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18 नवंबर 2026 को वॉयजर 1 पृथ्वी से एक प्रकाश-दिवस दूर होगा, प्रक्षेपण के 49 साल बाद, और उसके दस में से सिर्फ़ दो उपकरण अब भी चालू हैं
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18 नवंबर 2026 को वॉयजर 1 पृथ्वी से एक प्रकाश-दिवस दूर होगा, प्रक्षेपण के 49 साल बाद, और उसके दस में से सिर्फ़ दो उपकरण अब भी चालू हैं

चित्रण: tuput

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नासा के अनुसार 18 नवंबर 2026 को वॉयजर 1 पृथ्वी से 25.902 अरब किलोमीटर दूर होगा, यानी उतनी दूरी जो प्रकाश 24 घंटे में तय करता है। दोनों जुड़वाँ यान 20 अगस्त और 5 सितंबर 1977 को छोड़े गए थे, और अब उन्हें चालू रखने के लिए एक-एक कर उपकरण बंद किए जा रहे हैं, क्योंकि उनकी प्लूटोनियम बिजली हर साल लगभग 4 वाट घट रही है।

· · 9 मिनट का पठन

नासा के अनुसार 18 नवंबर 2026 को प्रशांत समय के हिसाब से सुबह 2:16:07 बजे वॉयजर 1 पृथ्वी से 16.094 अरब मील (25.902 अरब किलोमीटर) दूर होगा। यही एक प्रकाश-दिवस है, यानी वह दूरी जो प्रकाश 24 घंटे में तय करता है, और नासा का कहना है कि इंसान का बनाया यह पहला पिंड होगा जो इतनी दूरी तक पहुँचेगा। यान 5 सितंबर 1977 को केप कैनावरल से रवाना हुआ था, और 17 अप्रैल 2026 की तारीख़ वाली नासा की उपकरण-स्थिति तालिका में उसके दस विज्ञान उपकरणों में से दो अब भी चालू दिखते हैं।

वॉयजर 2 पहले गया

वॉयजर 2 ने 20 अगस्त 1977 को फ़्लोरिडा के केप कैनावरल से उड़ान भरी और वॉयजर 1 5 सितंबर 1977 को उसके पीछे गया। वॉयजर 2 टाइटन IIIE-सेंटॉर रॉकेट पर सवार था। जेपीएल के रिकॉर्ड के अनुसार, नासा के प्रशासक जेम्स फ़्लेचर ने 7 मार्च 1977 को नए नामों का ऐलान किया, उससे पहले इस जोड़ी को मैरिनर जुपिटर/सैटर्न 1977 कहा जाता था।

हर 175 साल में लौटने वाली क़तार

जेपीएल के अनुसार मिशन डिज़ाइनरों ने 1960 के दशक में देखा था कि बाहरी ग्रह लगभग हर 175 साल में ही एक सीध में आते हैं, और अगली ऐसी स्थिति 1970 के दशक के आख़िर में पड़ेगी। ग्रैंड टूर कही गई पहली योजना में यानों के दो जोड़े थे। जेपीएल कहता है कि वह बहुत महँगी निकली और 1971 में रद्द कर दी गई। 1972 में नासा ने एक छोटी परियोजना मंज़ूर की: 1977 में छोड़े जाने वाले मैरिनर श्रेणी के दो यान, जो सिर्फ़ बृहस्पति और शनि का अध्ययन करेंगे।

वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि एक यान आगे यूरेनस और नेपच्यून तक जा सकेगा, और वॉयजर 2 गया भी। नासा के मिशन पन्नों में सबसे नज़दीकी गुज़रने की ये तारीख़ें और दूरियाँ दर्ज हैं:

  • वॉयजर 1 बृहस्पति के पास 5 मार्च 1979 को लगभग 280,000 किमी पर और शनि के पास 12 नवंबर 1980 को लगभग 126,000 किमी पर से गुज़रा।
  • वॉयजर 2 बृहस्पति के पास 9 जुलाई 1979 को लगभग 645,000 किमी पर और शनि के पास अगस्त 1981 के आख़िर में लगभग 101,000 किमी पर से गुज़रा।
  • वॉयजर 2 यूरेनस के पास 24 जनवरी 1986 को लगभग 81,500 किमी पर और नेपच्यून के पास 25 अगस्त 1989 को लगभग 4,800 किमी पर से गुज़रा।

नासा के अनुसार वॉयजर 2 अब भी अकेला यान है जो यूरेनस और नेपच्यून तक गया है। नासा की स्थिति तालिका के मुताबिक़ बिजली बचाने के लिए वॉयजर 1 के कैमरे 14 फ़रवरी 1990 को बंद कर दिए गए।

हीलियोपॉज़ के दो पार

सूर्य आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्रों का एक बुलबुला फूँकता रहता है, जिसे हीलियोस्फ़ियर कहते हैं, और हीलियोपॉज़ वह सीमा है जहाँ यह सौर पवन तारों के बीच के ठंडे, घने पदार्थ से टकराती है।

जेपीएल की 12 सितंबर 2013 की विज्ञप्ति वॉयजर 1 के पार करने का दिन 25 अगस्त 2012 बताती है, और यह तारीख़ एक अनुमान है। वॉयजर 1 का प्लाज़्मा सेंसर अब काम नहीं करता, इसलिए वैज्ञानिक उस समय गैस को सीधे नाप नहीं सके। अप्रैल 2013 में एक सौर विस्फोट यान तक पहुँचा और आसपास के प्लाज़्मा में दोलन पैदा कर दिए, और उन दोलनों की तान से पता चला कि प्लाज़्मा बाहरी हीलियोस्फ़ियर से लगभग 40 गुना घना है। 2012 के आख़िर के हल्के दोलनों को पीछे की ओर खींचकर देखा गया, और ऊर्जावान कणों के घनत्व में अचानक आए जो बदलाव पहली बार 25 अगस्त 2012 को दिखे, वे पार करने से अपेक्षित तस्वीर से मेल खाते थे। वॉयजर परियोजना के वैज्ञानिक एड स्टोन ने नए आँकड़ों के बारे में कहा: “हमारा मानना है कि यह इंसानियत की तारों के बीच के अंतरिक्ष में ऐतिहासिक छलाँग है।”

वॉयजर 2 ने 5 नवंबर 2018 को पार किया, और उसका प्लाज़्मा उपकरण चल रहा था। जेपीएल के अनुसार उस उपकरण ने उस दिन सौर पवन की गति में तेज़ गिरावट और फिर सौर पवन के बहाव का बिल्कुल न होना दर्ज किया, और तीन दूसरे उपकरणों ने इसकी पुष्टि की। नासा ने 10 दिसंबर 2018 को पार करने का ऐलान किया, जब यान पृथ्वी से लगभग 18 अरब किमी दूर था और उसके संकेतों को एक तरफ़ पहुँचने में लगभग 16.5 घंटे लगते थे। नासा के वॉयजर 2 पन्ने की एक तालिका में दूसरी तारीख़, 25 नवंबर 2018, दर्ज है। जेपीएल की घोषणा 5 नवंबर कहती है, और यहाँ वही तारीख़ ली गई है।

वॉयजर 1 से पाँच महीने बेपढ़ा डेटा

14 नवंबर 2023 को वॉयजर 1 ने पढ़े जा सकने वाले विज्ञान और इंजीनियरिंग डेटा भेजना बंद कर दिया। जेपीएल के अनुसार वह तब भी आदेश मान रहा था और बाक़ी तरह से सामान्य व्यवहार कर रहा था। मार्च 2024 की शुरुआत में टीम ने एक आदेश भेजा, जिससे यान ने अपने फ़्लाइट डेटा सबसिस्टम की मेमोरी का ब्योरा लौटाया। यह उसके तीन ऑनबोर्ड कंप्यूटरों में से एक है। नासा ने 4 अप्रैल 2024 को बताया कि उस मेमोरी का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा बिगड़ चुका था, और वजह एक अकेली चिप निकली जो उसका एक हिस्सा सँभालती है, जिसमें कंप्यूटर के सॉफ़्टवेयर कोड का कुछ अंश भी है।

इंजीनियर पक्का नहीं कह सकते कि चिप क्यों ख़राब हुई। नासा दो संभावनाएँ बताता है: अंतरिक्ष से आया कोई ऊर्जावान कण, या 46 साल की घिसावट। चिप की मरम्मत कोई कर नहीं सकता था, और मेमोरी में कोई एक ख़ाली जगह खोए हुए कोड के लिए काफ़ी बड़ी नहीं थी। इसलिए टीम ने उसे टुकड़ों में बाँटा, अलग-अलग जगह रखा और उनके बीच के संदर्भ बदले। उसने पहला स्थानांतरित कोड, जो इंजीनियरिंग डेटा को बाँधता है, 18 अप्रैल 2024 को भेजा। 20 अप्रैल को आए संकेत ने पुष्टि की कि वह काम कर गया, पाँच महीने में पहला इंजीनियरिंग डेटा, जेपीएल ने 22 अप्रैल को लिखा।

विज्ञान डेटा चरणों में लौटा। नासा की 22 मई की पोस्ट के अनुसार 17 मई को भेजे आदेशों ने प्लाज़्मा वेव उपकरण और मैग्नेटोमीटर को बहाल किया। उसकी 13 जून की पोस्ट उस आदेश की तारीख़ 19 मई बताती है और कहती है कि तब तक चारों उपकरण काम का डेटा लौटा रहे थे। हर आदेश को यान तक पहुँचने में लगभग 23 घंटे लगते हैं, और नासा की मई की पोस्ट के अनुसार टीम को यह पक्का करने में लगभग दो दिन इंतज़ार करना पड़ा कि आदेश काम कर गए।

साल में चार वाट

हर वॉयजर में तीन रेडियोआइसोटोप जनरेटर हैं, जो जेपीएल के अनुसार सड़ते प्लूटोनियम की गर्मी को बिजली में बदलते हैं। नासा के वॉयजर 1 पन्ने के मुताबिक़ प्रक्षेपण के समय हर एक लगभग 158 वाट बना रहा था। जेपीएल की 5 मार्च 2025 की विज्ञप्ति कहती है कि अब हर यान की बिजली साल में लगभग 4 वाट घट रही है, और उपकरण बंद किए बिना मिशन को ख़त्म घोषित करने से पहले यानों के पास “बस कुछ और महीनों की बिजली” बचती। वही विज्ञप्ति जोड़ती है कि इंजीनियरों का मानना था कि हर यान का कम से कम एक उपकरण 2030 के दशक तक चलता रह सकता है, और अनदेखी गड़बड़ियाँ इसे छोटा कर सकती हैं।

बंद करने का क्रम वह है जो कई साल पहले तय हुआ था। नासा की तालिका से तारीख़ें: वॉयजर 2 का प्लाज़्मा साइंस उपकरण 26 सितंबर 2024 को, वॉयजर 1 का कॉस्मिक रे सबसिस्टम 25 फ़रवरी 2025 को, वॉयजर 2 का लो-एनर्जी चार्ज्ड पार्टिकल उपकरण 24 मार्च 2025 को और वॉयजर 1 का 17 अप्रैल 2026 को। नासा के अनुसार 27 फ़रवरी 2026 को एक नियमित रोल पैंतरे के दौरान वॉयजर 1 की बिजली अचानक गिर गई, जिससे यान के सामने अपने-आप बंद हो जाने का जोखिम आया, जिससे उबरना और कठिन होता। सेंसर को घुमाने वाली एक छोटी मोटर में बिजली जारी रहती है और वह 0.5 वाट लेती है, ताकि कभी बिजली मिले तो उपकरण को फिर चालू किया जा सके।

इस तरह वॉयजर 1 के पास एक प्लाज़्मा वेव उपकरण और एक मैग्नेटोमीटर बचा है। वॉयजर 2 के पास ये दोनों और कॉस्मिक रे सबसिस्टम है। 4 अगस्त 2026 को नासा ने वॉयजर 2 के लिए एक प्रक्रिया बताई जिसे उसके इंजीनियर “बिग बैंग” कहते हैं: कुछ ज़्यादा बिजली खाने वाले उपकरण बंद करना और एक साथ कम बिजली वाले विकल्पों पर चले जाना, जबकि यान को इतना गरम रखा जाए कि वह काम कर सके। इसके बिना वॉयजर 2 का एक और उपकरण 2026 के अंत से पहले बंद करना पड़ता। पोस्ट के अनुसार इस बचत से तीन उपकरण कम से कम एक साल और चलने चाहिए, और टीम अगले कुछ महीनों में वॉयजर 1 पर यही बदलाव करने की योजना बना रही है।

गोल्डन रिकॉर्ड में क्या है

हर वॉयजर में एक्वमिनियम के आवरण में 12 इंच का सोने की परत वाला फ़ोनोग्राफ़ रिकॉर्ड है, साथ में कार्ट्रिज, सुई और उसे बजाना समझाने वाले चिह्न हैं। नासा के अनुसार सामग्री कॉर्नेल विश्वविद्यालय के कार्ल सैगन की अगुवाई वाली समिति ने चुनी, और सैगन ने कहा था कि यह रिकॉर्ड तभी बजाया जाएगा जब तारों के बीच के अंतरिक्ष में उन्नत अंतरिक्षयात्री सभ्यताएँ मौजूद हों।

रिकॉर्ड में 115 चित्र हैं, जो एनालॉग रूप में कूटबद्ध हैं। उसमें 55 भाषाओं में बोले गए अभिवादन भी हैं, सुमेर में लगभग छह हज़ार साल पहले बोली जाने वाली अक्काडियन से लेकर चीन की आधुनिक बोली वू तक। उनमें बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मराठी, उड़िया, पंजाबी, राजस्थानी, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं। अंग्रेज़ी का अभिवादन है “Hello from the children of planet Earth.” यानी “पृथ्वी ग्रह के बच्चों की ओर से नमस्कार।”

रिकॉर्ड में प्राकृतिक आवाज़ें (लहरों का टूटना, हवा, बादलों की गरज, पक्षी, व्हेल), राष्ट्रपति कार्टर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव वाल्डहाइम के लिखित संदेश, और 27 संगीत-रचनाएँ भी हैं। इनमें बाख़, मोत्सार्ट और बीथोवन, चक बेरी का “Johnny B. Goode”, ब्लाइंड विली जॉनसन का “Dark Was the Night” और सुरश्री केसरबाई केरकर का गाया 3 मिनट 30 सेकंड का एक राग “जात कहाँ हो” हैं। नासा संगीत को 90 मिनट का चयन कहता है, और उसकी तालिका की अवधियाँ हमारे जोड़ से 1 घंटा 27 मिनट 16 सेकंड बैठती हैं।

एक प्रकाश-दिवस कितना दूर है

प्रकाश को पृथ्वी से सूर्य तक पहुँचने में 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं, और नासा मंगल के लिए ग्रहों की स्थिति के हिसाब से 3 से 22 मिनट बताता है। भारत का मंगल ऑर्बिटर 2022 में संपर्क ख़त्म होने तक इसी दायरे में काम करता रहा। नासा का एक और मिशन, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर बैठा है। नेपच्यून, जहाँ वॉयजर 2 1989 में पहुँचा, औसतन 4 प्रकाश-घंटे 10 मिनट दूर है।

भाग देकर देखें तो नासा का प्रकाश-दिवस का आँकड़ा 25,902,068,356 किमी लगभग 173 खगोलीय इकाई (एयू) बैठता है, जहाँ एक एयू पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी है। नासा का वॉयजर 1 मिशन पन्ना, जिसे 8 अक्टूबर 2026 को पढ़ा गया, अब भी 21 अगस्त 2024 का एक पुराना आँकड़ा, 164.7 एयू, दिखाता है। न वह पन्ना और न प्रकाश-दिवस वाला पन्ना, जो आख़िरी बार 2 अक्टूबर 2026 को अपडेट हुआ था, किसी भी यान की ताज़ा दूरी देता है। प्रकाश-दिवस वाला पन्ना कहता है कि वॉयजर 1 को एक प्रकाश-दिवस तक पहुँचने में 49 साल, 2 महीने और 11 दिन लगे होंगे, और वॉयजर 2 इतनी ही दूरी नवंबर 2035 में छूने की राह पर है।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. NASA Science: Where Are Voyager 1 and Voyager 2 Now? (light-day date and instrument status table)
  2. NASA Science: Voyager 1, What Is a Light-Day?
  3. NASA Science: Voyager 1 mission page
  4. NASA Science: Voyager 2 mission page
  5. NASA JPL: 45 Years Ago, Voyager 2 Begins Its Epic Journey to the Outer Planets and Beyond
  6. NASA JPL: NASA Spacecraft Embarks on Historic Journey Into Interstellar Space (12 September 2013)
  7. NASA JPL: NASA's Voyager 2 Probe Enters Interstellar Space (10 December 2018)
  8. NASA Science: Engineers Pinpoint Cause of Voyager 1 Issue, Are Working on Solution (4 April 2024)
  9. NASA JPL: NASA's Voyager 1 Resumes Sending Engineering Updates to Earth (22 April 2024)
  10. NASA Science: Voyager 1 Resumes Sending Science Data From Two Instruments (22 May 2024)
  11. NASA Science: Voyager 1 Returning Science Data From All Four Instruments (13 June 2024)
  12. NASA JPL: NASA Turns Off 2 Voyager Science Instruments to Extend Mission (5 March 2025)
  13. NASA Science: NASA Shuts Off Instrument on Voyager 1 to Keep Spacecraft Operating (17 April 2026)
  14. NASA Science: NASA Engineers Help Prolong Voyager 2's Science Mission (4 August 2026)
  15. NASA Science: The Golden Record, contents
  16. NASA Science: Golden Record sounds and music
  17. NASA Science: Golden Record greetings
  18. NASA Science: Voyager mission overview

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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