फ़ोटो: Vyacheslav Argenberg / Wikimedia Commons, CC BY 4.0 (क्रॉप किया गया)
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पहली गाड़ी 24 फ़रवरी 1873 को 3.9 किमी पर चली, 1880 में कलकत्ता ट्रामवेज़ कंपनी ने कमान सँभाली, और 1900 से बिजली की ट्रामें आईं। 2026 में दो रूट चल रहे हैं, और सितंबर में सौंपा गया RITES का अध्ययन उन्हें बढ़ाने के तरीक़े पर काम कर रहा है।
कोलकाता की ट्राम, जो पहली बार 24 फ़रवरी 1873 को घोड़े से खिंचने वाली गाड़ी के रूप में चली थी, भारत के किसी शहर में अब भी काम कर रही इकलौती ट्रामवे है। जुलाई 2026 में वह दो रूट पर चली, जो दक्षिण में गरियाहाट को उत्तर में श्यामबाज़ार से एस्प्लेनेड होकर जोड़ते हैं, और 28 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के परिवहन विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र की परिवहन परामर्श कंपनी RITES को उसकी बहाली और विस्तार का व्यवहार्यता अध्ययन सौंपा।
3.9 किमी की घोड़ा लाइन, जो साल भर में बंद हो गई
कंपनी की अपनी समय-रेखा 24 फ़रवरी 1873 से शुरू होती है, जब कोलकाता की पहली ट्राम सियालदह से आर्मेनियन घाट तक 3.9 किमी चली, घोड़ों से खिंचती हुई। बांग्लापीडिया जोड़ता है कि रास्ता बौबाज़ार और डलहौज़ी स्क्वायर से होकर जाता था। पहली लाइन साल भर नहीं चली। समय-रेखा उसे 20 नवंबर 1873 को बंद दर्ज करती है, और ब्रिटिश भारत के अभिलेखों पर आधारित FIBIS विकी कहता है कि वह यात्रियों की कमी से बंद हुई।
भारतीय ट्रामों पर इतिहास साइट रेलज़ी बंबई और मद्रास की घोड़ा ट्रामों को 1874 का बताती है, यानी कोलकाता की पहली चाल के एक साल बाद।
1880: एक लंदन कंपनी और दूसरी शुरुआत
दोबारा शुरुआत वह जगह है जहाँ स्रोत तारीख़ों पर असहमत हैं। बांग्लापीडिया कहता है कि कलकत्ता कॉर्पोरेशन ने 2 अक्टूबर 1879 को तीन अंग्रेज़ उद्योगपतियों से समझौता किया, कि कलकत्ता ट्रामवेज़ अधिनियम 1880 ने उसे मंज़ूरी दी, और कि 1 नवंबर 1880 से संचालन की अनुमति मिली। पटरियाँ तैयार न होने के कारण उसके वृत्तांत में शुरुआती फेरे केवल डलहौज़ी स्क्वायर तक चले। ग्रेसेस गाइड भी 1 नवंबर 1880 देती है और कहती है कि वायसराय लॉर्ड रिपन ने सियालदह से आर्मेनियन घाट तक की मीटर-गेज घोड़ा ट्रामवे का उद्घाटन किया। कंपनी की समय-रेखा कहती है कि सेवा नवंबर 1880 में फिर शुरू हुई। FIBIS विकी घोड़ा-ट्राम सेवा का आरंभ जनवरी 1881 में रखता है।
कंपनी का पंजीकरण लंदन में हुआ, कंपनी की समय-रेखा के अनुसार 20 दिसंबर 1880 को और ग्रेसेस गाइड के अनुसार 22 दिसंबर 1880 को। बांग्लापीडिया 1884 तक खुली आठ लाइनें गिनाता है: सियालदह, चितपुर और चौरंगी 1881 में, धर्मतल्ला, स्ट्रैंड रोड, श्यामबाज़ार और खिदिरपुर 1882 में, और वेलेस्ली 1884 में।
भाप आज़माई गई, फिर तार
कंपनी के अनुसार भाप के इंजन 1882 में शुरू हुए, और बांग्लापीडिया कहता है कि वे 1882 से 1883 के बीच केवल खिदिरपुर और चौरंगी खंडों पर थोड़े समय चले, जबकि बाक़ी जगह घोड़े गाड़ियाँ खींचते रहे। उन्नीसवीं सदी के अंत तक, ग्रेसेस गाइड और FIBIS विकी दोनों कंपनी के पास 166 ट्राम गाड़ियाँ, लगभग 1,000 घोड़े, सात भाप इंजन और 19 मील (30 किमी) पटरी बताते हैं।
फिर बिजलीकरण ने घोड़ों की जगह ली। कंपनी की समय-रेखा कोलकाता में बिजली की ट्रामों को 1900 का बताती है, जो नोनापुकुर के उसके अपने बिजलीघर से चलती थीं, और कहती है कि हावड़ा 1905 में जुड़ा। बांग्लापीडिया कहता है कि प्रस्ताव 1899 में स्वीकार हुआ और बिजलीकरण 1902 तक पूरा हो गया, पहली बिजली की गाड़ी खिदिरपुर खंड में चली। रेलज़ी पहली बिजली की चाल की तारीख़ 27 मार्च 1902 देती है, एस्प्लेनेड से खिदिरपुर तक। समय-रेखा के अनुसार कंपनी ने 1927 में अपनी बिजली बनाना बंद कर दिया और तब से कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन से ख़रीदती है।
कोलकाता बिजली की ट्रामें चलाने वाला पहला भारतीय शहर नहीं था। FIBIS विकी मद्रास में सार्वजनिक बिजली सेवा को 7 मई 1895 का बताता है, सात गाड़ियों के साथ। 9 अक्टूबर 2026 का बिज़नेस स्टैंडर्ड कोलकाता की ट्राम को “एशिया की सबसे पुरानी बिजली ट्राम प्रणाली” कहता है, और सितंबर 2024 की एक AFP रिपोर्ट का शीर्षक है “एशिया की सबसे पुरानी चालू ट्रामें”।
सबसे चौड़ा नेटवर्क और राज्य का अधिग्रहण
कंपनी के अनुसार 10 फ़रवरी 1943 को लाइनें हावड़ा पुल के आर-पार जोड़ी गईं, जिससे कोलकाता और हावड़ा की मिली-जुली पटरी 68 किमी हो गई। आउटलुक ट्रैवलर एक अलग तारीख़, 3 फ़रवरी 1943, देता है, जब औपचारिक उद्घाटन से पहले एक ट्राम रात में पुल के पार गई थी। समय-रेखा 1960 में 450 गाड़ियों का बेड़ा और 1969 में 70.74 किमी पटरी दिखाती है, इसके बाद हावड़ा खंड 1970 और 1971 में बंद हुआ।
ग्रेसेस गाइड और रेलज़ी के अनुसार राज्य सरकार ने कंपनी का प्रबंधन 19 जुलाई 1967 को सँभाला, और बिज़नेस स्टैंडर्ड रिपोर्ट करता है कि उसने 1976 में उपक्रम का औपचारिक अधिग्रहण किया। पश्चिम बंगाल अधिनियम 54 सन 1976 8 नवंबर 1976 को वह नियत दिन तय करता है जिस दिन कलकत्ता ट्रामवेज़ कंपनी लिमिटेड का उपक्रम राज्य सरकार में निहित हुआ, “जनता के सदस्यों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से”। अधिनियम का पाठ 6 जनवरी 1977 को कलकत्ता गज़ट में प्रकाशित हुआ।
गाड़ियों की आख़िरी बड़ी बढ़ोतरी विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित कलकत्ता अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के साथ आई। कंपनी का विवरण परियोजना के वर्षों, 1982 से 1985, की 189 स्टील-बॉडी गाड़ियाँ गिनता है और उन्हें बेड़े की सबसे नई कहता है। उसी विवरण के अनुसार हर गाड़ी में दो डिब्बे हैं, 54 सवारियाँ बैठ सकती हैं और भीड़ के समय लगभग 120 सवार हो सकते हैं, और वह ऊपरी तारों से खींची गई 550 वोल्ट डीसी पर चलती है।
कम होते रूट और एक अदालती मामला
मेनस्प्रिंग गिरावट के कारणों में भीड़ और मेट्रो निर्माण गिनाता है, जो उसके अनुसार 1978 में शुरू हुआ। मेट्रो का पहला 3.4 किमी का खंड 1984 में खुला, जैसा भारत के मेट्रो नेटवर्क पर हमारा लेख बताता है। कंपनी की समय-रेखा 25 मई 2011 को बेहाला से जोका लाइन बंद होने के बाद रूट की लंबाई 57.17 किमी दर्ज करती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड, ट्राम समर्थकों का हवाला देकर, 2011 में 37 रूट, 2017 तक 15 और 2022 तक दो गिनता है। कंपनी का अपना बिना तारीख़ वाला पन्ना 25 रूट गिनाता है, जिनमें पाँच स्थगित हैं, और 270 गाड़ियों का बेड़ा बताता है, जो आँकड़े उन लाइनों के बंद होने से पहले के हैं।
नागरिक कलकत्ता हाई कोर्ट गए। पीपल यूनाइटेड फ़ॉर बेटर लिविंग इन कलकत्ता (PUBLIC) नाम के एक ट्रस्ट ने ट्राम की पटरियों को डामर से ढकने के ख़िलाफ़ जनहित याचिका दायर की। बिज़नेस स्टैंडर्ड उसके संस्थापक को यह कहते उद्धृत करता है कि स्थगन मई 2023 में मिला। द वीक रिपोर्ट करता है कि जून 2023 में अदालत ने राज्य को ट्रामों को बचाने के उपाय खोजने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया, जिसके सदस्यों में परिवहन अधिकारी, कलकत्ता ट्राम यूज़र्स एसोसिएशन और राज्य धरोहर आयोग का एक सदस्य थे। 15 जनवरी 2025 को रिपोर्ट की गई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य को उन पटरियों को बहाल करने का निर्देश दिया जिन पर डामर बिछा दिया गया था, और द लीफ़लेट रिपोर्ट करता है कि डामर बिछाने पर रोक जारी रही।
उस समय राज्य का रुख़ उसके परिवहन मंत्री ने रखा था। अगस्त 2024 में, इंडियन एक्सप्रेस से डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि “आज के समय में शहर की सड़कों पर ट्राम चलाना व्यावहारिक नहीं है।” सितंबर 2024 में, होमग्रोन के अनुसार, सरकार ने घोषणा की कि मैदान और एस्प्लेनेड के बीच एक छोटे हेरिटेज खंड को छोड़कर सेवाएँ बंद की जाएँगी। मेनस्प्रिंग रिपोर्ट करता है कि हाई कोर्ट ने उस फ़ैसले की समीक्षा के लिए एक सलाहकार समिति बनाई।
2026 में क्या चलता है
द वीक की 1 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार दो रूट 23 ड्राइवरों और 24 कंडक्टरों के साथ चलते हैं, 8 से 10 ट्रामें सुबह 6 बजे से रात 9 बजे के बीच, बिना ठीक-ठाक समय-सारणी के और अक्सर देर से निकलती हुई। 16 जुलाई 2026 को रथ यात्रा के लिए एक सजी हुई ट्राम सवारियों को गरियाहाट से श्यामबाज़ार तक एस्प्लेनेड होकर ले गई, जो कलकत्ता ट्राम यूज़र्स एसोसिएशन और ट्रामयात्रा अभियान का आयोजन था। त्योहारों की भीड़ भी ट्रामें रोकती है: मेनस्प्रिंग रिपोर्ट करता है कि भीड़ के कारण पुलिस ने 9 से 15 अक्टूबर 2024 तक, दुर्गा पूजा के दौरान, सेवाएँ रोक दीं, और वे 22 अक्टूबर को सड़कों पर लौटीं।
मेनस्प्रिंग ने अक्टूबर 2024 में रिपोर्ट किया कि रूट 24 और 29 वाली टॉलीगंज से बालीगंज सेवा उपयोगिता कार्य के लिए रोकी गई थी। बिज़नेस स्टैंडर्ड एसोसिएशन के महासचिव को यह कहते उद्धृत करता है कि वह रूट बहुत थोड़े काम से फिर चालू हो सकता है।
बहाली की योजना
1 जुलाई 2026 को राज्य के परिवहन मंत्री ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि 70 रूट चालू होंगे और नई व्यवस्था बैटरी से चलेगी, बिना ऊपरी तारों के। द वीक जोड़ता है कि ट्रामें वातानुकूलित होंगी, दक्षिणेश्वर और कालीघाट के मंदिरों के बीच एक हेरिटेज रूट की योजना है, और एक न्यू टाउन रूट प्रस्तावित है।
अध्ययन पहला दर्ज क़दम है। बिज़नेस स्टैंडर्ड रिपोर्ट करता है कि परिवहन विभाग ने 28 सितंबर 2026 को RITES को बहाली, आधुनिकीकरण और विस्तार के व्यवहार्यता अध्ययन के लिए आशय-पत्र दिया, और उसके प्रधान सचिव को अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट दो से ढाई महीने में मिलने की उम्मीद है। RITES ने अख़बार को बताया कि सर्वेक्षण और हितधारकों से परामर्श अभी चल रहे थे। अख़बार जोड़ता है कि राज्य की फ़रवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका के वापस लिए जाने की प्रक्रिया में होने की जानकारी है, और जून के बजट में ट्रामों के लिए कोई प्रावधान नहीं था, PUBLIC के संस्थापक के अनुसार।
सवारी कैसे करें
कंपनी का विवरण एस्प्लेनेड, श्यामबाज़ार, बालीगंज और पाँच अन्य जगहों पर टर्मिनस गिनाता है, और किराया 5 से 6 रुपये बताता है, तथा दो विशेष गाड़ियों पर सप्ताहांत की “हेरिटेज राइड” 10 रुपये में। वह पन्ना बिना तारीख़ का है और उसकी समय-रेखा 2014 पर रुक जाती है, इसलिए मौजूदा किराया कंडक्टर से पूछ लें। सितंबर 2024 की एक AFP रिपोर्ट ने गति अधिकतम लगभग 20 किमी प्रति घंटा बताई।
स्मारिका ट्राम संग्रहालय, जो 2014 में एस्प्लेनेड डिपो में एक पुरानी दो-बोगी गाड़ी के भीतर बनाया गया, में एक गैलरी और एक कैफ़े था, और आउटलुक ट्रैवलर ने 2023 में रिपोर्ट किया कि वह गुरुवार को छोड़कर हर दिन दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है। उसी लेख में उसका पता 6 एस्प्लेनेड ईस्ट दिया गया है।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- Calcutta Tramways Company (West Bengal Transport Corporation): timeline (company website, entries run to 2014)
- Calcutta Tramways Company (West Bengal Transport Corporation): About CTC (undated company description of network and fleet)
- Government of West Bengal: Calcutta Tramways Company (Acquisition of Undertaking) Act, 1976 (West Bengal Act 54 of 1976, text hosted by the company)
- Business Standard: Back to the future, can Kolkata's iconic trams make a grand comeback? (9 October 2026)
- The Week: Trams to make a comeback to Kolkata streets in a big way (1 July 2026)
- The Week: On Rath Yatra, a vintage tram carries Kolkata's hopes for revival (16 July 2026)
- The Week: Calcutta HC raps WB govt, asks to restore tram tracks illegally bituminised (15 January 2025)
- The Leaflet: Calcutta High Court continues the stay on bituminisation of tram tracks (25 January 2025)
- Banglapedia: Calcutta Tramways
- Graces Guide: Calcutta Tramways Co
- FIBIS wiki: Calcutta Tramways Company
- FIBIS wiki: Madras Tramways
- Railzi: History of trams in India, 1873 to today
- Deccan Herald: West Bengal State Transport Department plans to phase out trams, run only one heritage route (3 August 2024)
- Homegrown: A streetcar named history, Kolkata's iconic trams ride into the sunset after 151 years (25 September 2024)
- Mainspring: The end for Calcutta's trams? (21 October 2024)
- The Star (AFP): Asia's oldest operating trams see slow death in India (22 September 2024)
- Outlook Traveller: Asia's only tram service celebrates 150 years (February 2023)
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