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1826 से नीलगिरि में फूलने के रिकॉर्ड वाली नीलकुरिंजी 2026 में 12 साल के चक्र पर मुन्नार के आसपास खिली है, और केरल इसे बचाने के लिए आगंतुकों को स्लॉट में बुक कर रहा है
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1826 से नीलगिरि में फूलने के रिकॉर्ड वाली नीलकुरिंजी 2026 में 12 साल के चक्र पर मुन्नार के आसपास खिली है, और केरल इसे बचाने के लिए आगंतुकों को स्लॉट में बुक कर रहा है

फ़ोटो: Vinayaraj / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप किया गया)

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केरल के वन विभाग ने 24 अगस्त को चोकरामुडी में 2026 का नीलकुरिंजी मौसम खोला, और मीसापुलिमला 26 अक्टूबर को रोज़ 750 आगंतुकों की सीमा के साथ खुला। इरविकुलम की अलग आबादी 2018 में फूली थी और अगली बार 2030 में अपेक्षित है।

· · 8 मिनट का पठन

नीलकुरिंजी (Strobilanthes kunthiana) लगभग 12 साल में एक बार फूलती है, और 2026 में वह केरल के इडुक्की ज़िले के मुन्नार के आसपास खिली है। मुन्नार के मंडल वन अधिकारी ने 24 अगस्त को चोकरामुडी बाइसन वैली ट्रेल ट्रेकिंग केंद्र में मौसम की शुरुआत की, साउथ फ़र्स्ट ने 28 अगस्त 2026 को बताया, और केरल वन विकास निगम (केएफ़डीसी) ने 26 अक्टूबर को मीसापुलिमला आगंतुकों के लिए खोला, फ़्री प्रेस जर्नल ने बताया। इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान, जो देखने की ज़्यादा जानी-मानी जगह है, इस साल फूल में नहीं है। उसके पौधे 2018 में खिले थे, और केरल पर्यटन वहाँ अगले बड़े खिलने के रूप में 2030 देता है।

मुन्नार में दो खिलने के साल क्यों

वन अधिकारियों ने साउथ फ़र्स्ट को बताया कि मुन्नार की पहाड़ियों में फूलने के दो अलग चक्र हैं। एक इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में है, जहाँ पिछली बहार 2018 में थी और अगली 2030 में अपेक्षित है। दूसरा चोकरामुडी, मीसापुलिमला और उनके आसपास की ढलानों को घेरता है, जहाँ चोकरामुडी में पिछला फूलना 2014 में दर्ज हुआ था, जिससे 2026 अगला चक्र बनता है। द बेटर इंडिया, 31 अगस्त 2026 के एक लेख में, यही बँटवारा बताता है और चोकरामुडी के पौधों को 2030 की बहार का जल्दी आया रूप नहीं, बल्कि अपनी अलग 12 साल की घड़ी पर चलने वाली एक अलग आबादी कहता है।

ओनमनोरमा ने 11 जुलाई 2026 को बताया कि चोकरामुडी के पौधे फूलने लगे थे और एडलिमेडु, सेवनमला, गुंडामला और मीसापुलिमला के उनके पीछे आने की उम्मीद थी। साउथ फ़र्स्ट जोड़ता है कि 2026 का फूलना संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के बाहर हो रहा है, इरविकुलम वाले के विपरीत। अभी फूल रहे पौधे 2038 के आसपास लौटने चाहिए, द बेटर इंडिया लिखता है, जो 12 साल के अंतराल से निकला उसका अनुमान है।

एक झाड़ी जो एक बार फूलती है

नीलकुरिंजी एकैंथस कुल की है और शोला घास के मैदानों में उगती है, यानी पश्चिमी घाट की ऊँची घास की ढलानें जिनके बीच जंगल के टुकड़े आते हैं। केरल पर्यटन का पृष्ठ इसे 1,500 से 2,500 मीटर पर रखता है। बुलेटिन ऑफ़ द नेशनल रिसर्च सेंटर की एक समीक्षा 30 से 60 सेमी की उप-झाड़ी बताती है जो अच्छी स्थितियों में 2 मीटर से ऊपर जा सकती है।

वनस्पतिशास्त्री इस ढर्रे को प्लीटेशियल फूलना कहते हैं: पौधा सालों तक पत्तियों वाली, बिना फूल की अवस्था में रहता है, अपने पड़ोसियों के साथ एक साथ फूलता है, बीज देता है और मर जाता है। साउथ फ़र्स्ट नोट करता है कि Strobilanthes प्रजातियाँ एक से 16 साल तक के चक्र पर चलती हैं और S. kunthiana 12 के लिए जानी जाती है। आईयूसीएन आकलन प्रजाति की पीढ़ी-अवधि 12 साल दर्ज करता है।

वही समीक्षा, क्षेत्र अध्ययनों के हवाले से, कहती है कि फूलना अगस्त के दूसरे हफ़्ते में शुरू होता है, सितंबर के तीसरे हफ़्ते तक चरम पर पहुँचता है और अक्टूबर के अंत तक घटता है, और एक पहाड़ी लगभग ढाई महीने नीली रहती है। मधुमक्खियाँ फूलों का परागण करती हैं, डाउन टू अर्थ बताता है। साउथ फ़र्स्ट नोट करता है कि जब पौधे बड़ी संख्या में खिलते हैं तो कुरिंजीतेन नाम का एक दुर्लभ शहद इकट्ठा किया जाता है। समीक्षा फूलने के बाद के मानसून में प्रति वर्ग मीटर लगभग 700 अंकुरों की एक गिनती का हवाला देती है।

12 साल के अंतराल का कारण अब भी खुला है। समीक्षा साहित्य से दो व्याख्याएँ रखती है: कि एक बड़ा समकालिक प्रदर्शन पर-परागण बेहतर करता है, और कि इतने सारे बीज एक साथ आते हैं कि बीज खाने वाले जानवर उन सबको नहीं उठा सकते। वह कहती है कि पूरी पहाड़ियों को एक साथ क़दम मिलाकर चलाने वाली क्रियाविधि ज्ञात नहीं है। वह यह भी दर्ज करती है कि कुछ पौधे मुख्य बहार के पहले और बाद के सालों में फूलते हैं।

रिकॉर्ड में दो सदियाँ

साउथ फ़र्स्ट एम. ई. रॉबिन्सन के 1934 के फूलने पर उस पेपर का हवाला देता है, जो 1936 में जर्नल ऑफ़ द बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी में छपा, जो नीलगिरि पहाड़ियों में 1826 में फूलने और 1838, 1850, 1862, 1874, 1886, 1898, 1910, 1922 और 1934 में पूरी बहार दर्ज करता है। आईसीएआर की पत्रिका इंडियन हॉर्टिकल्चर वही शृंखला देती है। डाउन टू अर्थ उसे 1946, 1958, 1970, 1982, 1994, 2006 और 2018 तक आगे ले जाता है।

पहाड़ी समुदायों ने उस लय को अपने समय के हिसाब में ढाल लिया। साउथ फ़र्स्ट बताता है कि मुथुवन और पालियन समुदायों के लिए बहार उम्र गिनने का कैलेंडर है, और डाउन टू अर्थ कहता है कि पालियर फूलने की अवधि से अपनी उम्र निकालते हैं। समीक्षा कहती है कि नीलगिरि, यानी नीले पहाड़, का नाम इसी फूलने को दिया जा सकता है, और साउथ फ़र्स्ट कहता है कि पर्वत-शृंखला पारंपरिक रूप से इसी रंग से जुड़ी है।

तमिलनाडु की संगम कविता में पहाड़ी इलाक़ा पाँच क्षेत्रों में से एक है, जिन्हें तिणै कहा जाता है, और उसका नाम कुरिंजी है; हमारा संगम साहित्य पर लेख इस प्रणाली को सामने रखता है। डाउन टू अर्थ बताता है कि तमिल विद्वान मानते हैं कि वर्गीकरण हर क्षेत्र के विशिष्ट पौधे पर आधारित था।

रेड लिस्ट और केरल के अभयारण्य क्या दर्ज करते हैं

आईयूसीएन ने प्रजाति का आकलन 31 जनवरी 2024 को किया और उसे मानदंड A2c के तहत असुरक्षित (Vulnerable) सूचीबद्ध किया। अमिता बचन के. एच. और एम. ए. देविका का यह आकलन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में 1,340 से 2,600 मीटर के बीच 34 स्थान, अनुमानित 54,00,000 परिपक्व पौधे, घटती और बुरी तरह बँटी हुई आबादी, और आबादी का 51 से 60 प्रतिशत संरक्षित क्षेत्रों के भीतर दर्ज करता है।

केरल में पौधे के लिए 2006 से अभयारण्य है। राज्य वन विभाग की तालिका कुरिंजिमला अभयारण्य को 32 वर्ग किमी का, 2006 में बना, दर्ज करती है और कहती है कि वह नीलगिरि तहर का आवास और नीलकुरिंजी का अपना आवास बचाता है। आईसीएआर का लेख उसे मुन्नार के पास वट्टवडा और कोट्टाकंबूर गाँवों में रखता है। तहर और इरविकुलम के झुंड का ब्योरा हमारे नीलगिरि तहर के लेख में है, और व्यापक क्षेत्र का पश्चिमी घाट की विश्व धरोहर सूची वाले लेख में।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने द हिंदू की 10 अगस्त 2024 की एक रिपोर्ट के बाद पौधे का स्वतः संज्ञान लिया। 15 जुलाई 2025 के एक संयुक्त जवाब में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण और पर्यावरण मंत्रालय ने माना कि आबादी घटने के आधार पर असुरक्षित वर्गीकरण उचित था, घटाव की अनुमानित दर पर आपत्ति की और नए सर्वेक्षण की माँग की, डाउन टू अर्थ ने बताया। जवाब ने जोड़ा कि पौधा 34 से ज़्यादा स्थानों पर पाया जाता है और हाल में लगभग 1,100 मीटर जितनी नीचाई पर भी मिला है।

साउथ फ़र्स्ट अधिकरण के अप्रैल के एक आदेश का वर्णन करता है जो जवाहरलाल नेहरू उष्णकटिबंधीय वनस्पति उद्यान एवं अनुसंधान संस्थान के निष्कर्षों पर आधारित था। वह संस्थान का यह निष्कर्ष रखता है कि पहाड़ी घास के मैदान चाय और विदेशी पेड़ों के बागानों में गए, और कि 1960 से 1990 के दशकों तक यूकेलिप्टस और वैटल (Acacia mearnsii) से वनीकरण, आक्रामक पौधे, बदले हुए आग-प्रबंधन के तरीक़े और बड़े पैमाने पर फूलने के दौरान भारी आगंतुक संख्या दबाव बढ़ाते हैं। साउथ फ़र्स्ट जोड़ता है कि पर्यावरण मंत्रालय ने अधिकरण से केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक को अपनी वार्षिक संचालन योजनाओं में नीलकुरिंजी के उपाय शामिल करने का निर्देश देने को कहा है।

2026 की बहार देखना

ये ब्योरे 5 नवंबर 2026 को नीचे की रिपोर्टों से जाँचे गए। शुल्क और स्लॉट बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले वन विभाग या केएफ़डीसी से पुष्टि कर लें।

चोकरामुडी में, ओनमनोरमा ने 16 अगस्त को बताया कि प्रवेश मुन्नार से बोडिमेट्टू सड़क पर देवीकुलम के वन विभाग रेंज कार्यालय के पास है। प्रवेश वयस्कों के लिए 200 रुपये और 18 से कम उम्र के बच्चों के लिए 50 रुपये तय हुआ, सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक, ऑनलाइन बुकिंग विभाग की वेबसाइट पर खुलनी थी। निजी वाहन और टैक्सियाँ मुन्नार कस्बे से आगे नहीं जा सकतीं, जहाँ आगंतुक प्रवेश तक के लिए केएसआरटीसी की शटल बसों में बैठते हैं।

मीसापुलिमला में, ओनमनोरमा ने 29 अक्टूबर को बताया कि केएफ़डीसी आगंतुकों को साइलेंट वैली एस्टेट के रास्ते वाहन से बेस कैंप तक ले जाता है, उसके बाद 5 किमी की ऑफ़-रोड ड्राइव है। यात्रा, नाश्ते और गाइड के साथ 1,416 रुपये का चार घंटे का पैकेज रोज़ 750 लोगों तक सीमित है और ऑनलाइन या कुरिंजी ऐप से बुक होता है। फ़्री प्रेस जर्नल कहता है कि पंजीकरण और परमिट अनिवार्य हैं। ओनमनोरमा मौसम को मुन्नार की दूसरी जगहों पर लगभग ख़त्म बताता है, इसलिए देर से जाने पर पहले पुष्टि कर लें।

पौधे को तोड़ने या उखाड़ने पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना, तीन साल तक की जेल, या दोनों हो सकते हैं, ओनमनोरमा ने 29 अक्टूबर को बताया। देवीकुलम के रेंज अधिकारी ने भी यही चेतावनी दी, ओनमनोरमा ने 16 अगस्त को बताया, इक्का नगर में पर्यटकों के तस्वीरों के लिए पौधे उखाड़ने की रिपोर्टों के बाद।

इरविकुलम 2026 में नहीं फूल रहा। केरल पर्यटन कहता है कि राजमला खंड तहर देखने का पर्यटन क्षेत्र है, और उद्यान हर फ़रवरी और मार्च में बच्चे देने के मौसम के लिए बंद रहता है। वह मुन्नार के सबसे नज़दीकी हवाई अड्डे और स्टेशन के रूप में कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अलुवा रेलवे स्टेशन गिनाता है।

केरल पर्यटन इरविकुलम में अगली अपेक्षित बहार के रूप में 2030 देता है, और द बेटर इंडिया चोकरामुडी के पौधों के 2038 के आसपास फिर फूलने की उम्मीद करता है।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. IUCN Red List of Threatened Species: Strobilanthes kunthiana (Neelakurinji), assessment by Amitha Bachan and Devika, 2024
  2. Kerala Forest Department: Wildlife Sanctuaries of Kerala (table of 18 sanctuaries, including Kurinjimala)
  3. Kerala Tourism: Neelakurinji, the blue beauty in Munnar
  4. Kerala Tourism: Eravikulam National Park
  5. Bera, Das and Kalindi, Bulletin of the National Research Centre: Botany, pharmacology and conservation status of wonder flower, Neelakurinji (2020)
  6. Kamath and co-authors, ICAR Indian Horticulture: Neelakurinji, a spectacular flower of Western Ghats (July to August 2023)
  7. The South First: Neelakurinji blooms on Munnar's hills after 12 years, as habitat loss continues to threaten the rare flower (28 August 2026)
  8. Down To Earth: Neelakurinji, blue bloom in a blue moon (2 August 2018)
  9. Down To Earth: Daily court digest, NGT directions on Dal Lake and Neelakurinji (28 October 2025)
  10. Onmanorama: Neelakurinji to paint Kerala's Idukki hills blue, online slots for tourists (11 July 2026)
  11. Onmanorama: Visitors can enjoy Neelakurinji blooms at Chokramudi hills from Aug 24 (16 August 2026)
  12. Onmanorama: Meesapulimala now home to Neelakurinji, tourist packages launched (29 October 2026)
  13. Free Press Journal: Munnar's Meesapulimala peak opens to tourists from October 26 as Neelakurinji blooms
  14. The Better India: Munnar's rare Neelakurinji due to bloom in 2030 is flowering now (31 August 2026)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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