उन्होंने कहा कि 2005 का आकलन लगभग ₹950 करोड़ था और देरी के कारण सुरंग ₹3,200 करोड़ से ज़्यादा (₹32 अरब) में पूरी हुई, यानी तीन गुना से ज़्यादा।

भाषण ने देरी की ज़िम्मेदारी भी तय की। मोदी ने कहा कि वाजपेयी सरकार के सत्ता से जाने के बाद काम ठप हो गया और 2013 से 2014 तक सुरंग का सिर्फ़ 1,300 मी बना था। 18 मई 2024 को कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह ने लाहौल की एक रैली में कहा कि तब राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 28 जून 2010 को सुरंग की आधारशिला रखी, कि मनमोहन सिंह की सरकार ने बजट दिया, और कि 2014 तक 75 प्रतिशत काम हो चुका था। दोनों बयान अलग-अलग चीज़ें नापते हैं, और यहाँ देखी गई कवरेज में किसी के साथ कोई प्रगति रिपोर्ट नहीं थी।

निर्माण के दौरान मौतें

न रक्षा मंत्रालय की फ़ैक्टशीट और न पीआईबी की विज्ञप्तियाँ निर्माण के दौरान हुई मौतों का कुल देती हैं, और इस लेख को कोई सरकारी गिनती नहीं मिली। प्रेस रिपोर्टों में तीन घटनाएँ दर्ज हैं।

अगस्त 2003 में मनाली से 15 किमी दूर कंगनी नाले पर बादल फटने से सुरंग तक की सड़क बना रहे मज़दूरों के शिविर प्रभावित हुए। द ट्रिब्यून की पहली रिपोर्ट के अनुसार 26 शव बरामद हुए थे और 34 लोग लापता थे। मार्च 2011 में एक हिमस्खलन में स्ट्राबैग-अफ़कॉन्स संयुक्त उद्यम के दो कर्मचारी, एक ड्राइवर और एक सुपरवाइज़र, मारे गए जब जमी हुई बर्फ़ उनके वाहन पर आ गिरी; मनाली के डीएसपी ने पीटीआई को बताया कि कंपनी के ख़िलाफ़ धारा 304(ए), यानी लापरवाही से मौत का कारण बनने, के तहत मामला दर्ज किया गया है। जुलाई 2011 में दक्षिणी मुहाने की पहुँच सड़क पर फिंगरी नाले पर बादल फटने से मज़दूरों के शिविर बह गए। वे 120 मी की स्नो गैलरी बना रहे थे, और द ट्रिब्यून की पहली रिपोर्ट के अनुसार आठ लोग बह गए, जिनमें से दो के शव मिले और छह लापता थे।

लाहौल के लिए क्या बदला

रक्षा मंत्रालय की फ़ैक्टशीट कहती है कि लद्दाख में आने के दो रास्ते हैं: कश्मीर से कारगिल होकर, और हिमाचल से रोहतांग के ऊपर से। रोहतांग के लगभग छह महीने बंद रहने से सर्दियों में अकेला रास्ता कश्मीर से होकर था। 1999 की कारगिल लड़ाई उसी कश्मीर वाली सड़क के ऊपर की ऊँचाइयों पर हुई थी। घाटी में अब रेलगाड़ियाँ उस लाइन पर चलती हैं जिसका वर्णन कश्मीर की रेल में है और जो चिनाब पुल को पार करती है।

फ़ैक्टशीट यह भी कहती है कि सुरंग सुरक्षा बलों को नियमित आपूर्ति और गश्त में मदद करेगी। मोदी ने उद्घाटन में कहा कि इससे मनाली से केलांग का सफ़र तीन से चार घंटे घट जाएगा।

पर्यटकों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। द ट्रिब्यून ने 8 जनवरी 2021 को लिखा कि महामारी वाले साल 2020 में एक लाख से कम पर्यटक लाहौल और स्पीति पहुँचे थे, और 27 दिसंबर 2020 को 5,450 वाहन सुरंग से गुज़रे। 27 दिसंबर 2023 को उसने ज़िले के पुलिस अधीक्षक मयंक चौधरी के हवाले से कहा कि उस साल अब तक 29.18 लाख पर्यटक सुरंग से आए, जबकि पिछले साल 26 लाख आए थे।

वाहनों की पुलिस गिनतियाँ, जैसा प्रेस ने रिपोर्ट किया, इस तरह हैं:

  • 2021: 7,99,941 वाहन, दोनों दिशाओं में।
  • 2022: 12,73,699 वाहन, 26 दिसंबर 2022 को एक दिन का रिकॉर्ड 19,383 और 16 दिन 10,000 से ऊपर।
  • 2023: 12,41,150 वाहन, ईटीवी भारत के हवाले से पुलिस सूत्रों के अनुसार।
  • 2025: 16,40,719 वाहन, उसी ईटीवी भारत रिपोर्ट से, जो जनवरी से मई 2026 के बीच 7,82,976 और जोड़ती है।

डिज़ाइन यातायात 4,500 वाहन प्रतिदिन है, इसलिए 2022 का रिकॉर्ड दिन उसके चार गुना से ज़्यादा था। 22 मई 2026 को द ट्रिब्यून ने लिखा कि लाहौल और स्पीति के उपायुक्त किरण भड़ाना ने कुल्लू में अपने समकक्ष अनुराग चंदर को ब्योरेवार सुरक्षा ऑडिट माँगते हुए लिखा था। चंदर ने कहा कि ऑडिट विचाराधीन है, और अख़बार के सूत्रों ने कहा कि बताया जाता है कि लंबे समय से कोई पूरा सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ। 9 जून 2026 को ईटीवी भारत ने लिखा कि लाहौल-स्पीति और कुल्लू प्रशासन बीआरओ के साथ रोज़ाना सीमा का मसौदा बना रहे हैं, और भड़ाना को “उमड़ते वाहन यातायात” का वर्णन करते हुए उद्धृत किया।

बर्फ़, हिमस्खलन और उत्तरी मुहाना

सुरंग खुली रहती है, पर हर छोर की सड़कें हमेशा नहीं। निर्माण के दौरान पारेतकर ने मुहानों के आसपास 20 से ज़्यादा हिमस्खलन क्षेत्र गिने, और स्ट्राबैग हिमस्खलन और मानसूनी भूस्खलन को परियोजना के ख़तरों में गिनाती है। 3 फ़रवरी 2026 को उत्तरी मुहाने की स्नो गैलरी के पास एक हिमस्खलन आया और राष्ट्रीय राजमार्ग 3 बंद हो गया, बीआरओ ने कहा।

सुरंग के आगे, मनाली-लेह राजमार्ग सर्दियों में अब भी बंद होता है। द ट्रिब्यून ने अप्रैल 2023 में, बीआरओ के महानिदेशक के निरीक्षण दौरे के दौरान, लिखा कि भारी बर्फ़ के कारण वह बारालाचा ला के पास वाहनों के लिए बंद हो जाता है।

ज़ोजिला और शिंकू ला

दो और सुरंगें लद्दाख की दूसरी सड़कों पर इसी समस्या को निशाना बनाती हैं। ज़ोजिला सुरंग कश्मीर की तरफ़ राष्ट्रीय राजमार्ग 1 पर बालटाल और मिनामार्ग के बीच है। पीआईबी के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 9 जून 2026 को मिनामार्ग पर उसकी मुख्य सुरंग की सफलता (ब्रेकथ्रू) के गवाह बने। विज्ञप्ति लगभग 14 किमी की द्वि-दिशा सुरंग का वर्णन करती है, जिसकी लागत लगभग ₹6,800 करोड़ है, 2,900 मी से 3,310 मी की ऊँचाई पर, और कहती है कि यह सोनमर्ग से मिनामार्ग का सफ़र लगभग दो घंटे से घटाकर क़रीब 30 मिनट कर देगी। पीआईबी का जनवरी 2026 का बैकग्राउंडर इसका पूरा होना 2028 रखता है।

शिंकू ला हिमाचल की तरफ़ है, निम्मू से पदुम से दारचा सड़क पर लगभग 15,800 फ़ीट पर 4.1 किमी की दो नलियों वाली सुरंग। बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार मोदी ने 26 जुलाई 2024 को इसके निर्माण की शुरुआत की। बीआरओ इसे ₹1,681 करोड़ में बना रहा है, जिसे सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति ने फ़रवरी 2023 में मंज़ूरी दी। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कहा कि काम में दो साल लगने का अनुमान है, और यहाँ देखी गई रिपोर्टों में खुलने की कोई तारीख़ नहीं है। बीआरओ के महानिदेशक ने अप्रैल 2023 में कहा कि यह ज़ांस्कर घाटी के 36 गाँवों को लाहौल घाटी के 136 गाँवों से जोड़ेगी।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Ministry of Defence factsheet via PIB: Atal Tunnel, World's Longest Highway Tunnel, 24 March 2022
  2. PIB: English rendering of PM's address at the inauguration of Atal Tunnel, 3 October 2020
  3. PIB backgrounder: India's Tunnels, Engineering Marvels Beneath the Surface, 14 January 2026
  4. PIB: Historic Breakthrough Achieved at Zojila Tunnel Project, 9 June 2026
  5. STRABAG International: Rohtang (Atal) Highway Tunnel, project page
  6. Indian Infrastructure: At the Zenith, Much-awaited Rohtang tunnel inaugurated, 31 December 2020
  7. The Tribune: 12L vehicles crossed Atal Tunnel last year, 6 January 2023
  8. The Tribune: Record 29L tourists visit Lahaul this year, 27 December 2023
  9. ETV Bharat: Plans Afoot To Cap Number Of Vehicles Crossing Atal Tunnel Daily, 9 June 2026
  10. The Tribune: Massive tourist rush pushes Atal Tunnel traffic beyond capacity; safety audit ordered, 22 May 2026
  11. The Tribune: What Atal tunnel brings to the people of Lahaul-Spiti, 8 January 2021
  12. Deccan Herald (PTI): 2 die in avalanche in HP, 23 March 2011
  13. The Tribune: 60 washed away in Kulu flash floods, 9 August 2003
  14. The Tribune: 8 feared dead in cloudburst, Himachal edition, 22 July 2011
  15. News Arena India: Avalanche shuts NH-03 near Atal Tunnel, 3 February 2026
  16. Business Standard: PM Modi launches Shinkun La Tunnel construction, 26 July 2024
  17. The Tribune: Shinku La tunnel construction to begin by July, says BRO DG, 9 April 2023
  18. The Tribune: Vikramaditya Singh says Rohtang tunnel is Congress's contribution to Lahaul valley, 18 May 2024

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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