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ओडिशा के ऋषिकुल्या तट पर फ़रवरी 2025 में 6,98,718 ऑलिव रिडले कछुओं ने अंडे दिए और मार्च में गहिरमाथा में 6,06,933 ने, जबकि नेस्टिंग तट के 20 किमी के भीतर ट्रॉलरों पर साल में सात महीने रोक रहती है
पर्यावरण

ओडिशा के ऋषिकुल्या तट पर फ़रवरी 2025 में 6,98,718 ऑलिव रिडले कछुओं ने अंडे दिए और मार्च में गहिरमाथा में 6,06,933 ने, जबकि नेस्टिंग तट के 20 किमी के भीतर ट्रॉलरों पर साल में सात महीने रोक रहती है

फ़ोटो: Bernard Gagnon / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 (क्रॉप किया गया)

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बरहमपुर वन मंडल ने 16 से 23 फ़रवरी 2025 के बीच ऋषिकुल्या में अंडे देते 6,98,718 ऑलिव रिडले कछुए गिने, और गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य ने 5 से 9 मार्च के बीच 6,06,933। ऋषिकुल्या, धामरा और देवी नदी के मुहानों पर तट से 20 किमी के भीतर ट्रॉलिंग 1 नवंबर से 31 मई तक वर्जित है। आईयूसीएन इस प्रजाति को संवेदनशील श्रेणी में रखता है।

· · 10 मिनट का पठन

डाउन टू अर्थ ने बताया कि ओडिशा के गंजाम ज़िले में ऋषिकुल्या नदी के मुहाने पर वन विभाग की गिनती में 16 से 23 फ़रवरी 2025 के बीच अंडे देते 6,98,718 (698,718) ऑलिव रिडले कछुए दर्ज हुए, जो इस तट का अब तक का सबसे ऊँचा आँकड़ा है। उस नेस्टिंग के खत्म होने के दस दिन बाद, 5 मार्च को, केंद्रपाड़ा ज़िले के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में कछुए तट पर आने लगे, और सहायक वन संरक्षक मनस दास ने ओरिसापोस्ट को 9 मार्च तक के पाँच दिनों का कुल आँकड़ा 6,06,933 (606,933) बताया।

ओडिशा में तीन ऐसे तट हैं जहाँ ऑलिव रिडले इतनी बड़ी संख्या में एक साथ घोंसला बनाते हैं: गहिरमाथा, ऋषिकुल्या और देवी नदी का मुहाना। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2022 की एक विज्ञप्ति में तीनों को बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख सामूहिक नेस्टिंग तट बताया। 19 मई 2025 को रक्षा मंत्रालय ने ऋषिकुल्या के आँकड़े को रिकॉर्ड कहा और इसका श्रेय भारतीय तटरक्षक बल के सालाना ऑपरेशन ओलिविया को दिया, जो नवंबर से मई तक चलने वाला गश्ती कार्यक्रम है।

अरिबादा यानी हज़ारों मादाओं का एक ही रातों में तट पर आना

ओडिशा रिव्यू समझाता है कि अरिबादा स्पेनी शब्द है जिसका अर्थ आगमन है। एनओएए फ़िशरीज़ इसे समकालिक सामूहिक नेस्टिंग बताता है, जिसमें सैकड़ों से हज़ारों मादाएँ एक साथ तट पर आती हैं, इतनी घनी कि बाद में आने वाली मादाएँ कभी-कभी पहले के अंडे खोद डालती हैं। समुद्री कछुओं के वैज्ञानिकों की लिखी स्वॉट रिपोर्ट सुझाती है कि यह आदत शिकारियों से बचाव के रूप में विकसित हुई होगी, क्योंकि शिकारी सारे अंडे और बच्चे एक साथ नहीं खा सकते।

यह कुछ ही जगहों पर होता है। भारतीय विज्ञान संस्थान, दक्षिण फ़ाउंडेशन और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं का एक प्रीप्रिंट, जिसकी अभी सहकर्मी समीक्षा नहीं हुई है, कहता है कि अरिबादा मुख्यतः मध्य अमेरिका और भारत के कुछ तटों पर होते हैं। स्वॉट रिपोर्ट के अनुसार गहिरमाथा में सामूहिक नेस्टिंग की पहली रिपोर्ट 1974 में आई। प्रीप्रिंट के अनुसार ओडिशा में आमतौर पर फ़रवरी से अप्रैल के बीच साल में एक या दो अरिबादा होते हैं, और दोनों बड़े तटों पर वे सिर्फ़ सूखे मौसम में होते हैं।

वही प्रीप्रिंट यह भी जाँचता है कि अरिबादा को क्या शुरू करता है। करीब 40 साल के मौसम और नेस्टिंग के रिकॉर्ड से उसने पाया कि दोनों तटों पर 60 प्रतिशत से ज़्यादा अरिबादा शुरू होने की तारीखों पर दक्षिणी हवाएँ तेज़ थीं। उसके मॉडल ने अपने परीक्षण आँकड़ों में गहिरमाथा की 37 में से 29 और ऋषिकुल्या की 25 में से 22 शुरुआती तारीखें पहचानीं। लेखक ध्यान दिलाते हैं कि दोनों तट सिर्फ़ करीब 250 किमी दूर हैं और फिर भी संकेतों पर थोड़ा अलग प्रतिक्रिया देते हैं।

गहिरमाथा, ऋषिकुल्या और देवी, एक-एक तट

डाउन टू अर्थ ने 2022 में बताया कि गहिरमाथा को 1997 में समुद्री अभयारण्य घोषित किया गया और वह 1,435 वर्ग किमी में फैला है। प्रीप्रिंट के अनुसार नेस्टिंग पहले मुख्य भूमि के 10 किमी लंबे तट पर होती थी, जब तक 1989 के एक चक्रवात ने उसे बहा नहीं दिया और 5 किमी की रेतीली पट्टी छोड़ दी। वह पट्टी बाद में द्वीपों में बँट गई, जो साल दर साल बदलते हैं। ओरिसापोस्ट के अनुसार मार्च 2025 में करीब 3 लाख कछुओं ने 33 साल में पहली बार एकाकुलानासी द्वीप पर घोंसले बनाए, और 2020 से रेत के प्राकृतिक जमाव से उसका तट करीब 4 किमी से बढ़कर करीब 8 किमी हो गया था। इस तट को गढ़ने वाले तूफ़ानों पर ओडिशा के चक्रवात रिकॉर्ड वाला हमारा लेख है।

भारत में दर्ज सबसे ऊँचा आँकड़ा अब भी गहिरमाथा का है। भारतीय प्राणि सर्वेक्षण (ज़ेडएसआई) के वैज्ञानिक बासुदेव त्रिपाठी ने 2001 में वहाँ करीब 741,000 कछुओं का हवाला दिया। मार्च 2022 में मंडल वन अधिकारी जे डी पति ने 25 से 28 मार्च के चार दिनों में 501,157 मादाएँ गिनीं।

ऋषिकुल्या का नेस्टिंग तट नदी के मुहाने के उत्तर में करीब 4 किमी लंबा है, और प्रीप्रिंट के अनुसार वहाँ सामूहिक नेस्टिंग की खोज 1994 में हुई। स्वॉट रिपोर्ट उसकी बढ़त को यूँ बताती है: 2000 के दशक में 25,000 से 50,000 घोंसले, फिर 2010 के दशक में एक ही अरिबादा में 200,000 से ज़्यादा। उसके बाद की गिनतियाँ 2022 में मार्च के आख़िर और अप्रैल के शुरू में करीब 550,317 और 2023 में करीब 637,000 थीं। डाउन टू अर्थ के अनुसार फ़रवरी 2025 की नेस्टिंग तीन से चार दिन तक दिन के उजाले में चली और सामान्य 5 किमी के बजाय करीब 9 किमी तट पर फैली। ओरिसापोस्ट ने बाद में 2025 का पूरा मौसम करीब 9 लाख बताया।

देवी नदी के मुहाने पर 1980 के दशक में सामूहिक नेस्टिंग होती थी, और स्वॉट रिपोर्ट के अनुसार 1997 के बाद वहाँ कोई दर्ज नहीं हुई। मार्च 2026 में एक वन रेंजर ने ईटीवी भारत को बताया कि ऋषिकुल्या, देवी मुहाना और गहिरमाथा में अंडे देना शुरू हो गया है। तट पर और जगहों की बात करें तो पुरी वन्यजीव मंडल, जिसके रेंज अस्तरंगा, कोणार्क, पुरी और ब्रह्मगिरि हैं, ने 2026 में रिकॉर्ड 2,577 घोंसले पहचाने, जो 2021 के 1,136 से ज़्यादा हैं, ओटीवी ने बताया।

अंडे, बाड़ और हैचरी

एनओएए फ़िशरीज़ एक सामान्य क्लच करीब 100 अंडों का बताता है, और ओरिसापोस्ट 120 से 150। हर एक में 100 से 150 अंडे मानें तो ऋषिकुल्या के 6,98,718 कछुओं में से हर एक का एक क्लच मिलाकर लगभग 7 करोड़ से 10.5 करोड़ अंडे बनते हैं। यह tuput की अपनी गणना है, कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं, और ओरिसापोस्ट ध्यान दिलाता है कि शिकारी और ऊँचे ज्वार कुछ अंडे नष्ट कर देते हैं। वह अंडों से बच्चे निकलने का समय 45 से 60 दिन बताता है।

2025 में ऋषिकुल्या में नेस्टिंग तट को जालियों से घेरकर 50 खंडों में बाँटा गया था, हर खंड पर वन कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और ग्रामीणों का एक दल था, जो जंगली कुत्तों, सूअरों, पक्षियों और सियारों पर नज़र रखता था। जहाँ तटों पर पर्यटकों या जानवरों का सामना होता है, वहाँ अंडे दूसरी जगह ले जाए जाते हैं। ओटीवी के अनुसार अप्रैल 2026 के अंत तक पुरी मंडल ने 14 अस्थायी हैचरियों में करीब 3.25 लाख अंडे इकट्ठे किए थे और करीब 87,000 बच्चे छोड़े थे।

कछुओं को कौन गिनता और टैग करता है

ज़ेडएसआई और ओडिशा वन विभाग की वन्यजीव शाखा ने जनवरी 2021 में फ़्लिपर टैगिंग कार्यक्रम शुरू किया। 27 अप्रैल 2022 तक उसने 8,450 कछुओं को टैग किया था, जिसे पर्यावरण मंत्रालय की विज्ञप्ति 8,252 मादाओं, 198 नरों और 188 संभोगरत जोड़ों में बाँटती है। ज़ेडएसआई के निदेशक ने कहा कि यह काम कम से कम 10 साल चलेगा। गोपालपुर में ज़ेडएसआई के एश्चुअरी जीवविज्ञान अनुसंधान केंद्र के अनिल मोहपात्र ने डाउन टू अर्थ को बताया कि 2021 से 2023 में टैग की गई करीब 340 मादाएँ फ़रवरी 2025 में ऋषिकुल्या लौटीं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) कछुओं का उपग्रह से पीछा करता है। ओटीवी के अनुसार मार्च 2025 में वन विभाग और डब्ल्यूआईआई ने करीब 15 साल के अंतराल के बाद गहिरमाथा में उपग्रह ट्रैकिंग फिर शुरू की, और 12 और 13 मार्च को दो मादाओं पर ट्रांसमीटर लगाए। ये उपकरण 300 ग्राम से कम वज़न के होते हैं और कछुए के केंचुल बदलने पर गिर जाते हैं। ओडिशा रिव्यू जोड़ता है कि वाइल्डलाइफ़ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया ने 1998 में ओडिशा वन विभाग, डब्ल्यूआईआई और वाइल्डलाइफ़ सोसाइटी ऑफ़ ओडिशा के साथ ऑपरेशन कच्छपा शुरू किया।

सात महीने की बंदी और कछुआ निष्कासक उपकरण

ओडिशा हर साल 1 नवंबर से 31 मई तक अपना तटीय समुद्र ट्रॉलरों के लिए बंद रखता है। ओटीवी की रिपोर्ट के अनुसार 2025 से 2026 का आदेश तट से 20 किमी के भीतर यंत्रचालित नावों और ट्रॉलरों को रोकता है, ऋषिकुल्या, धामरा और देवी के मुहानों को शामिल करता है, और 8.5 मीटर से छोटी पारंपरिक नावों को कछुआ क्षेत्रों के बाहर सीमित मात्रा में मछली पकड़ने देता है। 20 किमी के पार मछली पकड़ना मान्य है। गहिरमाथा में ऐसी ही बंदी है, और ईटीवी भारत ने मार्च 2026 में बताया कि गहिरमाथा समेत 1,437 वर्ग किमी का क्षेत्र इन्हीं तारीखों में प्रतिबंधित है।

20 किमी का दायरा केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के एक आदेश से आता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बनाया था। उसका अंतरिम आदेश 7 मार्च 2003 का है, और वह हर ट्रॉलर को कछुआ निष्कासक उपकरण, यानी टीईडी, रखने को भी कहता है, जो जाल में लगी एक जाली और बचाव-पल्ला है जो कछुओं को निकल जाने देता है और झींगे अंदर रहते हैं, डाउन टू अर्थ ने समझाया। ओडिशा रिव्यू दर्ज करता है कि उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 14 मई 1998 को ही ट्रॉलरों के लिए टीईडी का निर्देश दे दिया था।

डाउन टू अर्थ ने 2024 में बताया कि वन विभाग चार वन्यजीव मंडलों में 61 तटीय और पाँच समुद्री शिविर चलाता है, जिनके पास पाँच तेज़ नावें और 13 ट्रॉलर हैं, जैसा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने बताया। तटरक्षक बल की विज्ञप्ति कहती है कि उसके ऑपरेशन ओलिविया ने 1,768 हवाई निगरानी उड़ानें और 5,387 सतही गश्ती अभियान किए और अवैध मछली पकड़ने के लिए 366 नावें पकड़ीं। वह जोड़ती है कि तटरक्षक बल मछुआरा समुदायों में टीईडी को बढ़ावा देता है और औपचारिक समझौतों के तहत गैर-सरकारी संगठनों के साथ काम करता है।

टीईडी का कितना अच्छा उपयोग होता है, इस पर विवाद है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक बी सी चौधरी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि टीईडी झींगे की पकड़ में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट के बदले कछुओं की पकड़ 97 प्रतिशत घटाते हैं, जबकि पारादीप ट्रॉलर मालिक संघ के श्रीकांत परिदा ने कहा कि ट्रॉलर उनसे बचते हैं क्योंकि उनसे पकड़ 50 प्रतिशत घट जाएगी। ओडिशा रिव्यू बताता है कि 2021 से पहले के पाँच सालों में गहिरमाथा अभयारण्य और ऋषिकुल्या के मुहाने के भीतर जब्त किए गए 252 ट्रॉलरों में से किसी पर टीईडी नहीं था। ईटीवी भारत ने मार्च 2026 में बताया कि वन विभाग ने पिछले चार महीनों में करीब 400 मछुआरों को पकड़ा और उनके ट्रॉलर ज़ब्त किए, और पर्यावरणविद बिरजा प्रसाद को यह कहते उद्धृत किया कि मछुआरे टीईडी का नियम नहीं मान रहे।

दर्जे की सूचियाँ क्या कहती हैं

प्रवासी प्रजाति अभिसमय और एनओएए फ़िशरीज़ के अनुसार ऑलिव रिडले की आईयूसीएन रेड लिस्ट श्रेणी संवेदनशील है। स्वॉट रिपोर्ट कहती है कि 1960 से 1980 के दशकों की औद्योगिक कटाई से, मुख्यतः मेक्सिको में, प्रजनन तट ढहने के बाद इसे कभी संकटग्रस्त सूची में रखा गया था, और ज़्यादातर बड़े अरिबादा स्थलों पर पिछले दो दशकों में घोंसलों की गिनती स्थिर या बढ़ती रही है। ओडिशा रिव्यू के अनुसार भारत में सभी समुद्री कछुए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में हैं, और प्रवासी प्रजाति अभिसमय ऑलिव रिडले को अपने परिशिष्ट I में रखता है। हमारा सुंदरबन वाला लेख बताता है कि यूनेस्को उस डेल्टा में भी ऑलिव रिडले के नेस्टिंग मैदान दर्ज करता है, और ओडिशा का राज्य परिचय राज्य की सरकार, अर्थव्यवस्था और लोगों को समेटता है।

2026 का मौसम

2026 का मौसम छोटा रहा। ओटीवी ने 11 मई 2026 को बताया कि ओडिशा वन विभाग ने इसे गहिरमाथा में ‘विराम वर्ष’ (skip year) कहा, और राजनगर मंडल वन अधिकारी वरदराज गाओंकर ने कहा कि कई जगहों पर छिटपुट नेस्टिंग हुई थी। ईटीवी भारत ने 24 मई को बताया कि वहाँ कोई समकालिक सामूहिक नेस्टिंग नहीं दिखी। प्रीप्रिंट 1978 से 2020 के बीच गहिरमाथा में अरिबादा के बिना छह पिछले वर्ष गिनाता है: 1988, 1992, 1997, 1998, 2002 और 2014, और कहता है कि ऐसे वर्षों के कारण अब भी अज्ञात हैं।

ऋषिकुल्या में वन विभाग ने चार दिन की सामूहिक नेस्टिंग में करीब 2,05,293 कछुए गिने, ओटीवी और ओरिसापोस्ट ने बताया। सहायक वन संरक्षक दिब्य रंजन बेहरा ने आगमन में देरी के कारकों के रूप में एक संकरा तट, मुहाने भर में मिट्टी का कटाव, समुद्र की सतह के तापमान में अचानक बढ़त और दक्षिणी हवा की गैरमौजूदगी गिनाए। दोनों तटों के रिकॉर्ड हमेशा साथ-साथ नहीं चलते। ईटीवी भारत में रेंजर मनस दास के आँकड़े गहिरमाथा के लिए 2023 में 31,115 और 2024 में 66,933 देते हैं, जबकि ऋषिकुल्या में 2023 में करीब 637,000 थे और, ओरिसापोस्ट के अनुसार, 2024 में मौसम कमज़ोर रहा। उसी सूची में 5 से 8 मार्च 2025 के लिए 4,53,236 दिया गया है, जबकि ओरिसापोस्ट का 5 से 9 मार्च के लिए 6,06,933 है, और tuput को अवधियों का कोई आधिकारिक मिलान नहीं मिला है।

पुरी के मंडल वन अधिकारी मगर धन्नाजी राओसो ने कहा कि 2026 में उनके तट पर कछुओं का आना पिछले पाँच सालों से ज़्यादा था, और ओटीवी ने बताया कि मई के अंत तक वहाँ करीब 3 लाख बच्चे छोड़े जाने की उम्मीद थी।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Press Information Bureau, Ministry of Defence: Operation Olivia, ICG protects over 6.98 lakh Olive Ridley Turtles along the Odisha Coastline (19 May 2025)
  2. Press Information Bureau, Ministry of Environment, Forest and Climate Change: ZSI Initiates Massive Tagging of Olive Ridley Sea Turtles with Odisha Forest Department for their Conservation (27 April 2022)
  3. Prafulla Kumar Mohanty, Odisha Review (Government of Odisha), Olive Ridley Turtle: The Curiosity of World and Pride of Odisha (September to October 2021)
  4. Convention on Migratory Species: Lepidochelys olivacea (olive ridley), species page
  5. NOAA Fisheries: Olive Ridley Turtle, species directory
  6. Srikanthan, Pusapati, Verma, Dhal, Manoharakrishnan and Shanker: To nest or not to nest, environmental cues for olive ridley mass nesting events in Odisha, India, bioRxiv preprint, not peer reviewed (3 November 2024)
  7. Bandimere and contributing scientists, SWOT Report vol. 16: Olive Ridleys, the Quirky Turtles that Conquered the World (16 June 2021)
  8. Down To Earth: Happy nesting! Olive Ridley turtles swim to Rushikulya beach in record numbers for arribada (24 February 2025)
  9. OrissaPOST (PTI): Gahirmatha witnesses over 6 lakh Olive Ridley turtles arriving for mass nesting (updated 11 March 2025)
  10. OrissaPOST: After 33 years, Olive Ridley turtles return to Ekakula for mass nesting (updated 9 March 2025)
  11. Down To Earth: A million Olive Ridleys have laid eggs on Odisha's Gahirmatha, Rushikulya rookeries this year (4 April 2022)
  12. Down To Earth: Why are Olive Ridley sea turtles dying in large numbers on Odisha's coast? (26 February 2024)
  13. OTV: Odisha imposes seven-month coastal fishing ban ahead of Olive Ridley breeding season (1 November 2025)
  14. ETV Bharat: Olive Ridley Turtle Mass Nesting To Begin Soon In Odisha's Gahirmatha (5 March 2026)
  15. OrissaPOST: Olive Ridley nesting at Rushikulya rookery dips (9 April 2026)
  16. OTV: Olive Ridley turtles skip mass nesting in Odisha, raising ecological alarm (11 May 2026)
  17. ETV Bharat: No Mass Nesting Of Rare Olive Ridley Turtles At Odisha's Gahirmatha This Year (24 May 2026)
  18. OTV: Odisha resumes satellite tracking of Olive Ridley turtles after 15 years (20 March 2025)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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