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नया पंबन पुल 72.5 मीटर का रेल स्पैन जहाज़ों के लिए 17 मीटर ऊपर उठाता है, उसी रास्ते पर 111 साल पहले एक अमेरिकी डिज़ाइन का रोलिंग-लिफ्ट स्पैन खुला था
अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा

नया पंबन पुल 72.5 मीटर का रेल स्पैन जहाज़ों के लिए 17 मीटर ऊपर उठाता है, उसी रास्ते पर 111 साल पहले एक अमेरिकी डिज़ाइन का रोलिंग-लिफ्ट स्पैन खुला था

फ़ोटो: Prime Minister's Office / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप किया गया)

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रामेश्वरम जाने वाला नया पंबन पुल 6 अप्रैल 2025 को खुला। यह 2.08 किमी लंबा है, इसमें 99 स्पैन हैं और एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन 17 मीटर तक ऊपर उठता है। इसने 1914 के उस पुल की जगह ली, जिसका शेरज़र स्पैन 1964 के चक्रवात में खड़ा रहा और जिसकी पटरी दो महीने से कम में दुरुस्त कर दी गई थी।

· · 10 मिनट का पठन

नया पंबन पुल 6 अप्रैल 2025 को खुला। यह रामेश्वरम जाने वाली ट्रेनों को 72.5 मीटर लंबे एक इस्पात स्पैन से पार कराता है, जो जहाज़ों को निकलने देने के लिए 17 मीटर ऊपर उठ जाता है। केंद्र सरकार के प्रेस कार्यालय, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार यह भारत का पहला वर्टिकल-लिफ्ट रेल समुद्री पुल है। रेल मंत्रालय के अधीन सरकारी कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने इसे 1914 के उस पुल के बगल में बनाया जिसकी जगह यह लेता है। यह पुल पाक जलडमरूमध्य के ऊपर मुख्य भूमि के मंडपम और पंबन द्वीप के बीच है, जहाँ रामेश्वरम बसा है।

इस रास्ते का रिकॉर्ड नए पुल से पुराना है। PIB के अनुसार पहले पंबन पुल पर एक सदी से ज़्यादा समय तक रेल चलती रही। उसका रोलिंग-लिफ्ट स्पैन दिसंबर 1964 के चक्रवात में खड़ा रहा, जिसने उसके आसपास का ज़्यादातर वायडक्ट बहा दिया था, और पटरी लगभग 45 या 46 दिन में दुरुस्त कर दी गई, यह ब्योरे पर निर्भर करता है।

नया पुल क्या है

6 अप्रैल 2025 की PIB विज्ञप्ति में आँकड़े हैं: 2.08 किमी लंबाई, 99 स्पैन, और 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन जो 17 मीटर तक ऊपर उठता है। PIB ने 4 अप्रैल को रेल मंत्रालय का जो explainer प्रकाशित किया, उसमें लंबाई 2.07 किमी दी गई है। नीचे का ढाँचा दो पटरियों के लिए बना है, और ऊपरी ढाँचे पर फ़िलहाल एक लाइन चलती है। मज़बूती देने वाला इस्पात स्टेनलेस है, जोड़ पूरी तरह वेल्ड किए गए हैं, और पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग (ज़ंग से बचाने के लिए चढ़ाई गई एक सुरक्षा परत) इस्पात को समुद्री हवा से बचाती है। PIB ने डिज़ाइन की आयु 100 साल से ज़्यादा बताई है।

नया डेक पुराने से 3 मीटर ऊँचा है। DT Next ने नवंबर 2024 में बताया कि जहाज़ों के लिए समुद्र तल से ऊपर की निकासी 22 मीटर है, जबकि पुराने पुल के नीचे 19 मीटर थी। RVNL के निदेशक (संचालन) ने समाचार एजेंसी PTI से कहा कि पटरी उठाने वाले नए गर्डर, यानी लंबी बीम, समुद्र से 4.8 मीटर ऊपर हैं, जबकि पुराने पुल के गर्डर उससे 2.1 मीटर ऊपर थे। उनके मुताबिक़ ऊँचे ज्वार में पानी पुराने गर्डरों पर और कभी-कभी पटरी पर भी उछलता था।

उद्घाटन के दिन PIB ने बताया कि प्रधानमंत्री ने पुल का उद्घाटन किया, रामेश्वरम से तांबरम (चेन्नई) की नई ट्रेन और सड़क पुल से एक जहाज़ को हरी झंडी दिखाई, और स्पैन को चलते देखा। रामेश्वरम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह शहर भारत रत्न डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की धरती है।

पहला पुल, और 1914 में उसे खोलने वाला शेरज़र स्पैन

Scroll के अनुसार 2,065 मीटर लंबा यह पुल 24 फ़रवरी 1914 को खुला, जिसकी अध्यक्षता मद्रास के गवर्नर जॉन सिंक्लेयर ने की। Scroll यह भी बताता है कि बनाने वालों ने लगभग 2,000 टन इस्पात लगाया, पुल के लिए 70 लाख रुपये तय किए गए थे, और चक्रवातों तथा हैज़े की एक महामारी ने काम धीमा किया। निर्माण किस साल शुरू हुआ, इस पर ब्योरे अलग हैं, इसलिए यह लेख सिर्फ़ उद्घाटन की तारीख़ देता है।

पर्यटन मंत्रालय का पोर्टल Incredible India 143 खंभे और शेरज़र रोलिंग-लिफ्ट प्रकार का दो पल्लों वाला हिस्सा दर्ज करता है, जिसके दोनों पल्ले हाथ से लीवरों के ज़रिये खोले जाते थे। 1988 में सड़क पुल खुलने तक रामेश्वरम और मुख्य भूमि के बीच यही अकेली कड़ी थी। Scroll के अनुसार मद्रास से सीलोन जाने वाली बोट मेल 1914 से इसे पार करती थी। PIB इस पुल को एक सदी से ज़्यादा समय तक तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और व्यापार की जीवनरेखा बताता है।

मूवेबल ब्रिज हॉल ऑफ़ फ़ेम इस डिज़ाइन का श्रेय इलिनॉय के पेरू में 1858 में जन्मे विलियम डोनाल्ड शेरज़र को देता है। वे शिकागो में काम कर चुके थे, जहाँ स्विंग ब्रिज (जो बीच के खंभे पर बगल की ओर घूमते हैं) नदी का रास्ता रोकते थे, और वे ऐसा पुल खोज रहे थे जिसे धारा के बीच खंभे की ज़रूरत न पड़े। उनका जवाब दो पल्लों वाला बैस्क्यूल था, यानी ऐसा पुल जिसके दोनों आधे हिस्से किनारों से ऊपर झुकते हैं, पर एक बदलाव के साथ: पल्ले ऊपर की ओर घूमते हैं और साथ ही धारा से दूर पीछे की ओर लुढ़क भी जाते हैं।

लुढ़कने से घर्षण घटता है। हॉल ऑफ़ फ़ेम के अनुसार सामान्य पिवट बेयरिंग में फिसलन का घर्षण लुढ़कन के घर्षण का लगभग 15 गुना होता है, और रोलिंग-लिफ्ट स्पैन पिवट वाले स्पैन से 10 से 20 प्रतिशत छोटा हो सकता है। शेरज़र की मृत्यु 20 जुलाई 1893 को टाइफ़ाइड से हुई, तब वे 35 साल के थे, और उनका पेटेंट मरणोपरांत 26 दिसंबर 1893 को मिला। हॉल ऑफ़ फ़ेम 1895 से 1915 के बीच बने ऐसे 150 से ज़्यादा स्पैन गिनता है और 1914 के पंबन रेल पुल को बड़े स्पैनों में सूचीबद्ध करता है। Scroll पंबन के स्पैन को 65.23 मीटर का बताता है।

दिसंबर 1964, और उसके बाद के 46 दिन

एक चक्रवात 22 दिसंबर 1964 की रात तट से टकराया। RVNL के निदेशक (संचालन) उसकी हवा की गति लगभग 160 किमी प्रति घंटा बताते हैं। Scroll 280 किमी प्रति घंटे और 23 फ़ीट तक ऊँची ज्वारीय लहरों का अनुमान उद्धृत करता है। अनुमान अलग हैं, और यहाँ दोनों उन्हीं के नाम से दिए गए हैं जिन्होंने इन्हें बताया।

रेल मंत्रालय ने बाद में पंबन से धनुषकोडी जाने वाली यात्री ट्रेन के साथ जो हुआ, उसे बताया, जैसा PTI ने आगे पहुँचाया। छह डिब्बों की यह ट्रेन रात 11.55 बजे पंबन से 110 यात्रियों के साथ रवाना हुई, जिनमें छात्रों का एक दल भी था, और पाँच रेलकर्मी थे। धनुषकोडी का सिग्नल बंद हो गया और ट्रेन रुक गई, फिर लगभग 20 फ़ीट ऊँची एक लहर उससे टकराई। शुरुआती रिपोर्टों में पंबन में बिके टिकटों के आधार पर 115 हताहत गिने गए, और मंत्रालय ने कहा कि मृतकों की संख्या लगभग 200 होने का संदेह है, क्योंकि बिना टिकट सफ़र करने वाले और भी लोग थे। दक्षिणी रेलवे ने इस त्रासदी पर अपनी विज्ञप्ति 25 दिसंबर को जारी की। मंत्रालय के अनुसार ट्रेन के अलावा द्वीप पर मृतकों की संख्या 500 से ऊपर थी। Scroll धनुषकोडी के लिए 1,800 का सरकारी आँकड़ा देता है, और The News Minute कहता है कि तूफ़ान में 2,000 से ज़्यादा लोग मारे गए।

पुल के बारे में मंत्रालय ने कहा कि पंबन वायडक्ट बह गया और खंभे, कुछ कंक्रीट गर्डर तथा उठने वाला स्पैन बचे रहे। RVNL के निदेशक ने कहा कि शेरज़र स्पैन “चक्रवात में बचा रहा और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा।”

The News Minute में दिल्ली मेट्रो का नेतृत्व करने वाले इंजीनियर ई. श्रीधरन के बारे में छपी रूपरेखा कहती है कि तूफ़ान के बाद पंबन पुल को दोबारा खड़ा करने का काम उन्हें सौंपा गया था। वह इसे तीन महीने का काम बताती है और कहती है कि यह 46 दिन में पूरा हुआ। DT Next और Down To Earth दोनों कहते हैं कि पुल की मरम्मत हुई और सामान्य संचालन 45 दिन के भीतर बहाल हो गया।

पुराना पुल 2022 में क्यों बंद हुआ

DT Next ने बताया कि IIT मद्रास ने पुराने पुल पर निगरानी उपकरण लगाए थे, और 2022 में उन्होंने ट्रेनों के गुज़रने पर ज़रूरत से ज़्यादा कंपन पकड़ा। Incredible India के अनुसार पुल को सुरक्षा के लिए गैर-संचालन योग्य घोषित किए जाने के बाद 23 दिसंबर 2022 को रेल यातायात रुक गया। ट्रेनें मंडपम पर समाप्त होने लगीं और यात्री सड़क पुल से जाने लगे। DT Next और Down To Earth दोनों ज़ंग का नाम लेते हैं, और ETV Bharat के अनुसार मदुरै मंडल के रेल प्रबंधक ने पुराने पुल को जर्जर और परिवहन के लिए अयोग्य कहा।

नए पुल को पहले ही मंज़ूरी मिल चुकी थी। PIB के अनुसार भारत सरकार ने इसे 2019 में मंज़ूर किया, और रेल मंत्रालय RVNL को निर्माता बताता है।

लिफ्ट स्पैन को जगह पर कैसे लगाया गया

PIB में रेल मंत्रालय का explainer कहता है कि इस जगह की स्थितियों ने लिफ्ट स्पैन को लगाने के सामान्य तरीक़े ठुकरा दिए: उसे सहारा देने की कम जगहें, किनारे के पास उथला पानी, जहाज़ों और मछली पकड़ने वाली नावों की आवाजाही, और तेज़ धाराएँ। बनाने वालों ने इसके बजाय स्पैन गर्डर को खंभे से खंभे तक ऑटो-लॉन्चिंग विधि से सरकाया, जिसे सनटेक कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स ने डिज़ाइन किया था और IIT मद्रास ने जाँचा था। यह सरकाना 90 क्रमों में चला, और हर खंभे में दो से तीन दिन लगे।

टावर 28 खंडों में बने और बार्जों पर तैराकर लाए गए। एक लिंटल (आड़ी बीम) उन्हें जोड़ता है और 21.30 गुणा 6.80 गुणा 4.50 मीटर का मशीन रूम बनाता है, जिसमें उठाने की प्रणाली है और जिसका वज़न लगभग 100 टन है, और दोनों सिरों पर 315 टन के काउंटरवेट हैं। वेल्डों की जाँच फ़ेज़्ड ऐरे अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग से हुई। PIB के अनुसार 1,400 टन से ज़्यादा फ़ैब्रिकेशन, लिफ्ट स्पैन, 99 गर्डर, और समुद्र पर पटरी तथा विद्युतीकरण वाला यह काम बिना एक भी चोट के पूरा हुआ। नेटवर्क को बिजली से जोड़ने की मुहिम की चर्चा रेलवे विद्युतीकरण पर हमारे लेख में है।

दक्षिणी सर्कल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने 13 और 14 नवंबर 2024 को पुल का निरीक्षण किया, DT Next ने बताया। उनकी जाँच में लिफ्ट स्पैन का संचालन, ताला लगना और केंद्र में बैठना शामिल था। ETV Bharat ने मंडपम से रामेश्वरम तक एक परीक्षण दौड़ की ख़बर दी जिसमें 15 मिनट लगे।

यह कैसे चलता है, और कहाँ रुकता है

RVNL के निदेशक (संचालन) ने कहा कि लिफ्ट स्पैन हर समय अपनी जगह बैठा रहता है और तभी उठता है जब जहाज़ों को निकलना हो। उन्होंने कहा कि पुल 230 किमी प्रति घंटे की हवा और काफ़ी भूकंपीय भार के लिए डिज़ाइन किया गया है, और RVNL ने अतिरिक्त उपाय किए क्योंकि चक्रवात डिज़ाइन की सबसे कठिन समस्याओं में थे। Down To Earth के अनुसार स्पैन पाँच मिनट में उठाया जा सकता है, पुल पर ट्रेनें 75 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं, और हवा 58 किमी प्रति घंटे पर पहुँचने पर लिफ्ट काम नहीं कर सकता, जो उसके मुताबिक़ अक्टूबर से फ़रवरी के बीच आम है।

भारतीय रेल की PIB वर्षांत समीक्षा इस पुल को 2025 की ऐतिहासिक परियोजनाओं में गिनती है, कश्मीर रेल लिंक के चिनाब पुल के बगल में। समीक्षा कहती है कि पुल रामेश्वरम की रेल कड़ी बहाल करता है और पाक जलडमरूमध्य के पार श्रीलंका तक भविष्य के परिवहन संपर्कों की संभावनाएँ फिर जगाता है।

प्रकाशित आँकड़े कहाँ अलग हैं, और पुराने पुल का क्या बचा है

दो PIB विज्ञप्तियाँ लंबाई 2.07 किमी और 2.08 किमी देती हैं। PIB लागत 700 करोड़ रुपये से ऊपर बताता है। DT Next ने नवंबर 2024 में 535 करोड़ रुपये और जनवरी 2026 में 445 करोड़ रुपये बताए, और ETV Bharat ने 550 करोड़ रुपये बताए। जो स्पैन उठता है वह PIB और ETV Bharat में 72.5 मीटर का है, और DT Next तथा Down To Earth की रिपोर्टों में 63 मीटर का। Down To Earth पुराने पुल के खुलने की तारीख़ 25 फ़रवरी भी बताता है, यानी Scroll और Incredible India से एक दिन बाद।

RVNL पुराने पुल को तोड़ रहा है, DT Next ने 23 जनवरी 2026 को बताया। बीच के लिफ्ट स्पैन के लिए 2.81 करोड़ रुपये और लगभग चार महीने का बजट है, और काम चलने तक वह नावों के लिए नहीं खुलेगा। नवंबर 2024 में मदुरै मंडल के रेल प्रबंधक ने कहा था कि पुराने पुल को राष्ट्रीय स्मारक बनाने पर फ़ैसला लंबित है। 24 जुलाई 2026 को Deccan Herald ने बताया कि तोड़फोड़ जारी रहने के बीच निवासी इसे सहेजने की अपील कर रहे थे।

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. PIB: PM lays foundation stone, inaugurates development works worth over Rs 8,300 crore in Rameswaram (6 April 2025)
  2. PIB: On Ram Navami, PM to visit Tamil Nadu and inaugurate New Pamban Rail Bridge (4 April 2025)
  3. PIB, Ministry of Railways: Bridging Progress, The Rise of the New Pamban Bridge (4 April 2025)
  4. PIB, Ministry of Railways: Year End Review 2025 (28 December 2025)
  5. Incredible India (Ministry of Tourism): Pamban Bridge, Rameswaram
  6. Deccan Herald (PTI): New Pamban Bridge can withstand even stronger cyclones than the one in 1964, RVNL director (6 April 2025)
  7. Scroll: The Pamban Bridge story (31 July 2021)
  8. Movable Bridge Hall of Fame: William D. Scherzer, Inventor of the Rolling Lift Bridge
  9. The News Minute: From Pamban to Kolkata and Delhi, the trail of E Sreedharan's success
  10. Down To Earth: Pamban Bridge, where history and technology meet (5 April 2025)
  11. DT Next: Commissioner of Railway Safety to conduct a two-day inspection at New Pamban Bridge (12 November 2024)
  12. DT Next: Railway safety officials conduct safety trial between Mandapam and Rameshwaram (14 November 2024)
  13. ETV Bharat: Railways conducts inspections of new bridge in Pamban (14 November 2024)
  14. DT Next: Dismantling of old Pamban bridge begins (23 January 2026)
  15. Deccan Herald: End of an era, the Pamban cantilever bridge fades into history (24 July 2026)

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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