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भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन, परीक्षण में 280 किमी/घंटा के लिए तय आठ डिब्बों और 202 मीटर का सेट, बेंगलुरु में बीईएमएल में आकार ले रही है, और उसकी बॉडी पर 1,500 किलोन्यूटन तक का स्क्वीज़ परीक्षण चल रहा है
एआई और प्रौद्योगिकी

भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन, परीक्षण में 280 किमी/घंटा के लिए तय आठ डिब्बों और 202 मीटर का सेट, बेंगलुरु में बीईएमएल में आकार ले रही है, और उसकी बॉडी पर 1,500 किलोन्यूटन तक का स्क्वीज़ परीक्षण चल रहा है

चित्रण: tuput

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में बीईएमएल के संयंत्र में पहली भारत-निर्मित बुलेट ट्रेन का निरीक्षण किया और उसकी कारबॉडी का स्क्वीज़ परीक्षण देखा। मुंबई-अहमदाबाद लाइन के लिए बना आठ डिब्बों का यह सेट लगभग 557 यात्रियों को ले जाता है और सेवा में 249 किमी/घंटा के लिए तय है।

· · 7 मिनट का पठन

भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित बुलेट ट्रेन बेंगलुरु में बीईएमएल के संयंत्र में आकार ले रही है, और उसकी कारबॉडी का स्क्वीज़ परीक्षण चल रहा है। यह एक संरचनात्मक जाँच है जिसमें ट्रेन के ढाँचे पर नियंत्रित संपीड़न और तनाव के बल लगाए जाते हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर 2026 को इस काम का निरीक्षण किया, और रेल मंत्रालय ने उसी दिन “भारत की पहली बुलेट ट्रेन निर्माणाधीन” शीर्षक से विज्ञप्ति जारी की। उसमें आठ डिब्बों का लगभग 202 मीटर लंबा सेट बताया गया है, जो परीक्षण में 280 किमी/घंटा और सेवा में 249 किमी/घंटा के लिए तय है और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल लाइन के लिए है।

मंत्रालय के अनुसार ट्रेन क्या है

सेट में चार मोटर कार हैं, यानी ट्रेन को चलाने वाले डिब्बे, और चार ट्रेलर कार। सात स्टैंडर्ड क्लास हैं जिनमें 3x2 बैठने की व्यवस्था है, और एक एक्ज़ीक्यूटिव क्लास है जिसमें 2x2 बैठने की व्यवस्था है। मंत्रालय क्षमता लगभग 557 यात्रियों की बताता है, जिसमें सीमित गतिशीलता वाले दो यात्रियों की जगह शामिल है। विज्ञप्ति के अनुसार दो आठ-डिब्बे वाले सेट “भविष्य के संचालन के लिए” जोड़कर 16 डिब्बों की ट्रेन बनाई जा सकती है।

हर सिरे पर ड्राइवर का केबिन है जिसमें इंटेलिजेंट ऑन-बोर्ड कंट्रोल सिस्टम है, जो मंत्रालय के अनुसार त्वरित निर्णयों और संचालन नियंत्रण केंद्र के साथ तालमेल में मदद करता है। ट्रेन भारी कंपाउंड कैटेनरी, यानी ऊपरी तारों की प्रणाली, से लिए गए 25 केवी, 50 हर्ट्ज़ के एकल-फेज़ एसी पर चलती है, और उसकी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग ट्रेन के धीमी होने पर ऊर्जा वापस पा लेती है। हवा के प्रतिरोध, भँवर और सुरंगों में बनने वाली दबाव तरंगों को घटाने के लिए नाक और बॉडी का आकार कंप्यूटेशनल फ्लुइड डायनेमिक्स, यानी हवा के बहाव के कंप्यूटर सिमुलेशन, से तय किया गया।

डिब्बों के भीतर

फ़र्श प्लेटफ़ॉर्म की ऊँचाई के बराबर है ताकि बराबरी से चढ़ा जा सके, और दरवाज़ों में लगे भीतर खिंचने वाले पायदान प्लेटफ़ॉर्म के किनारे का फ़ासला घटाते हैं। विज्ञप्ति में व्हीलचेयर के अनुकूल दरवाज़े, ब्रेल साइनबोर्ड, सीमित गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सीट और शौचालय, भारतीय शारीरिक माप के अनुसार बनी सीटें, ऊपर के रैक, बड़े बैग के लिए फ़र्श पर लगे स्टैंड, लैपटॉप और फ़ोन के लिए बिजली के सॉकेट, बायो-डाइजेस्टर शौचालय और हर सीट-पंक्ति पर चौड़ी खिड़कियाँ गिनाई गई हैं। डिब्बों को सीलबंद एक-टुकड़ा गलियारे जोड़ते हैं।

स्क्रीन पर यात्रा की जानकारी अंग्रेज़ी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में दिखती है, और स्वचालित घोषणाएँ, केबिनों और वेस्टिबुलों में आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट और पहले से भरी सामग्री वाला वाई-फ़ाई इन्फोटेनमेंट सिस्टम है। हर डिब्बे में हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग की दो इकाइयाँ हैं। बॉडी और फ़र्श में ध्वनि रोधन, शोर घटाने वाली कोटिंग, स्कर्ट, बोगी कवर और फ़ेयरिंग का मक़सद शोर को कम रखना है।

स्क्वीज़ परीक्षण क्या जाँचता है, और 1,500 किलोन्यूटन कहाँ आता है

द ट्रिब्यून और बिज़नेस स्टैंडर्ड ने मंत्रालय का जो वर्णन छापा, उसके अनुसार स्क्वीज़ परीक्षण कारबॉडी की संरचनात्मक मज़बूती, कठोरता और आयामी स्थिरता का मूल्यांकन करता है। वैष्णव ने परीक्षण किए जा रहे हिस्सों को देखा: छत, बगल की दीवारें, सिरे की दीवारें और ड्राइवर का केबिन। उन्होंने कहा कि ढाँचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाया गया है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार इस परीक्षण का उनका कारण हवा है। बहुत तेज़ गति पर ट्रेन के चारों ओर निर्वात बनता है, और बॉडी को वह दबाव सहना होता है। “परीक्षण 1500 किलोन्यूटन के भार पर किया जाता है,” उन्होंने कहा। न्यूज़ कर्नाटक ने भार को 1,500 किलोन्यूटन तक बताया। एक किलोन्यूटन एक हज़ार न्यूटन का बल होता है, इसलिए 1,500 किलोन्यूटन लगभग 153 टन वज़न के ढाँचे पर दबने के बराबर है।

इंडिया टीवी ने 8 सितंबर 2026 की वैष्णव की टिप्पणियाँ जैसी छापीं, उनके अनुसार पहला बॉडी फ़्रेम सितंबर की शुरुआत में तैयार हुआ और स्क्वीज़ परीक्षण के लिए भेजा गया। उनकी 24 अक्टूबर की पोस्ट कहती है कि वह “संरचनात्मक परीक्षण से गुज़र रहा है”। वैष्णव ने बेंगलुरु में कहा कि स्क्वीज़ परीक्षण के बाद प्रणोदन प्रणालियाँ लगाई जाएँगी और ट्रेन 50 डिग्री तक के ऊँचे और शून्य से नीचे तक के तापमान, बारिश और धूल के साथ जलवायु परीक्षण से गुज़रेगी।

कौन बना रहा है, और किन अनुबंधों के तहत

बीईएमएल, यानी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, बेंगलुरु की सरकारी निर्माता कंपनी है। अक्टूबर 2024 में चेन्नई की इंटीग्रल कोच फ़ैक्टरी (आईसीएफ़) ने बीईएमएल को आठ डिब्बों के दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट डिज़ाइन करने, बनाने और चालू करने का अनुबंध दिया। बीईएमएल की एक्सचेंज फ़ाइलिंग ने इसका मूल्य 866.87 करोड़ रुपये बताया। फ़ाइलिंग के अनुसार इस आँकड़े में डिज़ाइन लागत, एकबारगी विकास लागत, और जिग, फ़िक्स्चर, टूलिंग और परीक्षण सुविधाएँ शामिल हैं “जो भारत की सभी भावी हाई-स्पीड परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होंगी”। उसमें प्रति डिब्बे का दाम 27.86 करोड़ रुपये और 2026 के अंत की निर्धारित डिलीवरी बताई गई। वैष्णव की अक्टूबर की पोस्ट कहती है कि आईसीएफ़ और बीईएमएल यह सेट बना रहे हैं, जिसे वह बी28 कहते हैं और जो 280 किमी/घंटा के लिए डिज़ाइन है।

इसके बाद एक दूसरा, बड़ा ऑर्डर आया। बीईएमएल ने 18 सितंबर 2026 को शेयर बाज़ारों को बताया कि लाइन बना रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने हाई-स्पीड रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति और रखरखाव तथा संबंधित कामों का ऑर्डर दिया है, जिसकी क़ीमत 5,400 करोड़ रुपये से अधिक है। फ़ाइलिंग एक संयुक्त मूल्य देती है। रेलवे सप्लाई ने नोट किया कि वह यह नहीं बताती कि कितने ट्रेनसेट शामिल हैं या वे बी28 डिज़ाइन के हैं या नहीं।

बेंगलुरु के उसी परिसर में 1 सितंबर 2024 को भारत का पहला वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट पेश किया गया था, जिसे पीआईबी के अनुसार बीईएमएल ने नौ महीने में बनाया। 1 नवंबर 2026 को, बुलेट ट्रेन के निरीक्षण के दिन, वैष्णव ने बेंगलुरु से बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर को भी हरी झंडी दिखाई, जैसा पीआईबी ने बताया। स्लीपर सेवाओं पर अलग लेख है।

वह लाइन जिसके लिए यह बनी है

मुंबई-अहमदाबाद मार्ग 508 किमी लंबा है और जापानी हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल करता है। मंत्रालय की विज्ञप्ति और वैष्णव की पोस्ट दोनों कहती हैं कि नई ट्रेन उसी के लिए बन रही है। अपनी 24 अक्टूबर की पोस्ट में वैष्णव सितंबर 2026 तक 456 किमी का पियर का काम और 371 किमी का वायडक्ट पूरा होना गिनाते हैं, और गलियारे को 350 किमी/घंटा के लिए डिज़ाइन और 320 किमी/घंटा की संचालन गति वाला बताते हैं। उन्होंने जोड़ा कि 350 किमी/घंटा के लिए डिज़ाइन किया गया तेज़ बी35 ट्रेनसेट “अगला क़दम” है। गलियारे का निर्माण, जापानी कर्ज़ और सूरत से वापी वाला हिस्सा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन वाले लेख में है, और व्यापक साझेदारी भारत और जापान वाले लेख में।

पोस्ट यह भी कहती है कि हाई-स्पीड विद्युतीकरण प्रणाली के ट्रांसफ़ॉर्मर, मास्ट क्रॉस आर्म और तार भारत में बनाए जा रहे हैं, और जे-स्लैब बैलास्टरहित पटरी, जो जापानी तकनीक है, पहली बार भारतीय यार्डों में भारतीय इंजीनियरों द्वारा ढाली जा रही है। वैष्णव ने लिखा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ने लगभग 4,000 किमी के सात हाई-स्पीड गलियारों की घोषणा की, जिन पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये (16 ट्रिलियन रुपये) का निवेश अपेक्षित है, और बिज़नेस टुडे ने यह आँकड़ा दोहराया।

यह कब चल सकती है, 5 नवंबर 2026 तक की स्थिति

मंत्रालय की 1 नवंबर की विज्ञप्ति पटरी पर परीक्षण या यात्री सेवा की कोई तारीख़ नहीं देती। अन्य आधिकारिक बयान ये देते हैं:

  • 8 सितंबर को वैष्णव ने कहा कि स्वदेशी ट्रेन मई या जून 2027 तक परीक्षण के लिए पटरी पर होगी, और दो से चार महीने के परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री उसका उद्घाटन करेंगे।
  • अपनी 24 अक्टूबर की पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पटरी पर परीक्षण 2027 के मध्य तक अपेक्षित हैं, कि पहली सेवा 2027 में सूरत से वापी वाले हिस्से पर शुरू होती है, और कि पहली सेवा 2027 की आख़िरी तिमाही में शुरू होती है।
  • 2 जनवरी 2026 को आकाशवाणी ने उनके हवाले से बताया कि भारत को पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 को मिलने की संभावना है, सूरत से बिलिमोरा और फिर वापी से सूरत।

स्रोत हर ब्योरे पर सहमत नहीं हैं। पीआईबी, एएनआई, द ट्रिब्यून और बिज़नेस टुडे निरीक्षण को रविवार 1 नवंबर का बताते हैं, जबकि द हंस इंडिया और न्यूज़ कर्नाटक ने इसे सोमवार की यात्रा लिखा। द हंस इंडिया और न्यूज़ कर्नाटक पूरे गलियारे के चालू होने की अपेक्षित तारीख़ दिसंबर 2029 भी देते हैं; खोले गए पन्नों में किसी आधिकारिक बयान ने पूरी लाइन की तारीख़ नहीं दी। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने नोट किया कि बी28 जापानी ट्रेनसेटों से धीमी होगी, जो 350 किमी/घंटा तक चलती हैं और जिन्हें सरकार जापान से ख़रीदने की उम्मीद रखती है।

बेंगलुरु में वैष्णव ने काम का जो क्रम बताया वह है: स्क्वीज़ परीक्षण, फिर प्रणोदन, फिर जलवायु परीक्षण, और उसके बाद पटरी पर परीक्षण। उनकी 24 अक्टूबर की पोस्ट इस पंक्ति पर ख़त्म होती है: “2027 में आइए, अपनी पहली बुलेट ट्रेन की सवारी का अनुभव कीजिए!”

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. PIB, Ministry of Railways: Bharat's First Bullet Train in Making (1 November 2026)
  2. Ashwini Vaishnaw: India's first bullet train is taking shape (24 October 2026)
  3. PIB, Ministry of Railways: Union Minister for Railways flags off Bengaluru-Mumbai Vande Bharat Sleeper Express Train (1 November 2026)
  4. PIB, Ministry of Railways: India's first Vande Bharat Sleeper trainset unveiled at BEML's Bangalore complex (1 September 2024)
  5. ANI: Excellent progress, Ashwini Vaishnaw after inspecting manufacturing of India's first bullet train in Bengaluru (1 November 2026)
  6. The Tribune: Vaishnaw visits facility manufacturing India's first indigenous bullet train (1 November 2026)
  7. Business Standard: Indigenous bullet train inches closer to reality as squeeze tests progress (1 November 2026)
  8. Business Today: First glimpse of how India's first indigenous bullet train is being built (1 November 2026)
  9. Mathrubhumi English: India's first bullet train under manufacture in Bengaluru's BEML facility (1 November 2026)
  10. News9live: India's indigenous bullet train B28 undergoes squeeze test at BEML Bengaluru (1 November 2026)
  11. News Karnataka: Ashwini Vaishnaw reviews India's first bullet train (2 November 2026)
  12. The Hans India: Vaishnaw visits BEML plant as it gears up for bullet train production (3 November 2026)
  13. India TV News: India-made bullet train body frame ready, will be on track for testing in 2027 (8 September 2026)
  14. Business Standard, Capital Market News: BEML wins order of Rs 866 cr from Integral Coach Factory, Chennai (October 2024)
  15. PSU Watch: BEML secures Rs 5,400 crore order from NHSRCL for bullet train project (September 2026)
  16. Railway Supply: BEML bullet train order is over six times its 2024 high-speed deal (September 2026)
  17. Akashvani News: India's first bullet train to be launched on 15 August 2027 between Mumbai and Ahmedabad (2 January 2026)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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