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लता मंगेशकर ने 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में ऐ मेरे वतन के लोगों गाया और 2001 में उन्हें भारत रत्न मिला
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लता मंगेशकर ने 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में ऐ मेरे वतन के लोगों गाया और 2001 में उन्हें भारत रत्न मिला

चित्रण: tuput

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लता मंगेशकर ने ऐ मेरे वतन के लोगों पहली बार सार्वजनिक रूप से दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गाया, जहाँ दर्शकों में राष्ट्रपति राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नेहरू थे। भारत ने 2001 में उन्हें भारत रत्न दिया। 6 फ़रवरी 2022 को 92 साल की उम्र में उनके निधन पर सरकार ने दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।

· · 7 मिनट का पठन

27 जनवरी 1963 की शाम लता मंगेशकर ने दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में “ऐ मेरे वतन के लोगों” पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया। दर्शकों में राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। कवि प्रदीप ने शब्द लिखे, सी. रामचंद्र ने धुन बनाई, और समाचार एजेंसी आईएएनएस ने 2013 में बताया कि गीत ने नेहरू को रुला दिया।

भारत सरकार ने उन्हें 1999 में पद्म विभूषण और 2001 में भारत रत्न दिया। 6 फ़रवरी 2022 को उनका निधन हुआ तो सरकार ने दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। गीत के गाए जाने की कहानी के ब्योरे अलग-अलग हैं, इसलिए यह लेख हर दावे का श्रेय उस व्यक्ति या आउटलेट को देता है जो उसे करता है।

1962 के युद्ध के बाद एक चंदा-कार्यक्रम

पत्रकार अजय मनकोटिया ने 2016 में डेलीओ में लिखा कि निर्माता महबूब ख़ान ने स्टेडियम में राष्ट्रीय रक्षा कोष के लिए चंदा जुटाने का कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में नौशाद, शंकर जयकिशन और मदन मोहन के गाने थे, और सी. रामचंद्र को उसका समापन करना था। मनकोटिया के अनुसार रामचंद्र बिना किसी गीत के पहुँचे और प्रदीप से एक लिखने को कहा।

चीन के साथ युद्ध एक साल पहले लड़ा गया था। उसकी एक लड़ाई के लिए, 18 नवंबर 1962 को रेज़ांग ला पर tuput का लेख रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक इतिहास का अनुसरण करता है।

आईएएनएस के मुताबिक़ पहली पंक्तियाँ प्रदीप को मुंबई के माहिम बीच पर टहलते हुए सूझीं। उन्होंने साथ टहल रहे एक आदमी से कलम उधार ली और सिगरेट के पैकेट के फ़ॉइल पर शुरुआती अंतरा लिखा। मनकोटिया जोड़ते हैं कि प्रदीप ने क़रीब सौ अंतरे लिखे और रामचंद्र ने पाँच-छह चुने। मनकोटिया लिखते हैं कि उस रात के बाक़ी आइटम वीरता के तेज़ रफ़्तार गाने थे, जबकि प्रदीप का गीत सैनिकों के बलिदानों के बारे में था।

किसे गाना है, इसके चार ब्योरे

गायिका कार्यक्रम से कुछ दिन पहले तक तय नहीं थी, और स्रोत इस पर असहमत हैं कि यह कैसे तय हुई।

प्रदीप की बेटी मितुल ने आईएएनएस को बताया कि रामचंद्र और लता के बीच किसी ग़लतफ़हमी की वजह से रामचंद्र ने आशा भोसले को चुना। उनके पिता को लगता था कि केवल लता ही इसके साथ न्याय कर सकती हैं, उन्होंने उन्हें मनाया, और वे इस शर्त पर राज़ी हुईं कि वे रिहर्सल में मौजूद रहें।

मनकोटिया के संस्करण में रामचंद्र और लता आपस में बातचीत नहीं कर रहे थे। आशा भोसले ने रिहर्सल शुरू की, प्रदीप ने कार्यक्रम से छह दिन पहले रामचंद्र को फ़ोन करके बताया कि लता तैयार हैं, और दोनों युगल गीत पर सहमत हुए। मनकोटिया लिखते हैं कि इसके बाद आशा ने कहा कि वे अस्वस्थ हैं और हट गईं।

मनकोटिया संगीत इतिहासकार राजू भारतन का ब्योरा भी देते हैं, जिसमें लता इसी शर्त पर राज़ी हुईं कि वे इसे सोलो रिकॉर्ड करें और इसी वजह से आशा को हटा दिया गया। लता का अपना ब्योरा, जैसा मनकोटिया बताते हैं, यह है कि उन्होंने पहले रिहर्सल के लिए वक़्त न होने की वजह से मना किया, फिर इसे अपनी बहन के साथ गाना चाहा, और आशा ने ख़ुद को अलग कर लिया।

इन सभी ब्योरों का अंत एक ही जगह होता है। लता ने धुन एक टेप से सीखी और 26 जनवरी 1963 को दिल्ली उड़कर पहुँचीं, और रामचंद्र, जो पहले से वहाँ थे, उनके साथ रिहर्सल नहीं कर पाए।

नेशनल स्टेडियम की वह रात

आईएएनएस और इंडिया टीवी की न्यूज़ डेस्क समेत ज़्यादातर ब्योरे प्रस्तुति की तारीख़ 27 जनवरी 1963 देते हैं। LIFE के फ़ोटो आर्काइव पर बना एक गूगल आर्ट्स एंड कल्चर पेज 26 जनवरी देता है, यानी ख़ुद गणतंत्र दिवस।

मनकोटिया बासु मनोहारी की बाँसुरी से शुरू होती प्रस्तावना का और उस कोरस का वर्णन करते हैं जिसे रामचंद्र ने गूँज देने के लिए परदे के पीछे छिपाया था, ताकि लगे कि पूरा देश गा रहा है। वे लिखते हैं कि उनके गाते वक़्त स्टेडियम में सन्नाटा छा गया और फिर तालियाँ गूँज उठीं। लता के अपने बयान के मुताबिक़, जैसा वे बताते हैं, वे घबराई हुई थीं और ख़त्म होने पर राहत में थीं। फिर महबूब ख़ान उन्हें मंच के पीछे ले गए क्योंकि नेहरू उनसे मिलना चाहते थे, और उन्होंने कहा कि नेहरू को गीत बहुत पसंद आया।

प्रदीप को बुलाया नहीं गया था, उनकी बेटी ने आईएएनएस को बताया। 21 मार्च 1963 को जब नेहरू मुंबई आए, तो प्रदीप ने आर. एम. हाई स्कूल के एक समारोह में उन्हें यह गीत सुनाया और मूल हस्तलिखित कविता उन्हें सौंपी। मनकोटिया याद करते हैं कि एचएमवी ने 1963 में गीत 78 आरपीएम रिकॉर्ड पर जारी किया।

13 की उम्र से शुरू हुआ करियर

पीआईबी का जीवन-परिचय कहता है कि लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ, मूल नाम हेमा, पाँच भाई-बहनों में सबसे बड़ी, और उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक और रंगमंच अभिनेता थे। एसोसिएटेड प्रेस की श्रद्धांजलि जन्मस्थान इंदौर बताती है। उन्होंने अपना पहला प्लेबैक गीत मराठी फ़िल्म किती हसाल के लिए 13 की उम्र में और पहला हिंदी फ़िल्म प्लेबैक गीत 1946 में आप की सेवा में के लिए रिकॉर्ड किया।

एसोसिएटेड प्रेस 1960 की फ़िल्म मुग़ल-ए-आज़म को उनके करियर का निर्णायक पल बताता है। 1972 में उन्होंने परिचय के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पहला राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीता, और पीआईबी कुल मिलाकर तीन राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और महिला पार्श्व गायन के चार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार गिनता है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स 12 फ़रवरी 1994 को वह तारीख़ बताता है जब वे फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार पाने वाली पहली महिला और पहली गायिका बनीं।

2006 की फ़िल्म रंग दे बसंती में ए. आर. रहमान ने उन्हें “लुका छुपी” गीत दिया, जिसे आउटलुक एक लोरी बताता है जिसमें लता माँ हैं और रहमान बेटे। फ़िल्म पर tuput का लेख रंग दे बसंती के बीस साल है। एसोसिएटेड प्रेस ध्यान दिलाता है कि उन्हें मेलोडी क्वीन और भारत की स्वर कोकिला (नाइटिंगेल ऑफ़ इंडिया) कहा गया। tuput का सरोजिनी नायडू का प्रोफ़ाइल दो ब्योरे दर्ज करता है कि वह दूसरी उपाधि पहली बार नायडू को कैसे मिली।

सम्मान, जैसा गज़ट उन्हें दर्ज करता है

26 जनवरी 1999 की राष्ट्रपति की अधिसूचना पद्म विभूषण पाने वालों में “कुमारी लता दीनानाथ मंगेशकर (कला-संगीत-सिने कला), मुंबई” को दर्ज करती है। 26 जनवरी 2001 की अधिसूचना सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के लिए “सुश्री लता दीनानाथ मंगेशकर (कला-संगीत), मुंबई” को दर्ज करती है। द ट्रिब्यून ने 21 मार्च 2001 को नई दिल्ली से बताया कि राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने उस दिन एक समारोह में उन्हें और शहनाई वादक बिस्मिल्लाह ख़ान को अलंकृत किया।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स उनके दादा साहब फाल्के पुरस्कार, सिनेमा के लिए सरकार के जीवन भर के योगदान के सम्मान, की तारीख़ 1989 बताता है। एपी के मुताबिक़ फ़्रांस ने 2007 में उन्हें लीजन ऑफ़ ऑनर का ऑफ़िसर बनाया। पीआईबी जोड़ता है कि मध्य प्रदेश सरकार ने 1984 में और महाराष्ट्र सरकार ने 1992 में गायन प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए लता मंगेशकर पुरस्कार शुरू किए।

गिनीज़ की गिनती और वह तय क्यों नहीं है

एक पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार 1974 में गिनीज़ ने उन्हें इतिहास की सबसे ज़्यादा रिकॉर्ड करने वाली कलाकार लिखा, 1948 से 1974 के बीच 20 भारतीय भाषाओं में कम से कम 25,000 गीतों का श्रेय देते हुए। मोहम्मद रफ़ी ने इस प्रविष्टि पर आपत्ति की और तर्क दिया कि उन्होंने ज़्यादा रिकॉर्ड किए हैं। पीटीआई के अनुसार एक बाद की सूची ने उनका कुल 1948 से 1987 के लिए कम से कम 30,000 गीत कर दिया, और गिनीज़ ने 1991 में बिना कारण बताए वह श्रेणी हटा दी।

पीटीआई की उसी रिपोर्ट के मुताबिक़ गिनीज़ आज उनकी बहन आशा भोसले को सबसे ज़्यादा स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सिंगल्स) के लिए सूचीबद्ध करता है, 1947 से अब तक 11,000 गीतों तक। एसोसिएटेड प्रेस एक छोटा आँकड़ा लेता है: एक हज़ार से ज़्यादा फ़िल्मों में 5,000 से ज़्यादा गीत। लता ने 2021 में पीटीआई से कहा कि उनके पास अपने अप्रकाशित गीतों का कोई हिसाब नहीं है, और पीटीआई ने लिखा कि उन्होंने आँकड़ों की कभी ज़्यादा परवाह नहीं की।

6 और 7 फ़रवरी 2022

पीआईबी ने बताया कि लता मंगेशकर का निधन 6 फ़रवरी 2022 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 साल की उम्र में हुआ, 8 जनवरी को कोविड-19 पॉज़िटिव पाए जाने के बाद भर्ती किए जाने पर। सरकार ने दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। ईस्टर्न मिरर, मुख्य सचिवों को गृह मंत्रालय के संदेश की रिपोर्ट करते हुए, कहता है कि ध्वज 6 और 7 फ़रवरी को आधा झुका रहा और कोई सरकारी मनोरंजन नहीं होना था।

उसी शाम मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रद्धांजलि देने दिल्ली से उड़कर आए। पीआईबी उपस्थित लोगों में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शरद पवार, सचिन तेंदुलकर, शंकर महादेवन और शाहरुख़ ख़ान को गिनाता है। पीआईबी के मुताबिक़ अंतिम संस्कार की रस्में उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने निभाईं।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Press Information Bureau, Mumbai, 6 February 2022 (1:47 PM): Legendary singer Lata Mangeshkar passes away at the age of 92; Government announces a two-day national mourning
  2. Press Information Bureau, Mumbai, 6 February 2022 (8:24 PM): Nation bids adieu to Lata Mangeshkar, mortal remains laid to rest in Mumbai with full state honours
  3. The Gazette of India, Extraordinary, 21 March 2001: President's Secretariat notification of 26 January 2001 (Bharat Ratna to Lata Dinanath Mangeshkar; Padma awards 2001)
  4. The Gazette of India, Extraordinary, 23 March 1999: President's Secretariat notification of 26 January 1999 (Padma awards 1999, including Padma Vibhushan)
  5. The Tribune, 22 March 2001 (New Delhi, 21 March): Bharat Ratna for Lata, Bismillah Khan
  6. Guinness World Records: First female winner of the Lifetime Achievement Award at the Filmfare Awards
  7. IANS via India TV, 25 January 2013: Patriotic song Ae Mere Watan Ke Logon turns 50
  8. India TV News Desk, 25 January 2013: Ai Mere Watan Ke Logon completes 50 years
  9. Ajay Mankotia, DailyO (India Today Group), 26 January 2016: Ai mere watan ke logon, the story behind the song that moved a nation to tears
  10. The Better India: Ae Mere Watan Ke Logon, the story of the song that drove Nehru to tears
  11. Google Arts & Culture (LIFE Photo Collection): Ae Mere Watan Ke Logon story page
  12. PTI via Business Today, 6 February 2022: 25K or 30K, Lata Mangeshkar's songs list tall but disputed
  13. The Associated Press via CBC News, 6 February 2022: Celebrated singer Lata Mangeshkar, known as Nightingale of India, dead at 92
  14. ABC News (Australia), 6 February 2022: Lata Mangeshkar, iconic Bollywood singer and India's Nightingale, dies at 92
  15. Eastern Mirror, 6 February 2022: 2-day national mourning, state funeral for Lata Mangeshkar
  16. Rini Dasgupta, Outlook, 26 January 2026: Rang De Basanti at 20, the soundtrack that refuses to age

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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