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चेन्नई की इंटीग्रल कोच फ़ैक्टरी ने 1955 से अब तक 80,000 कोच बनाए हैं और 2024-25 में रिकॉर्ड 3,007 कोच निकाले
अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा

चेन्नई की इंटीग्रल कोच फ़ैक्टरी ने 1955 से अब तक 80,000 कोच बनाए हैं और 2024-25 में रिकॉर्ड 3,007 कोच निकाले

चित्रण: tuput

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चेन्नई के पेरंबूर में स्थित इंटीग्रल कोच फ़ैक्टरी का उद्घाटन 2 अक्टूबर 1955 को हुआ था और फ़रवरी 2026 तक वह अपना 80,000वाँ कोच निकाल चुकी थी। उसने 2024-25 में रिकॉर्ड 3,007 कोच बनाए, और अधिकांश वंदे भारत ट्रेनें उसी ने बनाई हैं।

· · 7 मिनट का पठन

चेन्नई के पेरंबूर की इंटीग्रल कोच फ़ैक्टरी (ICF) 4 फ़रवरी 2026 तक अपना 80,000वाँ कोच निकाल चुकी थी, जब DT Next ने इस पड़ाव की रिपोर्ट दी। PIB के अनुसार यह कोच अमृत भारत श्रृंखला का हिस्सा है, यानी भारतीय रेल की शुरू की हुई पूरी तरह नॉन-एसी ट्रेनें। 2024-25 में फ़ैक्टरी ने 3,007 कोच बनाए, जो रिकॉर्ड है, रेल मंत्रालय ने 3 अप्रैल 2025 को बताया।

पहली वंदे भारत ट्रेन भी ICF से आई है। सरकार की प्रेस शाखा प्रेस इंफ़ॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने फ़रवरी 2019 में कहा कि फ़ैक्टरी ने डिज़ाइन, कंप्यूटर मॉडलिंग और निर्माण अपने यहाँ ही किया, और सिस्टम जोड़ने में कई आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम किया, 18 महीनों में।

स्विस तकनीक, एक बैलगाड़ी और 1955 का पहला कोच

ज्यूरिख़ की स्विस कार एंड एलिवेटर मैन्युफ़ैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के साथ एक तकनीकी समझौते से 1949 में उस जगह ब्रॉड गेज कोच बनाने की तकनीक आई, जिसे तब पेरंबूर कोच फ़ैक्टरी कहा जाता था, डेक्कन क्रॉनिकल ने 2014 में बताया। पहली मशीनें उसी साल चेन्नई बंदरगाह से बैलगाड़ी पर आईं। द न्यूज़ मिनट निर्माण की शुरुआत 1952 की बताता है और कहता है कि फ़ैक्टरी ने शुरू में केवल शेल बनाए, यानी कोचों के खाली स्टील ढाँचे, जो साज-सज्जा के लिए रेलवे ज़ोनों में जाते थे।

जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1955 को फ़ैक्टरी का उद्घाटन किया, और PIB पहले कोच के लिए भी यही दिन बताता है। 100वाँ कोच 1957 में आया और 1,000वाँ 1962 में, जिस साल साज-सज्जा की सुविधा खुली। न्यूज़ टुडे के अनुसार ICF ने 1957-58 में लगभग 74 कोच बनाए।

पचासवें साल तक आँकड़े बदल चुके थे। 18 फ़रवरी 2005 की एक PIB विज्ञप्ति ने कहा कि ICF 200 प्रकारों के 34,000 से अधिक कोच बना चुकी है, जिसकी क्षमता साल में 1,000 की है। उसने अफ़्रीका और एशिया के 13 देशों को कोच निर्यात किए थे, जिनसे Rs 6,978.95 लाख (लगभग Rs 70 करोड़) की विदेशी मुद्रा मिली। उसने भारतीय रेल के लिए पहला स्टेनलेस स्टील कोच बनाया था और 1991 में पैलेस ऑन व्हील्स के लिए 21 कोच की मीटर गेज ट्रेन। लाइन के ब्रॉड गेज में बदलने के बाद ICF ने पैलेस ऑन व्हील्स के नए कोच छह महीने में बनाए।

48,708 से 80,000 तक पाँच पड़ाव

डेक्कन क्रॉनिकल ने सितंबर 2014 तक 48,708 कोच गिने। फ़ैक्टरी ने 2013 में 1,622 बनाए थे, जिन्हें अख़बार ने एक जगह एक साल में बने सबसे अधिक बताया। 50,000वाँ, एक एसी तीन-टियर कोच, 6 जुलाई 2015 को निकलना था, PTI ने बताया, रेल मंत्री रेल भवन से वीडियो लिंक के ज़रिये रोलआउट शुरू करने वाले थे। द न्यूज़ मिनट इस पड़ाव की यही तारीख़ देता है।

60,000वाँ 21 मई 2019 को आया, स्वराज्य ने बताया, जब रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल मौजूद थे और ICF ने 2018-19 के लिए 3,262 कोच का रिकॉर्ड अभी-अभी बनाया था। 75,000वाँ गुरुवार 27 जून 2024 को आया, न्यूज़ टुडे के अनुसार, और वह 69वें वंदे भारत रेक का हिस्सा था। 80,000वें की रिपोर्ट 20 महीने से कम बाद आई। फ़रवरी 2005 में PIB की 34,000 से अधिक की गिनती और उस पड़ाव के बीच ICF ने 21 साल में लगभग 46,000 कोच जोड़े।

सालाना गिनती भी इसी तरह बढ़ती है। द न्यूज़ मिनट के अनुसार ICF ने 2017-18 में 68 प्रकारों के 2,503 कोच बनाए। PIB की अप्रैल 2025 की तालिका 2023-24 के लिए 2,829 और 2024-25 के लिए 3,007 देती है, यानी 178 की बढ़ोतरी। पूरी भारतीय रेल ने 2024-25 में 7,134 कोच बनाए, जो पिछले साल के 6,541 से 9 प्रतिशत अधिक थे, और ICF का हिस्सा 3,007 था, रेल कोच फ़ैक्टरी (RCF) कपूरथला के 2,102 और मॉडर्न कोच फ़ैक्टरी (MCF) रायबरेली के 2,025 से आगे।

जर्मन कोच डिज़ाइन की ओर बदली फ़ैक्टरी

ICF दशकों तक जो पारंपरिक कोच बनाती रही, उन्हें एक जर्मन डिज़ाइन से बदला जा रहा है। LHB का मतलब लिंके हॉफ़मैन बुश है और इस डिज़ाइन में सेंटर बफ़र कप्लर होता है। 2 फ़रवरी 2024 को राज्य सभा को PIB के जवाब में कहा गया कि 2015 से लगभग 23,000 पारंपरिक (ICF-डिज़ाइन) कोच LHB कोचों से बदले जा चुके हैं। उसमें एंटी-क्लाइंबिंग विशेषताओं वाला सेंटर बफ़र कप्लर गिनाया गया है, जो दुर्घटना में कोचों को एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकती हैं, साथ में डिस्क ब्रेक, बायो-टॉयलेट और बड़ी खिड़कियाँ।

DT Next ने दिसंबर 2016 में बताया कि रेलवे बोर्ड ने ICF को स्क्रू-कप्लर वाले कोचों का उत्पादन चरणबद्ध ढंग से बंद करने और ज़्यादा LHB कोच बनाने का आदेश दिया था। उस समय ICF साल में लगभग 300 LHB कोच बना रही थी, जबकि कुल लक्ष्य 2,486 का था। अख़बार ने लिखा कि रेल सुरक्षा पर काकोदकर समिति ने 2012 में यह क़दम सुझाया था। PTI ने जुलाई 2015 में बताया कि रेल मंत्री LHB उत्पादन के लिए उन्नत किए गए ICF परिसर का उद्घाटन करने वाले थे।

2025 तक LHB उत्पादन में ICF तीनों फ़ैक्टरियों में आगे थी। 14 दिसंबर 2025 की एक PIB विज्ञप्ति में अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच ICF के 1,659 LHB कोच बताए गए, जबकि RCF कपूरथला के 1,331 और MCF रायबरेली के 1,234 थे। कुल मिलाकर 4,224 से अधिक बने, जो एक साल पहले के इन्हीं महीनों के 3,590 से 18 प्रतिशत अधिक हैं। 2014 से 2025 के बीच भारतीय रेल ने 42,600 से अधिक LHB कोच बनाए, जबकि 2004 से 2014 में लगभग 2,300।

ट्रेन 18 से अधिकांश वंदे भारत ट्रेनसेटों तक

वंदे भारत ट्रेन ख़ुद चलने वाला सेट है, जिसमें आगे इंजन की जगह कोचों के नीचे बिजली के उपकरण होते हैं, इसलिए उसे पूरे रूट पर ऊपर तार चाहिए, जो विद्युतीकरण अभियान ने दिए। वंदे भारत के आँकड़ों पर हमारा लेख उसकी लागत, गति और आलोचकों को समेटता है, इसलिए यहाँ केवल ICF की भूमिका रखी गई है। पहले सेट में 16 कोच और 1,128 सीटें थीं और उसे 15 फ़रवरी 2019 को हरी झंडी दिखाई गई। PIB की 2019 की विज्ञप्ति ने उसे ऐसी ट्रेन के वैश्विक दामों के आधे से कम का बताया, बिना किसी तुलना का नाम लिए।

तत्कालीन ICF महाप्रबंधक बी. जी. मल्या ने दिसंबर 2023 में द वीक को बताया कि फ़ैक्टरी इस काम के लिए इसलिए उपयुक्त थी कि उसे कई तरह के कोचों का अनुभव है, ख़ासकर वातानुकूलित और ख़ुद चलने वाले कोचों का। PIB का जनवरी 2026 का व्याख्यात्मक लेख कहता है कि वंदे भारत सेट ICF में लगभग 90 प्रतिशत स्थानीयकरण के साथ बनते हैं, और ICF को उन्हें बनाने के लिए 2024 में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार मिला।

रोलिंग स्टॉक वर्ल्ड के अनुसार 2025 के अंत तक पूरे हुए 100 वंदे भारत यात्री सेटों में से 96 ICF ने बनाए। 2026 से 2030 की योजना में ICF को 88 नई सीटर ट्रेनों की 1,500 कारों में से 720 बनाने हैं, जो सबसे बड़ा हिस्सा है, और बाक़ी कपूरथला और रायबरेली बनाएँगे। उसी रिपोर्ट के अनुसार पहले वंदे भारत स्लीपर बेंगलुरु में BEML ICF की तकनीक पर बना रही है।

मेट्रो कोच, विलासिता की ट्रेनें और निर्यात

ICF की रेंज वंदे भारत से कहीं आगे जाती है। न्यूज़ टुडे इलेक्ट्रिक और डीज़ल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (उपनगरीय और छोटी दूरी की सेवाओं में चलने वाली ख़ुद-चालित ट्रेनें), एक तेज़ रफ़्तार दुर्घटना राहत ट्रेन, वातानुकूलित EMU, गोल्डन चैरियट और महाराजा एक्सप्रेस गिनाता है। अगस्त 2022 में फ़ैक्टरी के महाप्रबंधक ए. के. अग्रवाल ने कहा कि ICF उसी वित्त वर्ष से महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के लिए मेट्रो कोच बनाएगी और 50 प्रकारों के 3,500 कोच की योजना है। DT Next की फ़रवरी 2026 की रिपोर्ट ICF के उत्पादों में कोलकाता मेट्रो के कोच, नमो भारत रैपिड रेल और वंदे भारत स्लीपर सेट भी जोड़ती है, और कहती है कि वह एशिया और अफ़्रीका के कई देशों को निर्यात करती है, उनके नाम बताए बिना।

द न्यूज़ मिनट की 2018 की निर्यात-गंतव्यों की सूची में 13 नाम हैं: थाईलैंड, बर्मा, ताइवान, ज़ाम्बिया, फ़िलीपींस, तंज़ानिया, युगांडा, वियतनाम, नाइजीरिया, मोज़ाम्बिक, बांग्लादेश, अंगोला और श्रीलंका।

स्थानीय सामग्री, पहिये और 24 कोच का स्लीपर

मल्या ने द वीक को बताया कि वंदे भारत ट्रेन का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा भारत में बनता है। उन्होंने कहा कि फ़ोर्ज्ड पहिये अब भी आयात होते थे, पहले यूक्रेन और चीन से, और उत्पादन कुछ हद तक दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में चला गया था, जिसकी प्रगति संयंत्र की बाधाओं से धीमी रही। उसी लेख के अनुसार 200 से अधिक विक्रेता ICF को आपूर्ति करते हैं। रेलवे अपने यात्री बेड़े का ख़र्च कैसे जुटाती है, इसके लिए हमारा लेख भारतीय रेल अपना ख़र्च कैसे उठाती है देखें।

15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ICF के महाप्रबंधक ने कहा कि फ़ैक्टरी 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के 50 रेक बनाना शुरू करेगी, स्वराज्य ने अगले दिन बताया। कोच के ढाँचे, कोचों के बीच के जोड़ों और अंडरफ़्रेम उपकरणों के उत्पादन ड्रॉइंग तैयार हैं, और उत्पादन “जल्द” शुरू होना है, कोई तारीख़ नहीं दी गई। 24 कोच वाले संस्करण में 1,224 बर्थ की योजना है, जबकि जनवरी 2026 में हावड़ा और कामाख्या के बीच चलना शुरू करने वाले 16 कोच के स्लीपर में 823 हैं।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. PIB: Registering annual growth of 9 percent, Indian Railways makes 7,134 coaches in last fiscal (3 April 2025)
  2. PIB: Massive Push for Modernisation, Indian Railways Manufactures 42,600+ LHB Coaches in 11 Years (14 December 2025)
  3. PIB: 50 years of Integral Coach Factory (18 February 2005)
  4. PIB: India's First Semi High Speed Train, Vande Bharat Express, to be flagged off by PM tomorrow (14 February 2019)
  5. PIB Explainer: Vande Bharat Express, Modernising Inter-City Rail Mobility in India (16 January 2026)
  6. PIB: About 23000 Conventional Coaches Replaced By LHB Coaches Since 2015, Rajya Sabha reply (2 February 2024)
  7. PIB: Year End Review 2025, Ministry of Railways (December 2025)
  8. DT Next: ICF rolls out 80,000th coach (4 February 2026)
  9. News Today: ICF rolls out 75,000th rail coach (28 June 2024)
  10. Deccan Chronicle: Integral Coach Factory strong at 60 (15 October 2014)
  11. The News Minute: Chugging through TN's Integral Coach Factory, India's oldest train-making facility (18 May 2018)
  12. The Quint (PTI): Railway to launch 50,000th coach on July 6 (3 July 2015)
  13. Swarajya: ICF Chennai flags off 60,000th coach, Train 19 to launch this year (22 May 2019)
  14. DT Next: ICF coaches to retire hurt in 2019 (2 December 2016)
  15. The Week: Meet the makers of the Vande Bharat Express trains (23 December 2023)
  16. Rolling Stock World: Vande Bharat EMU, procurement plans and current production status (28 May 2026)
  17. Swarajya: Railways to soon begin production of 24-coach Vande Bharat Sleeper trains (16 August 2026)
  18. DT Next: ICF to manufacture metro coaches from this year, says general manager (15 August 2022)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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