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लेह 3,500 मीटर की ऊँचाई पर है, भारतीय पर्यटकों को अगस्त 2021 से नुब्रा, पैंगोंग या त्सो मोरीरी के लिए इनर लाइन परमिट की ज़रूरत नहीं रही, और आधिकारिक ग्रीन फ़ीस 400 रुपये प्रति व्यक्ति है
यात्रा

लेह 3,500 मीटर की ऊँचाई पर है, भारतीय पर्यटकों को अगस्त 2021 से नुब्रा, पैंगोंग या त्सो मोरीरी के लिए इनर लाइन परमिट की ज़रूरत नहीं रही, और आधिकारिक ग्रीन फ़ीस 400 रुपये प्रति व्यक्ति है

चित्रण: tuput

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लेह ज़िला प्रशासन के परमिट पोर्टल का कहना है कि इनर लाइन परमिट सिर्फ़ विदेशी पर्यटकों पर लागू होता है, और पर्वतीय परिषद की 2021 की एक अधिसूचना ग्रीन फ़ीस 400 रुपये प्रति व्यक्ति तय करती है। यही प्रशासन लेह पहुँचने वाले हर व्यक्ति से कहता है कि ऊपर जाने से पहले वहाँ कम से कम 48 घंटे बिताएँ। नीचे हर फ़ीस, नियम और सड़क की तारीख़ के साथ उसके स्रोत की तारीख़ या वह दिन दर्ज है जब हमने उसे जाँचा, यानी 8 अक्टूबर 2026।

· · 8 मिनट का पठन

किसी भारतीय नागरिक को नुब्रा, पैंगोंग त्सो या त्सो मोरीरी जाने के लिए इनर लाइन परमिट नहीं चाहिए। लेह ज़िला परमिट पोर्टल के FAQ पन्ने के अनुसार इनर लाइन परमिट “केवल विदेशी पर्यटकों पर लागू होता है”, और हमने इसे 8 अक्टूबर 2026 को पढ़ा। वॉइस ऑफ़ लद्दाख ने 7 अगस्त 2021 को रिपोर्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 6 अगस्त 2021 को भारतीय नागरिकों के लिए यह शर्त हटाने की अधिसूचना जारी की। हम आदेश को ख़ुद नहीं खोल सके, इसलिए यह तारीख़ समाचार रिपोर्ट पर टिकी है।

भारतीय पर्यटक को अब भी क्या करना होता है

उसी पोर्टल पर घरेलू पंजीकरण का एक फ़ॉर्म चलता है। 8 अक्टूबर 2026 को उसमें नाम, मोबाइल नंबर, फ़ोटो पहचान-पत्र (आधार, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या कोई और), पता और यात्रा शुरू होने की तारीख़ माँगी गई थी। पन्ने की एक सूचना के अनुसार ऑनलाइन भुगतान के बाद भुगतान की पर्ची सिर्फ़ चेक पोस्टों पर जाँची जाती है, ज़िला मजिस्ट्रेट के दफ़्तर में नहीं। यह भी कहा गया है कि पर्यटकों को परमिट के साथ लेह पहुँचने का अपना बोर्डिंग पास दिखाना होगा। पन्ना यह नहीं बताता कि सड़क से आने वाले इसकी जगह क्या दिखाएँ।

किसी आधिकारिक पन्ने पर रुपये की संख्या वाली एकमात्र फ़ीस पर्यावरण शुल्क है, जिसे ग्रीन फ़ीस भी कहा जाता है। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) के उपायुक्त और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की 14 अक्टूबर 2021 की एक अधिसूचना पर्यटकों से पोर्टल के ज़रिये 400 रुपये प्रति व्यक्ति चुकाने को कहती है। 8 अक्टूबर 2026 को जब हमने देखा, वह अधिसूचना पोर्टल पर लगी हुई थी, और हमें कोई नई नहीं मिली। वह यह नहीं बताती कि यह रक़म प्रति यात्रा है या प्रति वर्ष।

10 अगस्त 2021 की एक ज़िला प्रेस विज्ञप्ति कहती है कि फ़ीस ढाँचे में ग्रीन फ़ीस के अलावा रेड क्रॉस फ़ंड का योगदान और वन्यजीव शुल्क भी शामिल हैं। वह इन दोनों की रक़म नहीं देती, और जो दूसरे आधिकारिक पन्ने हमने खोले उनमें भी नहीं है, इसलिए हम कोई रक़म नहीं छापते। पोर्टल कहता है कि स्थानीय ट्रैवल एजेंट के ज़रिये की गई बुकिंग पर कुल फ़ीस पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती है। अतिरिक्त उपायुक्त की 21 सितंबर 2023 की एक अलग सूचना चेतावनी देती है कि निजी एजेंसियों या व्यक्तियों द्वारा जारी किए गए नक़ली पर्यावरण-शुल्क पर्चियों की शिकायतें आई हैं, और कहती है कि दोषियों पर लाइसेंस रद्द करने समेत कार्रवाई होगी।

विदेशी पर्यटक और संरक्षित क्षेत्र परमिट

विदेशी नागरिक अब भी परमिट व्यवस्था के तहत हैं। पोर्टल का सूचना-पैनल कहता है कि पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, ताइवान और हाँगकाँग के नागरिकों को, और पाकिस्तानी मूल के विदेशी नागरिकों को, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय से संरक्षित क्षेत्र परमिट चाहिए। राजनयिक, संयुक्त राष्ट्र, आधिकारिक और पत्रकार पासपोर्ट धारकों को यह विदेश मंत्रालय से चाहिए। पैंगोंग, नुब्रा, खारदुंग ला और त्सो मोरीरी वे उदाहरण हैं जो वह देता है।

वॉइस ऑफ़ लद्दाख की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार विदेशियों के लिए परमिट की वैधता सात दिन से बढ़ाकर 15 दिन कर दी गई। पोर्टल का सर्किट पन्ना 8 अक्टूबर 2026 को घरेलू पर्यटकों के लिए 23 सर्किट और विदेशियों के लिए दो गिनाता है: अकेला लेह शहर, और लामायुरू, खलत्से, स्कुरबुचन और हनू। वह सूची 2021 के बदलाव से पीछे रह सकती है, इसलिए विदेशी पर्यटक को किसी पंजीकृत ट्रैवल एजेंट से पक्का करना चाहिए कि कौन-से सर्किट खुले हैं।

ऊँचाई: 48 घंटे का नियम

लद्दाख पुलिस के पर्यटक-सुरक्षा पन्ने के अनुसार, जिसे 8 अक्टूबर 2026 को पढ़ा गया, लेह 3,500 मीटर पर बसा है। इन्क्रेडिबल इंडिया पैंगोंग त्सो को 4,420 मीटर और त्सो मोरीरी को 4,600 मीटर पर रखता है।

लेह ज़िला प्रशासन की सूचना, जो 6 जून 2026 को अद्यतन हुए पन्ने पर है, कहती है कि लेह पहुँचने वाले हर पर्यटक को खारदुंग ला और पैंगोंग जैसे ऊँचे इलाक़ों में जाने से पहले कम से कम 48 घंटे ख़ुद को ढालना होगा, और तब तक वह लेह शहर के पास की जगहें देख सकता है। केंद्र शासित प्रदेश के पर्यटन निदेशालय की 16 जून 2022 की सलाह खारदुंग ला, चांग ला, पैंगोंग, त्सो मोरीरी और पेंज़ीला के लिए यही कहती है, और 48 घंटे लेह में उतरने के समय से गिनती है। लद्दाख पुलिस का पन्ना लेह में 24 से 48 घंटे आराम की सलाह देता है। ज़िला प्रशासन की सूचना ही वह है जो इसे एक शर्त के रूप में कहती है।

लद्दाख पर्यटन का सलाह-पन्ना दिन-दर-दिन की योजना देता है: पहले दिन पूरा आराम, दूसरे दिन लेह शहर में छोटी आसान सैर, तीसरे दिन आसपास की जगहें, और उसके बाद एक दिन में 500 मीटर से ज़्यादा अतिरिक्त ऊँचाई नहीं। परमिट पोर्टल की स्वास्थ्य सलाह कहती है कि सड़क यात्रा को अनुकूलन नहीं गिना जाता। दोनों सूचियाँ सिरदर्द, मतली, ख़राब नींद और भूख की कमी को शुरुआती संकेत बताती हैं। दोनों यह भी कहती हैं कि गंभीर संकेतों पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए, और लद्दाख पर्यटन कहता है कि नीचे उतरें और लेह के SNM अस्पताल या सबसे नज़दीकी सेना या ITBP चौकी से मदद लें। ये प्रशासन के प्रकाशित निर्देश हैं, हमारी चिकित्सा सलाह नहीं। दोनों पन्ने खुराक के साथ दवाइयाँ गिनाते हैं, और हम उनमें से कुछ नहीं दोहराते: यात्रा से पहले डॉक्टर से पूछें।

लेह पहुँचना

इन्क्रेडिबल इंडिया कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डे (IXL) को लेह का हवाई अड्डा और जम्मू तवी को सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन बताता है। ज़िले का पहुँचने वाला पन्ना, जो 3 जनवरी 2025 को अद्यतन हुआ, कहता है कि दिल्ली से उड़ान क़रीब एक घंटे की है। परमिट पोर्टल का पंजीकरण फ़ॉर्म KBR लेह हवाई अड्डा, खलत्से और उपशी को प्रवेश-बिंदु गिनाता है।

दो सड़कें हैं। सीमा सड़क संगठन (BRO) कहता है कि मनाली से लेह राजमार्ग, NH 3, 427 किलोमीटर का है, और श्रीनगर से कारगिल होकर लेह राजमार्ग, NH-1D, 422 किलोमीटर का (PIB, 25 मार्च 2023)। ज़िले का अपना पन्ना 473 किलोमीटर और 434 किलोमीटर देता है, जो BRO के आँकड़ों से मेल नहीं खाते। मनाली की सड़क अब अटल सुरंग से होकर गुज़रती है, और श्रीनगर की सड़क द्रास और कारगिल से, जहाँ 1999 का युद्ध लड़ा गया था।

खुले रहने के महीनों के लिए ज़िले का पन्ना कहता है कि श्रीनगर से लेह मई से नवंबर या दिसंबर तक वाहनों के लिए खुला रहता है, और मनाली से लेह मई या जून से सितंबर या अक्टूबर तक। BRO की 2023 की विज्ञप्ति कहती है कि मनाली राजमार्ग आम तौर पर नवंबर के अंत से मार्च तक बंद रहता है, और BRO ने उस साल 25 मार्च को उसे खुला घोषित किया। BRO की खोलने की तारीख़ पर्यटकों के लिए हरी झंडी नहीं है। द ट्रिब्यून ने 27 मार्च 2022 को रिपोर्ट किया कि BRO ने बारालाचा ला पर एकल-लेन यातायात बहाल कर दिया था, जबकि लाहौल और स्पीति प्रशासन को सामान्य यातायात की मंज़ूरी देनी बाक़ी थी, और उसने पर्यटकों से कहा कि जब तक वह न दे, दारचा से आगे न जाएँ।

श्रीनगर वाली सड़क पर ज़ोजिला दर्रा 2025 में 27 फ़रवरी से 16 मार्च तक बंद रहा, और PIB के अनुसार BRO ने उसे 1 अप्रैल 2025 को खोला। PIB कहता है कि वहाँ बंदी कुछ दशक पहले के क़रीब छह महीनों से घटकर कुछ हफ़्तों की रह गई है।

कब जाएँ

आधिकारिक पन्ने एक ही अवधि पर सहमत नहीं हैं। इन्क्रेडिबल इंडिया का लेह पन्ना फ़रवरी से अक्टूबर को आदर्श समय कहता है और एक मासिक तापमान तालिका देता है जो जनवरी में क़रीब शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे से जुलाई में क़रीब 33 डिग्री तक जाती है। लद्दाख पर्यटन की साइट वसंत को मार्च और अप्रैल, गर्मी को मई से सितंबर, शरद को सितंबर और अक्टूबर और सर्दी को नवंबर से फ़रवरी गिनाती है। उसकी सलाह कहती है कि सर्दियों में न्यूनतम तापमान अक्टूबर से मार्च तक शून्य से 30 नीचे तक जा सकता है। लद्दाख पुलिस का पन्ना कहता है कि मनाली और श्रीनगर वाली सड़कों पर जून और जुलाई में भूस्खलन और बर्फ़ से रुकावट का ख़तरा सबसे ज़्यादा रहता है, पिघलती बर्फ़ की बाढ़ से बचने के लिए जल्दी निकलने की सलाह देता है, और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के लिए सेडान की जगह SUV या गाइड वाले टूर सुझाता है।

वे चार जगहें जो ज़्यादातर पहली यात्राओं में शामिल होती हैं

लेह आधार है। इन्क्रेडिबल इंडिया के अनुसार उसका नौ मंज़िला महल 1630 के दशक में सेंगे नामग्याल ने बनवाया।

उसी पन्ने के अनुसार नुब्रा लेह से खारदुंग ला पार करके मध्य एशिया की पुरानी कारवाँ राह के साथ-साथ जाने वाला सर्किट है। पोर्टल का सर्किट पन्ना उस पर खारदोंग, खलसर, हुंदर, डिस्केट और तुरतुक गिनाता है, और सियाचिन बेस कैंप एक अलग सर्किट के रूप में आता है। ऑपरेशन मेघदूत पर हमारा लेख ग्लेशियर पर सेना की पकड़ के बारे में है।

इन्क्रेडिबल इंडिया के अनुसार पैंगोंग त्सो 130 किलोमीटर लंबी है। पोर्टल उसके सर्किट के रूप में खारू, चांग ला, दुरबुक, तांगत्से और लुकुंग गिनाता है। त्सो मोरीरी 140 वर्ग किलोमीटर में फैली है और पोर्टल के उपशी और कोरज़ोक सर्किट से पहुँचा जाता है। इन्क्रेडिबल इंडिया कहता है कि दोनों झीलों तक सड़क से पहुँचा जा सकता है पर नियमित बसें नहीं हैं। पर्यटन निदेशालय की 2022 की सलाह कहती है कि पैंगोंग इलाक़ा अधिसूचित वन्यजीव अभयारण्य है जहाँ ठहरने की जगहें सीमित हैं, और पर्यटकों से कहती है कि बुकिंग के बिना वहाँ रुकने की योजना न बनाएँ।

सड़क की स्थिति रोज़ बदलती है

हमने जो पन्ने खोले उनमें से किसी में आज की सड़क-स्थिति नहीं है। पर्यटन निदेशालय अपने लेह दफ़्तर का नंबर 01982-257788 देता है। लाहौल और स्पीति का आधिकारिक सड़क-स्थिति पन्ना, जिसे हमने 8 अक्टूबर 2026 को पढ़ा, मनाली से केलांग को खुला और केलांग से लेह को खुला दिखा रहा था, और उसकी आख़िरी अद्यतन तारीख़ 14 मई 2024 थी।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Leh District Permit Tracking System (LAHDC and District Administration Leh): FAQs
  2. Leh District Permit Tracking System: domestic tourist registration page
  3. Leh District Permit Tracking System: circuits to visit
  4. Office of the Deputy Commissioner and CEO, LAHDC Leh: Notice on collection of environmental fee (green fee), 14 October 2021
  5. Office of the Deputy Commissioner, Leh: Notice on fake environmental fee slips, 21 September 2023
  6. District Administration Leh: Green fee shall continue to remain in effect for domestic tourists visiting Leh, 10 August 2021
  7. District Administration Leh: 48 hours acclimatization for tourists arriving in Leh (page updated 6 June 2026)
  8. Administration of UT Ladakh, Directorate of Tourism: Advisory for tourists and visitors, 16 June 2022
  9. Ladakh Tourism (UT Ladakh): Advisory
  10. Leh District Permit Tracking System: health advisory
  11. Ladakh Police: tourist safety
  12. District Administration Leh: How to reach (page updated 3 January 2025)
  13. Incredible India (Ministry of Tourism): Leh
  14. PIB, Ministry of Defence: BRO opens strategic Leh-Manali Highway in record time of 138 days, 25 March 2023
  15. PIB, Ministry of Defence: Border Road Organization opens Zojila Pass in record time of 32 days, 1 April 2025
  16. The Tribune: Ladakh is now connected by road from both sides with reopening of Manali-Leh highway by the BRO, 27 March 2022
  17. District Lahaul and Spiti, Himachal Pradesh: Road status
  18. Voice of Ladakh: Indian nationals no longer need permit to visit protected areas of Ladakh, 7 August 2021

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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